Aligarh: 25 साल के भीतर 100 फुट गिरा भूजल स्तर, बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा शहर
साल दर साल अलीगढ़ का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जहां 25 साल पहले 60 से 100 फुट पर पानी मिल जाता था, वहीं अब 200 से 250 फुट पर पानी मिल रहा है। अगर ऐसे ही जल स्तर गिरता रहा तो भारी जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
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विस्तार
अलीगढ़ महानगर में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। पिछले 25 साल में 100 फुट तक पानी नीचे खिसक गया है। जिसका बड़ा कारण पानी की बर्बादी तो है ही साथ ही तालाबों का खत्म होना भी एक बड़ी वजह है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि यदि अतिदोहन के चलते भूजल के स्तर में गिरावट की रफ्तार यही रही तो आने वाले कुछ वर्षों में ही शहर को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
सन 2000 में शहर में 60 से 100 फुट की बोरिंग पर पीने योग्य पानी मिल जाता था, लेकिन अब 250 से 300 फुट पर पीने योग्य पानी है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि नगर निगम अब नलकूप के लिए 300 से 400 फुट पर बोरिंग करा रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों में लगे 30 फीसदी हैंडपंप सूख चुके हैं। बता दें कि शहरभर में मनमाने तरीके से सबमर्सिबल लगवाए जा रहे हैं, जिनसे भूजल की बड़ी खपत हो रही है। इसे नियंत्रित करने में नगर निगम फेल साबित हो रहा है। हालात यहां तक खराब हैं कि लोगों ने घरों के अलावा सड़क पर सबमर्सिबल लगा लिए हैं।
भूजल स्तर में गिरावट जारी है, जिससे निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। गर्मी में पानी की समस्या नहीं होने दी जाएगी। नौ ओवर हेड टैंक और आठ अंडरग्राउंड टैंक चालू कराए हैं। इसके अलावा 25 मिनी नलकूप चालू हो चुके हैं। दूसरी ओर गंगा वाटर प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है, जिससे बड़ी वैकल्पिक व्यवस्था खड़ी हो सकेगी।- सुरेश चंद्र, प्रभारी महाप्रबंधक जल निगम
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शहर में खत्म हो गए 15 बड़े तालाब
महानगर में भूजल स्तर में आ रही गिरावट का बड़ा कारण रिचार्ज के माध्यमों का लगातार कम होना है। शहर की पोखरें और पेड़ भूजल के रिचार्ज का बड़ा माध्यम हैं, लेकिन ज्यादातर पोखरों पर अवैध निर्माण हो चुके हैं या पानी सूख चुका है। आबादी क्षेत्र बढ़ने के कारण पेड़ों का कटान भी जारी है। 30 बड़ी पोखरें नगर निगम में दर्ज हैं, जिनमें से 15 पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। कुछ पोखरों में बारिश के दिनों में ही पानी दिखाई देता है। कालीदह, गूलर रोड, खैर रोड, नौरंगाबाद की पोखरें काफी हद तक सिकुड़ चुकी हैं। इसी तरह मथुरा रोड, आगरा रोड, रामघाट रोड, दिल्ली रोड, खैर रोड क्षेत्र में आबादी बढ़ी है, जिसके चलते बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान हुआ है।
फेल हो रहे नगर निगम के नलकूप
महानगर में नगर निगम के 178 बड़े नलकूप हैं, जिनकी मोटरें दबाव के चलते आए दिन फुुंकती रहती हैं। इसके चलते संबंधित क्षेत्रों में जल संकट छा जाता है। 20 से अधिक नलकूप खराब पड़े हैं। हाल ही में 40 मिनी नलकूप मंजूर हुए हैं, जिनमें से 25 चालू हो चुके हैं। ये नलकूप क्षेत्रों में सीधी सप्लाई दे रहे हैं। इसके अलावा 5089 हैंडपंप हैं, जिनमें से 1593 खराब पड़े हैं। इसका बड़ा कारण उन क्षेत्रों में भूजल स्तर गिरना है। नगर निगम के जेई नरेंद्र सिंह ने बताया कि शहर के जल संकट से निपटने के लिए 40 कर्मचारियों की टीम बनाई है, जो क्षेत्रों में जाकर जल आपूर्ति से जुड़ी समस्या का समाधान कराएंगे।
पुराने शहर की स्थिति ज्यादा खराब
पुराने शहर के लोग जल संकट से ज्यादा परेशान हैं। मानिक चौक, देहलीगेट, ऊपरकोट, जयगंज, सासनीगेट क्षेत्र में भूजल स्तर में ज्यादा गिरावट है। सबसे ज्यादा ऊंचा क्षेत्र ऊपर कोट है जहां 400 फुट पर पानी है। इसी तरह जयगंज, सासनीगेट में पीने योग्य पानी 250 फुट पर है।
फाइलों में बंद गंगा वाटर प्रोजेक्ट
भूजल का उपयोग कम करने के लिए गंगा वाटर प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया। जल निगम ने 600 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी थी, लेकिन छह साल से यह प्रोजेक्ट फाइलों में ही बंद है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से भूजल पर निर्भरता कुछ कम हो जाएगी।
आंकड़े
- 15 लाख तक पहुंच गई शहर की आबादी
- 90 वार्ड हैं नगर निगम के क्षेत्र में
- 100 किलोमीटर स्क्वायर हुआ नगर निगम का क्षेत्रफल
महत्वपूर्ण तथ्य
- रोज पानी की डिमांड - 230 एमएलडी
- रोज पानी की आपूर्ति - 190 एमएलडी
- रोज प्रति व्यक्ति पानी की मांग - 135 लीटर
- रोज प्रति व्यक्ति पानी की सप्लाई - 90 लीटर
- पानी कनेक्शन - 91 हजार
- पाइप लाइन - 1400 किलोमीटर
- हैंडपंप - 5089
- खराब हैंडपंप - 1593
- नलकूप - 178
- मिनी नलकूप - 40
- वाटर टैंकर - 30 नग