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अलीगढ़ गंगा-जमुनी संस्कृति का केंद्र हैः विश्वनाथ्ा त्रिपाठी

Sun, 03 Apr 2016 01:55 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
अलीगढ़/ब्यूरो Updated Sun, 03 Apr 2016 01:55 AM IST
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Aligarh Ganga composite culture center : the Biswnatha Tripath
पुरस्‍कार ‌वितरण समाराोह
 प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि अलीगढ़ गंगा-जमुनी संस्कृति का केंद्र है। संस्कृति कवि कालिदास को अत्यंत प्रिय अशोक का फूल केवल एएमयू के प्रांगण में ही मिला जो एक अद्भुत उपलब्धि है। डॉ. त्रिपाठी शनिवार को केपी सिंह मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार 2015 युवा कवि रमेश प्रजापति को उनके कविता संग्रह ‘शून्यकाल में बजता झुनझुना’ के लिए प्रदान किया गया। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि आज प्रगतिशील साहित्यिक  मंच बहुत कम हो गए हैं। केपी सिंह मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से युवा लेखकों को प्रोत्साहित करना और सार्थक रचनाकर्म के लिए प्रेरित करना आज बहुत महत्वपूर्ण है।
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 ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि जीवन संघर्षों से ही सार्थक रचनाकर्म होता है। सामाजिक सरोकार और गहन चिंतन रमेश प्रजापति की कविताओं की विशेषता है। उन्होंने मलखान सिंह सिसौदिया के कविता कर्म को भी रेखांकित किया।
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प्रो. वेद प्रकाश ने रमेश प्रजापति की कविताओं पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी कविताओं में ग्रामीण जीवन की गहन अनुभूतियां हैं और प्रकृति-चित्रण का विस्तार है जो सार्थक सामाजिक चिंतन से जुड़ जाता है। पुरस्कृत कवि रमेश प्रजापति ने कहा कि कविता सदैव मेरे जीवन के साथ रही है। प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है और जीवन के संघर्षों में प्रेरणा देती है। कथादेश पत्रिका के संपादक हरिनारायण ने भी रमेश प्रजापति की कविताओं की सराहना की। सत्र की अध्यक्षता उर्दू के सुप्रसिद्ध लेखक काजी अब्दुल सत्तार ने की और संचालन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष प्रो. राजीव लोचन शुक्ला ने किया।
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झूठ से ज्यादा खतरनाक होता है अर्द्धसत्य...
कार्यक्रम के ‘काव्य संध्या’ सत्र की अध्यक्षता हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि मदन कश्यप ने की। उन्होंने अपनी अनेक रचनाओं का पाठ किया। उनकी कविता ‘झूठ से ज्यादा खतरनाक होता है अर्द्धसत्य, अर्द्धसत्य से अश्वत्थामा नहीं द्रोणाचार्य मारे जाते हैं’ तथा अन्य कविताएं सराही गयी।  तेज रफ्तार लोग, ढपोरशंख, कालाधन, डरता हूं तथा चालाक लोग-कविताओं का भी उन्होंने पाठ किया। इस सत्र में पुरस्कृत कवि रमेश प्रजापति ने ‘दु:खों की कठोर ज़मीन, तुम्हारे गांव जाने के बाद, ये मेरा शहर है प्यारे, धरती हमारी बीज राजा के, हम वही सपने देखें जो राजा दिखाए- कविताओं का पाठ किया। चर्चित कवि अरुण आदित्य ने ‘पहाड़ झांकता है नदी में, उसे सिर के बल खड़ा कर देती है नदी’ जैसी अनेक प्रभावशाली कविताओं का पाठ किया।

इस सत्र में जहीर हसन, मौ. अफजल, अब्दुल मन्नान, सरताज आलम, तौसीफ  के अतिरिक्त चर्चित कवि सुरेश कुमार, संजीव कौशल, राजीव लोचन तथा शंभुनाथ तिवारी ने कविता पाठ किया। काव्य संध्या सत्र का संचालन प्रो. शंभुनाथ ने किया। कार्यक्रम में प्रदीप सक्सेना, प्रेम कुमार, सगीर अफराहीम, तारिक छतारी, सीमा सगीर, तसद्दुक हुसैन, तसनीम सुहेल, इफ्फत असगर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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