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Aligarh News: पूर्व सांसद की सजा निरस्त, 2009 लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज हुआ था मुकदमा, यह है मामला

Fri, 14 Jul 2023 09:27 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 14 Jul 2023 09:27 PM IST
सार

ये मुकदमा 28 मार्च 2009 को तत्कालीन एसओ गभाना जसपाल सिंह पवार की ओर से दर्ज कराया गया था। जिसमें आरोप था कि उस समय कांग्रेस से लोकसभा प्रत्याशी व पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह द्वारा गांव पनिहावर में चुनाव प्रचार के लिए नुक्कड़ सभा करने की जानकारी मिली थी। वहां काफी संख्या में गाड़ियां खड़ी थीं। मौके पर वे इनकी अनुमति नहीं दिखा सके। पूर्व सांसद ने बिना अनुमति चुनाव प्रचार किया था और उनकी गाड़ी पर हूटर लगा था।

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Aligarh former MP Bijendra Singh's sentence canceled
पूर्व सांसद चौधरी बिजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आचार संहिता उल्लंघन के मुकदमे में सजायाफ्ता अलीगढ़ के पूर्व सांसद व वरिष्ठ सपा नेता चौ.बिजेंद्र सिंह को अपर सत्र न्यायालय से राहत मिली है। निचली अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के खिलाफ की गई अपील में उस फैसले को निरस्त कर दिया गया है। यह फैसला एडीजे 13 विशेष एमपी एमएलए कोर्ट ने सुनाया है। इस फैसले को बचाव पक्ष ने न्याय की जीत करार दिया है।

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ये मुकदमा 28 मार्च 2009 को तत्कालीन एसओ गभाना जसपाल सिंह पवार की ओर से दर्ज कराया गया था। जिसमें आरोप था कि उस समय कांग्रेस से लोकसभा प्रत्याशी व पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह द्वारा गांव पनिहावर में चुनाव प्रचार के लिए नुक्कड़ सभा करने की जानकारी मिली थी। वहां काफी संख्या में गाड़ियां खड़ी थीं। मौके पर वे इनकी अनुमति नहीं दिखा सके। पूर्व सांसद ने बिना अनुमति चुनाव प्रचार किया था और उनकी गाड़ी पर हूटर लगा था। इसके बाद अन्य कई गांवों में सभाएं की गईं। 
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इस मामले में चौ. बिजेंद्र सिंह सहित 100-150 कार्यकर्ताओं के विरुद्ध आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा लिखा गया। इस मुकदमे में इसी वर्ष 31 जनवरी को एमपी/एमएलए मामलों की सुनवाई वाली एसीजेएम अदालत ने बिजेंद्र सिंह को दो माह के कारावास व एक हजार रुपये की सजा सुनाई थी। हालांकि तत्काल उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था। 
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता योगेंद्र सारस्वत ने बताया कि इस फैसले के खिलाफ एडीजे 13 की अदालत में अपील दायर की गई। जिसमें कहा गया कि यह मुकदमा धारा 144 की घोषणा करने वाले अधिकारी या उनके अधीनस्थ द्वारा कराया जाना चाहिए था। मगर मुकदमे में वादी पुलिस है। चार्जशीट में बिजेंद्र सिंह को गाड़ी में बताया गया। इससे साफ है कि वे सभा में नहीं थे, न शांति व्यवस्था भंग हुई। न न्यायालय में घटना की कोई वीडियोग्राफी पेश की गई। इन तर्कों के आधार पर अपर सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया है।

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