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अलीगढ़ : कोरोना वायरस पर भारी पड़ सकता है केंचुआ
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वर्मीकंपोस्ट।
- फोटो : CITY OFFICE
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शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए केंचुए वाली खाद (जैविक खाद) से प्राप्त की गई उपज कारगर साबित हो सकती है। किसानों का मित्र कहा जाने वाला केंचुआ कोरोना वायरस से जंग में इंसानों का मददगार हो सकता है। ऐसा दावा किया है धर्म समाज डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री विभाग के प्रवक्ता और केंचुए की खाद पर लंबे समय से काम करने वाले डॉक्टर शैलेंद्र पाल सिंह।
उनका कहना है कि केंचुए से बनाई गई खाद और इससे प्राप्त हुई उपज में केमिकल पेस्टीसाइडस नहीं होते हैं। जब कीटनाशक कम हो जाएंगे तो शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट अपने आप बढ़ जाएंगे। टॉक्सिक का लेवल कम हो जाएगा। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होगा। लेकिन डॉक्टर शैलेंद्र पाल सिंह इसके दूसरे पहलू पर भी रोशनी डालते हैं और कहते हैं कि केंचुए वाली खाद से उपज हासिल करना एक बहुत ही श्रम साध्य और समय अधिक लगने वाला कार्य है। इसके लिए संयम की आवश्यकता होती है। साथ ही इससे प्राप्त हुई उपज की मांग भी अभी बाजार में उस प्रकार नहीं है जितनी सामान्य उपज की है।
इसलिए किसान इस तरफ रुख करने में कतराता है। अहम बात यह है कि सरकार की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा है। अगर सरकार चाहती है कि पैदावार बढ़ाने में इस प्रकार की जैविक खाद का प्रयोग किया जाए तो इसके लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही जैविक खाद के उत्पादन का अच्छा मूल्य भी मिलना चाहिए।
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उनका कहना है कि केंचुए से बनाई गई खाद और इससे प्राप्त हुई उपज में केमिकल पेस्टीसाइडस नहीं होते हैं। जब कीटनाशक कम हो जाएंगे तो शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट अपने आप बढ़ जाएंगे। टॉक्सिक का लेवल कम हो जाएगा। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होगा। लेकिन डॉक्टर शैलेंद्र पाल सिंह इसके दूसरे पहलू पर भी रोशनी डालते हैं और कहते हैं कि केंचुए वाली खाद से उपज हासिल करना एक बहुत ही श्रम साध्य और समय अधिक लगने वाला कार्य है। इसके लिए संयम की आवश्यकता होती है। साथ ही इससे प्राप्त हुई उपज की मांग भी अभी बाजार में उस प्रकार नहीं है जितनी सामान्य उपज की है।
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इसलिए किसान इस तरफ रुख करने में कतराता है। अहम बात यह है कि सरकार की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा है। अगर सरकार चाहती है कि पैदावार बढ़ाने में इस प्रकार की जैविक खाद का प्रयोग किया जाए तो इसके लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही जैविक खाद के उत्पादन का अच्छा मूल्य भी मिलना चाहिए।
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