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अलीगढ़: सजायाफता का निकला रेलवे जंक्शन पर मिला शव
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सजायाफ्ता का निकला रेलवे जंक्शन पर मिला शव
हाईकोर्ट से तारीख कर लौट रहा था घर, तबीयत खराब होने से हुई मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अलीगढ़। रेलवे जंक्शन के टिकट बुकिंग काउंटर के पास बृहस्पतिवार रात को मिले शव की शनिवार को शिनाख्त हो गई। शव सिकंदराबाद के एक सजायाफ्ता कैदी का निकला। शिनाख्त के बाद जीआरपी ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिवार वालों को सौंप दिया।
गोरिंदर सिंह (46) पुत्र भूले सिंह निवासी महिपा जागीर, सिकंदराबाद, बुलंदशहर के बेटे भरत सिंह ने बताया कि पिता 20 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे। वहां से जानलेवा हमले के मुकदमे के आरोप में 21 नवंबर को तारीख करने के बाद घर को लौट रहे थे। अलीगढ़ जंक्शन पर पहुंचने के बाद उन्होंने परिवार वालों को फोन भी किया था। मगर, उसके बाद वह घर नहीं पहुंचे।
उनकी तलाश करते हुए शनिवार को जंक्शन पर पहुंचे तो मौत की जानकारी हुई। भरत के मुताबिक 15 साल पहले परिवार के सदस्यों से हुए विवाद में पिता पर विपक्षियों ने जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था। उस मुकदमे में सेशन कोर्ट से सात साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में पिता ने याचिका दाखिला की थी। पिता के पांच साल की सजा काटने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई शुरू की थी। तभी से पिता जेल से बाहर चल रहे थे।
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हाईकोर्ट से तारीख कर लौट रहा था घर, तबीयत खराब होने से हुई मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अलीगढ़। रेलवे जंक्शन के टिकट बुकिंग काउंटर के पास बृहस्पतिवार रात को मिले शव की शनिवार को शिनाख्त हो गई। शव सिकंदराबाद के एक सजायाफ्ता कैदी का निकला। शिनाख्त के बाद जीआरपी ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिवार वालों को सौंप दिया।
गोरिंदर सिंह (46) पुत्र भूले सिंह निवासी महिपा जागीर, सिकंदराबाद, बुलंदशहर के बेटे भरत सिंह ने बताया कि पिता 20 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे। वहां से जानलेवा हमले के मुकदमे के आरोप में 21 नवंबर को तारीख करने के बाद घर को लौट रहे थे। अलीगढ़ जंक्शन पर पहुंचने के बाद उन्होंने परिवार वालों को फोन भी किया था। मगर, उसके बाद वह घर नहीं पहुंचे।
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उनकी तलाश करते हुए शनिवार को जंक्शन पर पहुंचे तो मौत की जानकारी हुई। भरत के मुताबिक 15 साल पहले परिवार के सदस्यों से हुए विवाद में पिता पर विपक्षियों ने जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था। उस मुकदमे में सेशन कोर्ट से सात साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में पिता ने याचिका दाखिला की थी। पिता के पांच साल की सजा काटने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई शुरू की थी। तभी से पिता जेल से बाहर चल रहे थे।
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