भाजयुमो गैंगवार: विधानसभा चुनाव 2027 सामने, युवाओं की लड़ाई से बिगड़ रहा अलीगढ़ शहर-कोल सीटों का समीकरण
भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी सूची है। इसमें पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अन्य दलों से आए नेता भी शामिल हैं। अधिकांश दावेदार वैश्य और ब्राह्मण समाज से हैं। ऐसे में इन सभी के आगे बड़ा संकट खड़ा हुआ है कि एक तरफ उनका समाज खड़ा है और दूसरी ओर उनका राजनीतिक भविष्य है।
विस्तार
अलीगढ़ के सराय हकीम में भाजयुमो नेताओं की लड़ाई से भाजपा का शहर और कोल सीटों पर समीकरण बिगड़ने लगा है। फायरिंग के बाद जेले भेजे गए आरोपियों में से अधिकांश जिन जातियों से जुड़े हैं, उनका दबदबा इन दोनों सीटों पर है। अगले कुछ महीने में विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू होने वाली है, या यूं कहे कि दावेदारों ने जनसंपर्क बढ़ाना भी शुरू कर दिया है। ऐसे में सियासी गलियारों से खबर यही है कि शहर और कोल सीट पर भविष्य में अपनी दावेदारी देख रहे नेताओं की चिंता बढ़ गई है।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि शहर सीट से मुक्ता राजा और कोल से अनिल पाराशर विधायक हैं। शहर सीट से वैश्य समाज और कोल सीट से ब्राह्मण समाज का परंपरागत प्रभाव रहा है। ऐसे में इन समुदायों से जुड़े युवा नेताओं के बीच टकराव ने पार्टी के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से पार्टी को काफी नुकसान हुआ है, जिसे देखते हुए अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। इसलिए दोनों पक्षों के बीच सुलह और फिर जमानत मंजूर कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी सूची है। इसमें पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अन्य दलों से आए नेता भी शामिल हैं। अधिकांश दावेदार वैश्य और ब्राह्मण समाज से हैं। ऐसे में इन सभी के आगे बड़ा संकट खड़ा हुआ है कि एक तरफ उनका समाज खड़ा है और दूसरी ओर उनका राजनीतिक भविष्य है।
पार्टी में भी गुटबाजी से बढ़ी मुश्किलें
भाजपा के महानगर और जिला संगठन के बीच लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी भी इस घटना के बाद जाहिर होने लगी है। जिला टीम से जुड़े एक नेता का यहां तक कहना है कि अब तक महानगर के किसी भी बड़े नेता ने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनके पास पार्टी ने पूरे जिला की जिम्मेदारी दी है। कुछ नेता लखनऊ और दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व से करीबी बनाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हैं।
सब चाहते हैं, हमारे साथ रहें युवा
कुछ नेताओं का यहां तक कहना है कि हर नेता अपने समर्थक युवा नेता के साथ खड़ा नजर आता है। सराय हकीम की घटना में अबतक विवाद न सुलझाने में आ रही परेशानी का कारण भी यही है। भाजपा, भाजयुमो, एबीवीपी, विहिप और बजरंग दल सहित कई संगठनों से जुड़े अधिकांश युवा एक से अधिक संगठनों के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं, जिससे सभी संगठनों को उनकी सक्रियता का लाभ मिलता है। फायरिंग में शामिल कई आरोपी भी इन्हीं में शामिल हैं।