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अलीगढ़ : निर्णय की दहलीज पर पांच हत्याओं का मुकदमा, बहस शुरू
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कस्बा खैर की ब्लाक कॉलोनी के एक मकान में किसान परिवार के चार सदस्यों की हत्या। परिवार के मुखिया की आगरा में हत्या कर शव फेंका जाना। इस सनसनीखेज कांड को शायद ही कोई भूला हो। वर्ष 2011 के फरवरी माह में हुए इस जघन्य अपराध ने पुलिस ही नहीं हर जनमानस को हिलाकर रख दिया था।
ठीक दस साल बाद यह बहुचर्चित कांड निर्णय की दहलीज पर पहुंच रहा है। बृहस्पतिवार को एडीजे प्रथम शाहिद रजा के न्यायालय में ट्रायल के दौरान अभियोजन व बचाव पक्ष की बहस की प्रक्रिया शुरू हो गई। प्रारंभिक बहस के बाद न्यायालय ने शेष बहस के लिए अब 2 नवंबर तारीख नियत कर दी है। इसके बाद निर्णय की प्रक्रिया हो सकेगी।
ये है सनसनीखेज हत्याकांड का फ्लैशबैक
वाकया 22 अगस्त 2011 की दोपहर का है, जब ब्लाक कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने महसूस किया कि मूल रूप से मथुरा जनपद के धूमरा के केदार सिंह के मकान का दरवाजा 18 अगस्त से खुला नहीं है। अब उस मकान के अंदर से बहुत तेज दुर्र्गंध आ रही है, जिससे तमाम आशंकाएं पैदा होने लगीं।
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इस पर लोगों ने मांट के गांव गढ़ी मंसुख में रहने वाले केदार सिंह के ससुर किशन सिंह व इलाका पुलिस को खबर दी। खबर पर परिवार के साथ किशन सिंह भी यहां पहुंचे और पुलिस भी पहुंची। जब घर का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
घर के अलग-अलग हिस्सों में गृहस्वामी केदार सिंह की पत्नी हेमलता, दो बच्चों व उनके पिता की लाशें पड़ी थीं। खबर पर तत्कालीन आईजी, एसएसपी, फील्ड यूनिट, फॉरेंसिक टीम सहित पूरा अमला मौके पर पहुंचा। शवों का पोस्टमार्टम कराया गया तो पाया कि इन्हें गला दबाकर मारा गया है।
हत्या करीब 4 दिन पहले यानी 18 अगस्त को हुई है। गरमी में बंद घर में शव पड़े होने के कारण उनमें कीड़े तक पड़ गए थे। इस कांड का मुकदमा अज्ञात में केदार सिंह के ससुर की ओर से दर्ज कराया गया। जांच में यह भी पता चला कि केदार सिंह लापता हैं। बाद में उनका शव आगरा में पाया गया।
ये हुआ था घटना का खुलासा
इस घटना में खुद तत्कालीन एसएसपी सत्येंद्रवीर सिंह ने कई दिन तक खैर में कैंप किया और खुलासा करते हुए केदार के रिश्ते के भाई चंद्रवीर, उसके साथी रोहित, पवन उर्फ कलुआ व राजीव शर्मा को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उजागर किया था कि केदार सिंह के कोई भाई आदि नहीं था। इसलिए वह अपने बच्चों को पढ़ाने के इरादे से गांव से संपत्ति बेचकर यहां आकर बसे।
इस दौरान चंद्रवीर ने केदार से दो लाख रुपये उधार मांगे थे। इसी क्रम में 12 अगस्त को चंद्रवीर केदार को अपने साथ ले गया। फिर केदार नहीं लौटे। जांच में खुलासा किया गया कि केदार की हत्या कर शव आगरा में फेंका गया। बाद में परिवार के अन्य सदस्यों को इसलिए मारा गया कि उनके मकान व संपत्तियों पर फर्जी वसीयत/बैनामे के आधार पर हम लोग कब्जा कर लेंगे।
गवाही पूरी हुई, आज से बहस शुरू
एडीजे प्रथम के न्यायालय में मुकदमे का ट्रायल चल रहा है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार मुकदमे में सभी साक्ष्य व गवाही पूरी हो गई है। 10 से ज्यादा गवाह इस मुकदमे में हुए हैं। बृहस्पतिवार को इस मामले में बहस के लिए तारीख नियत थी।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की प्रारंभिक बहस की प्रक्रिया पूरी हो गई। कुछ बहस होना अभी शेष है। जिसके लिए न्यायालय ने 2 नवंबर तारीख नियत की है। एडीजीसी के अनुसार उम्मीद है कि बहस की प्रक्रिया पूरी होते ही जल्द ही इस मुकदमे का ट्रायल पूरा हो जाएगा और निर्णय होगा।
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ठीक दस साल बाद यह बहुचर्चित कांड निर्णय की दहलीज पर पहुंच रहा है। बृहस्पतिवार को एडीजे प्रथम शाहिद रजा के न्यायालय में ट्रायल के दौरान अभियोजन व बचाव पक्ष की बहस की प्रक्रिया शुरू हो गई। प्रारंभिक बहस के बाद न्यायालय ने शेष बहस के लिए अब 2 नवंबर तारीख नियत कर दी है। इसके बाद निर्णय की प्रक्रिया हो सकेगी।
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ये है सनसनीखेज हत्याकांड का फ्लैशबैक
वाकया 22 अगस्त 2011 की दोपहर का है, जब ब्लाक कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने महसूस किया कि मूल रूप से मथुरा जनपद के धूमरा के केदार सिंह के मकान का दरवाजा 18 अगस्त से खुला नहीं है। अब उस मकान के अंदर से बहुत तेज दुर्र्गंध आ रही है, जिससे तमाम आशंकाएं पैदा होने लगीं।
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इस पर लोगों ने मांट के गांव गढ़ी मंसुख में रहने वाले केदार सिंह के ससुर किशन सिंह व इलाका पुलिस को खबर दी। खबर पर परिवार के साथ किशन सिंह भी यहां पहुंचे और पुलिस भी पहुंची। जब घर का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
घर के अलग-अलग हिस्सों में गृहस्वामी केदार सिंह की पत्नी हेमलता, दो बच्चों व उनके पिता की लाशें पड़ी थीं। खबर पर तत्कालीन आईजी, एसएसपी, फील्ड यूनिट, फॉरेंसिक टीम सहित पूरा अमला मौके पर पहुंचा। शवों का पोस्टमार्टम कराया गया तो पाया कि इन्हें गला दबाकर मारा गया है।
हत्या करीब 4 दिन पहले यानी 18 अगस्त को हुई है। गरमी में बंद घर में शव पड़े होने के कारण उनमें कीड़े तक पड़ गए थे। इस कांड का मुकदमा अज्ञात में केदार सिंह के ससुर की ओर से दर्ज कराया गया। जांच में यह भी पता चला कि केदार सिंह लापता हैं। बाद में उनका शव आगरा में पाया गया।
ये हुआ था घटना का खुलासा
इस घटना में खुद तत्कालीन एसएसपी सत्येंद्रवीर सिंह ने कई दिन तक खैर में कैंप किया और खुलासा करते हुए केदार के रिश्ते के भाई चंद्रवीर, उसके साथी रोहित, पवन उर्फ कलुआ व राजीव शर्मा को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उजागर किया था कि केदार सिंह के कोई भाई आदि नहीं था। इसलिए वह अपने बच्चों को पढ़ाने के इरादे से गांव से संपत्ति बेचकर यहां आकर बसे।
इस दौरान चंद्रवीर ने केदार से दो लाख रुपये उधार मांगे थे। इसी क्रम में 12 अगस्त को चंद्रवीर केदार को अपने साथ ले गया। फिर केदार नहीं लौटे। जांच में खुलासा किया गया कि केदार की हत्या कर शव आगरा में फेंका गया। बाद में परिवार के अन्य सदस्यों को इसलिए मारा गया कि उनके मकान व संपत्तियों पर फर्जी वसीयत/बैनामे के आधार पर हम लोग कब्जा कर लेंगे।
गवाही पूरी हुई, आज से बहस शुरू
एडीजे प्रथम के न्यायालय में मुकदमे का ट्रायल चल रहा है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार मुकदमे में सभी साक्ष्य व गवाही पूरी हो गई है। 10 से ज्यादा गवाह इस मुकदमे में हुए हैं। बृहस्पतिवार को इस मामले में बहस के लिए तारीख नियत थी।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की प्रारंभिक बहस की प्रक्रिया पूरी हो गई। कुछ बहस होना अभी शेष है। जिसके लिए न्यायालय ने 2 नवंबर तारीख नियत की है। एडीजीसी के अनुसार उम्मीद है कि बहस की प्रक्रिया पूरी होते ही जल्द ही इस मुकदमे का ट्रायल पूरा हो जाएगा और निर्णय होगा।