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अलीगढ़ : आदेश से पहले बीएसए ने कर डाला निरीक्षण, एमएलसी ने उठाए सवाल
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एमएलसी स्नातक मानवेंद्र प्रताप सिंह ने बेसिक शिक्षा अधिकारी की कारगुजारी पर सवाल खड़े करते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री को पत्र लिखा है। साफ कहा कि जिस निरीक्षण के लिए दोपहर में आदेश हुआ। उस आदेश का पालन आदेश जारी होने से पहले कैसे हो गया? उसमें भी बिना नोटिस जारी किए सीधे वेतन काटने की कार्रवाई नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। इस विषय पर उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा से भी वार्ता की है।
एमएलसी की ओर से बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा गया कि महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने 18 जुलाई को एक आदेश जारी किया, जिसमें प्रतिदिन सुबह 6 बजे अधिकारियों को कार्यालय बुलाकर विद्यालयों का औचक निरीक्षण कराने और गैरहाजिर मिलने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इस आदेश के जारी होने से पहले बीएसए ने आदेश के पूर्वानुमान के आधार पर 18 जुलाई की सुबह टीम गठित कर विद्यालयों के निरीक्षण कराए, जिसमें 24 शिक्षकों के वेतन काटे। यह वेतन काटने का आदेश भी उसी दिन जारी किया गया। इसमें बिना नोटिस कार्रवाई नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। यह वेतन काटने का तुगलकी फरमान है।
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इधर, एक आदेश में अभिभावकों पर छात्रों की वर्दी खरीदने का जो फरमान सुनाया है। उससे शिक्षकों व अभिभावकों में वैमनस्यता बढ़ रही है। इस कार्य को शिक्षकों से मुक्त रखा जाए। साथ में तुगलकी फरमान जारी करने वाले बीएसए पर कार्रवाई की जाए। एमएलसी मानवेंद्र सिंह के अनुसार इस मामले में उन्होंने खुद महानिदेशक स्कूली शिक्षा से भी वार्ता की है और पूरा विषय बताया है।
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एमएलसी की ओर से बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा गया कि महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने 18 जुलाई को एक आदेश जारी किया, जिसमें प्रतिदिन सुबह 6 बजे अधिकारियों को कार्यालय बुलाकर विद्यालयों का औचक निरीक्षण कराने और गैरहाजिर मिलने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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इस आदेश के जारी होने से पहले बीएसए ने आदेश के पूर्वानुमान के आधार पर 18 जुलाई की सुबह टीम गठित कर विद्यालयों के निरीक्षण कराए, जिसमें 24 शिक्षकों के वेतन काटे। यह वेतन काटने का आदेश भी उसी दिन जारी किया गया। इसमें बिना नोटिस कार्रवाई नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। यह वेतन काटने का तुगलकी फरमान है।
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इधर, एक आदेश में अभिभावकों पर छात्रों की वर्दी खरीदने का जो फरमान सुनाया है। उससे शिक्षकों व अभिभावकों में वैमनस्यता बढ़ रही है। इस कार्य को शिक्षकों से मुक्त रखा जाए। साथ में तुगलकी फरमान जारी करने वाले बीएसए पर कार्रवाई की जाए। एमएलसी मानवेंद्र सिंह के अनुसार इस मामले में उन्होंने खुद महानिदेशक स्कूली शिक्षा से भी वार्ता की है और पूरा विषय बताया है।