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अलीगढ़ : एएमयू की स्थापना के लिए नजीर बना था बीएचयू का एक्ट
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह में 22 दिसंबर को मुख्य अतिथि के रूप में आनलाइन संबोधन में शामिल हो रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक्ट में भी बेहद समानताएं हैं। जानकार कहते हैं कि यह भी कहा जा सकता है कि 1920 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक्ट को ही नजीर मानकर एमएओ कालेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया था।
एएमयू मामलों के जानकार और विश्वविद्यालय की उर्दू एकेडमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को 1915 में विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया। उससे पहले अलीगढ़ आंदोलन बहुत जोर पकड़ रहा था। इस आंदोलन की सबसे बड़ी बात यह थी कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग यह चाहता था कि देश में जितनी भी मुस्लिम शैक्षिक संस्थाएं हैं और भविष्य में हों, उनका नियंत्रण और वैद्यता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से संबद्ध हो।
तत्कालीन अंग्रेजी सरकार इस मांग को लेकर हिचकिचाहट में थी। कई दौर की वार्ता के बाद यह निष्कर्ष निकला कि जिस एक्ट के माध्यम से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को संचालित किया जा रहा है। करीब करीब उसी एक्ट के आधार पर एमएओ कालेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया जाए। बाद में इसी बात पर सहमति बन गई। विश्वविद्यालय को शासित करने के कुछ प्रावधान जरूर भिन्न रहे। जैसे बीएचयू का विजिटर यूपी का लेफ्टिनेंट गर्वनर होगा। जबकि एएमयू का विजिटर गवर्नर जनरल होगा। इसी तरह के कुछ अन्य प्रावधान थे, लेकिन ढांचागत आधार दोनों एक्ट का एक ही रहा।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह में 22 दिसंबर को मुख्य अतिथि के रूप में आनलाइन संबोधन में शामिल हो रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक्ट में भी बेहद समानताएं हैं। जानकार कहते हैं कि यह भी कहा जा सकता है कि 1920 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक्ट को ही नजीर मानकर एमएओ कालेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया था।
एएमयू मामलों के जानकार और विश्वविद्यालय की उर्दू एकेडमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को 1915 में विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया। उससे पहले अलीगढ़ आंदोलन बहुत जोर पकड़ रहा था। इस आंदोलन की सबसे बड़ी बात यह थी कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग यह चाहता था कि देश में जितनी भी मुस्लिम शैक्षिक संस्थाएं हैं और भविष्य में हों, उनका नियंत्रण और वैद्यता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से संबद्ध हो।
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तत्कालीन अंग्रेजी सरकार इस मांग को लेकर हिचकिचाहट में थी। कई दौर की वार्ता के बाद यह निष्कर्ष निकला कि जिस एक्ट के माध्यम से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को संचालित किया जा रहा है। करीब करीब उसी एक्ट के आधार पर एमएओ कालेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया जाए। बाद में इसी बात पर सहमति बन गई। विश्वविद्यालय को शासित करने के कुछ प्रावधान जरूर भिन्न रहे। जैसे बीएचयू का विजिटर यूपी का लेफ्टिनेंट गर्वनर होगा। जबकि एएमयू का विजिटर गवर्नर जनरल होगा। इसी तरह के कुछ अन्य प्रावधान थे, लेकिन ढांचागत आधार दोनों एक्ट का एक ही रहा।
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