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अलीगढ़ : वर्ष 2012 में सपा सरकार बनने से पहले अखिलेश ने की थी साइकिल यात्रा
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अलीगढ़ : टप्पल इंटरचेंज में आयोजित आयोजित किसान महापंचायत में किसानों के साथ हाथ उठाकर अभिवादन क?
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
अलीगढ़। किसान महापंचायत में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को साफा बांधकर तलवार, गदा, हल, साइकिल और बैलगाड़ी भेंट की, ये उपहार आकार में जरूर छोटे थे, लेकिन भावनाएं पूरी थीं। पूर्व सीएम ने भी मुस्काराते हुए सभी से उपहार लिए और उनको शुभकामनाएं दीं। वर्ष 2022 में सपा सरकार बनवाने में योगदान करने के लिए कहा। करीब 40 मिनट के संबोधन में उन्होंने राजनीति के ‘एक्सप्रेस वे’ पर सबको दौड़ाया। तीन नये कृषि कानूनों से शुरूआत करते हुए उन्होंने अतीत से वर्तमान को बखूबी जोड़ा। हजारों किसानों की भीड़ देख कर अखिलेश उत्साह से भर चुके थे।
पूर्व सीएम के आने का समय दोपहर 2 बजे का था, लेकिन वह 3:15 बजे पहुंचे। उनका संबोधन 4:07 बजे शुरू हुआ और 4:47 बजे संपन्न हुआ। 40 मिनट में उन्होंने तीन कृषि कानूनों से अपनी बात शुरू करते हुए वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव से पूर्व यमुना एक्सप्रेस वे की एतिहासिक साइकिल यात्रा तक की याद करा दी। बोले.. उस वक्त भी प्रदेश में एक बहुत ज्यादा सख्त सरकार थी, लेकिन सबने एकजुटता दिखाई तो तख्ता पलट हो गया। बोले ये, वही टप्पल और यमुना एक्सप्रेस वे है, जहां से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का आंदोलन हुआ था और केंद्र की यूपीए सरकार ने बाद में संशोधन किया। उस वक्त भी यहां से किसानों ने आंदोलन छेड़ा था। अब पंजाब और हरियाणा के किसानों ने आंदोलन छेड़ कर पूरे देश को जगाया है।
बोले... सपा सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनवाया, जो रिकार्ड 22 महीने में बना। इस एक्सप्रेस वे के लिए जमीनों का अधिग्रहण करने के वास्ते उन्होंने पहले उन स्थानों का सर्किल रेट बढ़वाया और उसके बाद चार गुना मुआवजा दिया। तीन महीने में भूमि अधिग्रहण का काम हो गया था। इसी एक्सप्रेसवे पर सबसे वजनी जहाज हरक्यूलिस, सुखोई, मिराज को उतारा गया, गुणवत्ता बेहतर होने से कोई शिकायत नहीं मिली। कहा, किसानों का साथ होगा तो नये कानूनों को रद्द कराने तक संघर्ष जारी रहेगा।
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उन्होंने तकनीकी और विकास को जोड़ा। कहा कि उनकी सरकार ने लैपटॉप बांटे। आज भी कई घरों में उनका इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन सीएम योगी खुद लैपटॉप चलाना नहीं जानते हैं। इसलिए उन्होंने इस योजना को बंद कर दिया। उन्होंने सपा की पहचान बनी लाल टोपी पर हुई टिप्पणी पर कटाक्ष किया और कहा कि अगर सीएम योगी भी लाल टोली लगाते तो सुंदर दिखते। ये लाल रंग भावनाओं का प्रतीक है। इसलिए हम इसकी कद्र करते हैं। पूर्व सीएम ने ये भी कहा कि सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। इसके बाद भी जनता त्रस्त है। उनके संबोधन में किसान मंत्रमुग्ध से रहे। इसके बाद मंच से उतर कर अखिलेश पार्टी की विशेष बस में सवार हुए, जिसकी लिफ्ट ने उन्हें ऊपर की छत पर पहुंचा दिया।
अखिलेश ने वहीं से लोगों से अभिवादन करते हुए विदाई ली। इस दौरान कारों का काफिला बहुत लंबा होने से अलीगढ़ पलवल हाईवे और यमुना एक्सप्रेस वे के दोनों ओर जाम लग गया। बहरहाल, ऐसा ही जाम वर्ष 2012 की साइकिल यात्रा में लगा था, जब अखिलेश ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का बिगुल बजाया था। आज भी कमोबेश वही नजारा था। वही एक्सप्रेस वे और वही सत्ता परिवर्तन की बेहद मजबूत बात....।
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अलीगढ़। किसान महापंचायत में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को साफा बांधकर तलवार, गदा, हल, साइकिल और बैलगाड़ी भेंट की, ये उपहार आकार में जरूर छोटे थे, लेकिन भावनाएं पूरी थीं। पूर्व सीएम ने भी मुस्काराते हुए सभी से उपहार लिए और उनको शुभकामनाएं दीं। वर्ष 2022 में सपा सरकार बनवाने में योगदान करने के लिए कहा। करीब 40 मिनट के संबोधन में उन्होंने राजनीति के ‘एक्सप्रेस वे’ पर सबको दौड़ाया। तीन नये कृषि कानूनों से शुरूआत करते हुए उन्होंने अतीत से वर्तमान को बखूबी जोड़ा। हजारों किसानों की भीड़ देख कर अखिलेश उत्साह से भर चुके थे।
पूर्व सीएम के आने का समय दोपहर 2 बजे का था, लेकिन वह 3:15 बजे पहुंचे। उनका संबोधन 4:07 बजे शुरू हुआ और 4:47 बजे संपन्न हुआ। 40 मिनट में उन्होंने तीन कृषि कानूनों से अपनी बात शुरू करते हुए वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव से पूर्व यमुना एक्सप्रेस वे की एतिहासिक साइकिल यात्रा तक की याद करा दी। बोले.. उस वक्त भी प्रदेश में एक बहुत ज्यादा सख्त सरकार थी, लेकिन सबने एकजुटता दिखाई तो तख्ता पलट हो गया। बोले ये, वही टप्पल और यमुना एक्सप्रेस वे है, जहां से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का आंदोलन हुआ था और केंद्र की यूपीए सरकार ने बाद में संशोधन किया। उस वक्त भी यहां से किसानों ने आंदोलन छेड़ा था। अब पंजाब और हरियाणा के किसानों ने आंदोलन छेड़ कर पूरे देश को जगाया है।
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बोले... सपा सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनवाया, जो रिकार्ड 22 महीने में बना। इस एक्सप्रेस वे के लिए जमीनों का अधिग्रहण करने के वास्ते उन्होंने पहले उन स्थानों का सर्किल रेट बढ़वाया और उसके बाद चार गुना मुआवजा दिया। तीन महीने में भूमि अधिग्रहण का काम हो गया था। इसी एक्सप्रेसवे पर सबसे वजनी जहाज हरक्यूलिस, सुखोई, मिराज को उतारा गया, गुणवत्ता बेहतर होने से कोई शिकायत नहीं मिली। कहा, किसानों का साथ होगा तो नये कानूनों को रद्द कराने तक संघर्ष जारी रहेगा।
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उन्होंने तकनीकी और विकास को जोड़ा। कहा कि उनकी सरकार ने लैपटॉप बांटे। आज भी कई घरों में उनका इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन सीएम योगी खुद लैपटॉप चलाना नहीं जानते हैं। इसलिए उन्होंने इस योजना को बंद कर दिया। उन्होंने सपा की पहचान बनी लाल टोपी पर हुई टिप्पणी पर कटाक्ष किया और कहा कि अगर सीएम योगी भी लाल टोली लगाते तो सुंदर दिखते। ये लाल रंग भावनाओं का प्रतीक है। इसलिए हम इसकी कद्र करते हैं। पूर्व सीएम ने ये भी कहा कि सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। इसके बाद भी जनता त्रस्त है। उनके संबोधन में किसान मंत्रमुग्ध से रहे। इसके बाद मंच से उतर कर अखिलेश पार्टी की विशेष बस में सवार हुए, जिसकी लिफ्ट ने उन्हें ऊपर की छत पर पहुंचा दिया।
अखिलेश ने वहीं से लोगों से अभिवादन करते हुए विदाई ली। इस दौरान कारों का काफिला बहुत लंबा होने से अलीगढ़ पलवल हाईवे और यमुना एक्सप्रेस वे के दोनों ओर जाम लग गया। बहरहाल, ऐसा ही जाम वर्ष 2012 की साइकिल यात्रा में लगा था, जब अखिलेश ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का बिगुल बजाया था। आज भी कमोबेश वही नजारा था। वही एक्सप्रेस वे और वही सत्ता परिवर्तन की बेहद मजबूत बात....।