फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Aligarh: Awareness and investigation break 'corona death'

अलीगढ़ : जागरूकता और जांच से लगा ‘कोरोना मृत्यु’ पर ब्रेक

Thu, 16 Jul 2020 02:27 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 02:27 AM IST
विज्ञापन
Aligarh: Awareness and investigation break 'corona death'
कोरोना वायरस। - फोटो : CITY OFFICE
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन

यह सही है कि जीवन और मृत्यु किसी के हाथ में नहीं। लेकिन यह भी सही है कि लापरवाही, अज्ञानता एवं उदासीनता से जाने वाले जानों को हम सतर्क एवं जागरूक होकर बचा सकते हैं। महामारी के मौजूदा दौर में जनपद में कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु दर में भारी गिरावट इसका जीता जागता प्रमाण है।
मई जून 2020 में अलीगढ़ जनपद में मृत्यु दर 12.60 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जो वर्तमान समय में घट कर 3.24 प्रतिशत पर आ गया है। एक महीने में मृत्यु दर में गिरावट किसी चमत्कार से कम नहीं है। ज्यादा दिन नहीं हुए जब एक के बाद एक मौत की खबर आने से जनपद के लोग सहम गए थे। कुछ परिवार से दो या उससे अधिक लोगों की मृत्यु की सूचना आई। देखते देखते शहर के आसमान में तारे की तरह चमकने वाले कई लोग वक्त से पहले दुनिया को अलविदा कर चले गए। अंतिम संस्कार का दृश्य देखकर कलेजा कांप उठता था। इटली एवं दूसरे देशों के डरावने दृश्य आंखों में तैरने लगे थे। कोरोना जांच की रिपोर्ट के इंतजार में शव दो-तीन दिन तक मोर्चरी पर पड़े रहे।
विज्ञापन

अंतिम संस्कार करने के लिए परिजनों को कई कई दिनों तक शव का इंतजार करना पड़ा। अलीगढ़ की अधिक मृत्यु दर की चर्चा लखनऊ में होने लगी थी। शासन के निर्देश पर डेथ ऑडिट भी हुआ। जिले के नोडल अधिकारी अनुराग यादव कई दिनों तक स्वयं अलीगढ़ में रहे। जेएन मेडिकल कॉलेज गए और मृत्यु दर के बारे में चिकित्सकों से जानकारी ली। शुक्र है कि डरावने दृश्य के बीच नई नई जानकारी मिलने से लोगों में जागरूकता आई।
विज्ञापन
विज्ञापन

जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. एसए सिद्दीकी कहते हैं कि जागरूकता का असर यह हुआ कि लोग स्थिति खराब होने से पहले चिकित्सालय में पहुंचने लगे। दिक्कत होने पर स्वयं लोग आगे आए और अपनी जांच कराई। मृत्यु दर की गिरावट में सबसे बड़ा फैक्टर जागरूकता ही है। जेएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभाग के प्रो. एम शमीम कहते हैं कि मृत्यु दर की गिरावट में जागरूकता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कुछ नई दवाएं भी शुरू की गई है। समय बीतने के साथ चिकित्सकों के अनुभव भी काम आ रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने भी चुनौतीपूर्ण हालात से निकलने के लिए जनता की जागरूकता को सबसे महत्वपूर्ण कारण मानते हैं।

वह कहते हैं कि समय से बीमारी का पता चल जाए तो खतरनाक स्थिति में पहुंचने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा कोरोना जांच एवं सर्वे का भी असर मृत्यु दर को बढ़ने से रोकने में मददगार साबित हुआ। संक्रमित मरीजों की संख्या तो जरूर बढ़ गई लेकिन मरीज को गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले ही चिह्नित कर उपचार शुरू कर दिया गया। वह कहते हैं कि किसी को किसी भी तरह की दिक्कत हो तो न छुपाए और न डरें। सीधे चिकित्सक से संपर्क करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed