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अलीगढ़ : पीएसी भर्ती बोर्ड मामले में एडी हेल्थ ने सीएमओ से मांगा स्पष्टीकरण
Fri, 20 Aug 2021 02:27 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला, अलीगढ़।
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Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Aug 2021 02:27 AM IST
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पीएसी भर्ती मेडिकल बोर्ड में सेवानिवृत्त ऑर्थो सर्जन डॉ. एसके वार्ष्णेय को रखने पर एडी हेल्थ ने सीएमओ से स्पष्टीकरण मांग लिया है। पीएसी में चयनित अभ्यर्थियों का चिकित्सीय परीक्षण बृृहस्पतिवार से शुरू हो गया है। मेडिकल बोर्ड में पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के पुनर्नियोजन पर तैनात ऑर्थो सर्जन डॉ. एसके वार्ष्णेय को शामिल किया गया है।
अलीगढ़ मंडल के अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एडी हेल्थ) डॉ. एसके उपाध्याय ने सीएमओ डॉ. आनंद कुमार उपाध्याय द्वारा गठित बोर्ड पर सवाल उठा दिया है। उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर गठित बोर्ड को संशोधित करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्टीकरण भी मांगा है।
एडी हेल्थ ने पत्र में लिखा है कि मेडिकल बोर्ड में पीएमएचएस सेवा में कार्यरत चिकित्सकों को ही सम्मिलित किया जा सकता है। यह एक चिकित्सा विधिक कार्य है। इसमें संविदा या सेवानिवृत्त चिकित्सकों की ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती है। पुनर्नियोजन की अवधि में संवर्गीय पदनाम नहीं दिया जाता है। केवल विशेषज्ञ के रूप में कंसलटेंट अथवा परामर्शी कहा जाता है। इस स्थिति में बोर्ड द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र विधिक रूप से अमान्य हो सकते हैं।
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एडी ने सीएमओ को लिखा कि आपके द्वारा उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल सिंह को सह नोडल एवं अन्य चिकित्सकों को विशेषज्ञ चिकित्सक चिकित्सकों के रूप में मेडिकल बोर्ड में नामित किया गया है। जबकि शासन से निर्देश हैं कि अभ्यर्थियों के चिकित्सा परीक्षण हेतु केवल तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों को ही नामित किया जाए।
एडी हेल्थ के पत्र के बाद मेडिकल बोर्ड को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। सीएमओ डॉ. आनंद कुमार उपाध्याय का कहना है कि शासन द्वारा सीएमओ को मेडिकल बोर्ड का गठन करने के लिए कहा गया है। एडी सीनियर है और हम उनका सम्मान करते हैं। वह ऐसा क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे है। इस संबंध में अभी ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।
जनपद में एक भी ऑर्थो सर्जन नहीं
सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड में पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में पुनर्नियोजन पर तैनात ऑर्थो सर्जन डॉ. एसके वार्ष्णेय, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय के नेत्र सर्जन डॉ. केपी सिंह, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय के ईएनटी सर्जन डॉ. नीरज गुप्ता को शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त सीएमओ ऑफिस के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। एक बड़ी समस्या यह भी है कि जनपद में स्वास्थ्य विभाग के पास वर्तमान समय में एक भी ऑर्थोसर्जन नहीं है। पुनर्नियोजन या संविदा से काम चलाया जा रहा है।
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अलीगढ़ मंडल के अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एडी हेल्थ) डॉ. एसके उपाध्याय ने सीएमओ डॉ. आनंद कुमार उपाध्याय द्वारा गठित बोर्ड पर सवाल उठा दिया है। उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर गठित बोर्ड को संशोधित करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्टीकरण भी मांगा है।
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एडी हेल्थ ने पत्र में लिखा है कि मेडिकल बोर्ड में पीएमएचएस सेवा में कार्यरत चिकित्सकों को ही सम्मिलित किया जा सकता है। यह एक चिकित्सा विधिक कार्य है। इसमें संविदा या सेवानिवृत्त चिकित्सकों की ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती है। पुनर्नियोजन की अवधि में संवर्गीय पदनाम नहीं दिया जाता है। केवल विशेषज्ञ के रूप में कंसलटेंट अथवा परामर्शी कहा जाता है। इस स्थिति में बोर्ड द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र विधिक रूप से अमान्य हो सकते हैं।
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एडी ने सीएमओ को लिखा कि आपके द्वारा उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल सिंह को सह नोडल एवं अन्य चिकित्सकों को विशेषज्ञ चिकित्सक चिकित्सकों के रूप में मेडिकल बोर्ड में नामित किया गया है। जबकि शासन से निर्देश हैं कि अभ्यर्थियों के चिकित्सा परीक्षण हेतु केवल तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों को ही नामित किया जाए।
एडी हेल्थ के पत्र के बाद मेडिकल बोर्ड को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। सीएमओ डॉ. आनंद कुमार उपाध्याय का कहना है कि शासन द्वारा सीएमओ को मेडिकल बोर्ड का गठन करने के लिए कहा गया है। एडी सीनियर है और हम उनका सम्मान करते हैं। वह ऐसा क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे है। इस संबंध में अभी ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।
जनपद में एक भी ऑर्थो सर्जन नहीं
सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड में पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में पुनर्नियोजन पर तैनात ऑर्थो सर्जन डॉ. एसके वार्ष्णेय, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय के नेत्र सर्जन डॉ. केपी सिंह, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय के ईएनटी सर्जन डॉ. नीरज गुप्ता को शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त सीएमओ ऑफिस के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। एक बड़ी समस्या यह भी है कि जनपद में स्वास्थ्य विभाग के पास वर्तमान समय में एक भी ऑर्थोसर्जन नहीं है। पुनर्नियोजन या संविदा से काम चलाया जा रहा है।