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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Aligarh 69 Child Marriage Complaints This Year, 47 Stopped

अलीगढ़: इस साल 69 बाल विवाह की शिकायतें, 47 रुकवाए, गरीबी-अशिक्षा और प्रेम संबंध बनी वजह

Sun, 11 Oct 2026 01:30 PM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 11 Oct 2026 01:30 PM IST
सार

अलीगढ़ जिले में इस साल अब तक बाल विवाह की 69 शिकायतें चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी हैं। इनमें 47 बाल विवाह रुकवाए गए, जबकि 22 शिकायतें जांच में कार्रवाई योग्य नहीं मिलीं।

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Aligarh 69 Child Marriage Complaints This Year, 47 Stopped
बाल विवाह - फोटो : एआई

विस्तार

पिता के परिवार छोड़ने के बाद मां पर दो बच्चों को पालने की जिम्मेदारी आ गई। बेटी दसवीं में पढ़ रही थी और उम्र महज 17 साल थी। भविष्य की चिंता और पारिवारिक परिस्थितियों के बीच मां ने उसकी शादी तय कर दी। सूचना मिलने पर टीम पहुंची और विवाह रुकवा दिया। इसके बाद बेटी की पढ़ाई जारी रखने के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू कराई गई।

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यह अकेला मामला नहीं है। अलीगढ़ जिले में इस साल अब तक बाल विवाह की 69 शिकायतें चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी हैं। इनमें 47 बाल विवाह रुकवाए गए, जबकि 22 शिकायतें जांच में कार्रवाई योग्य नहीं मिलीं। आंकड़े बताते हैं कि बाल विवाह रोकने के साथ उन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से निपटना भी जरूरी है, जो परिवारों को कम उम्र में बेटियों की शादी तय करने की ओर ले जाती हैं।
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वर्ष 2023-24 में जिले में बाल विवाह के सात मामले सामने आए थे। वर्ष 2024-25 में छह मामले मिले और सभी में विवाह रुकवा दिए गए। इसके बाद वर्ष 2025-26 में मामलों की संख्या बढ़कर 32 हो गई। इनमें 29 बाल विवाह रुकवाए गए, जबकि तीन शिकायतें जांच में निराधार मिलीं। महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से इन मामलों में कार्रवाई की गई।

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प्रशासन के स्तर पर बाल विवाह रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अलग अलग योजनाओं के जरिये बालिकाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सतर्कता के चलते ही ये आंकड़े सामने आ पाए हैं। - अजित चौधरी, जिला प्रोबेशन अधिकारी

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गोरई में भी गरीबी के चलते तय किया विवाह
गोरई क्षेत्र के एक गांव में पिता के न रहने पर मां ने छोटी बेटी का विवाह बड़ी बेटी के देवर से तय कर दिया था। सूचना मिलने पर टीम ने विवाह रुकवा दिया। मां ने गरीबी और बेटी के भविष्य की चिंता को इसकी वजह बताया। उनका कहना था कि वह भी बेटी को पढ़ाना चाहती थीं, लेकिन परिस्थितियों के कारण शादी तय की।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्र, दोनों जगह चुनौती
चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला प्रभारी गौरव चंदेल के मुताबिक, दादों में शिक्षा की कमी और गरीबी बाल विवाह की प्रमुख वजह हैं। खैर क्षेत्र में कम उम्र के प्रेम संबंधों से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं, जबकि जवां में भी गरीबी और अशिक्षा बड़ी समस्या है। शहरी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। शहर के बीमा नगर, सासनी गेट और आईटीआई रोड क्षेत्र में भी बाल विवाह रुकवाए गए हैं।

गांव-शहर में कारण अलग-अलग : एएमयू विशेषज्ञ
एएमयू के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम का कहना है कि हर साल बाल विवाह बढ़ने के लिए कोई एक कारण नहीं है। अगर ग्रामीण क्षेत्रों में जाएंगे तो वहां गरीबी, अशिक्षा और पारिवारिक मजबूरियां माता-पिता को कम उम्र में बेटियों की शादी करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। प्रेम संबंधों को लेकर आज भी परिवारों को घर से भाग जाने का डर रहता है। यह भी एक बड़ी वजह हो सकता है। अगर अलीगढ़ शहर क्षेत्र की स्थिति देखें तो यहां सोशल मीडिया का प्रभाव खूब देखने को मिल रहा है।

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