{"_id":"5c40db0abdec227362020b94","slug":"ali-s-insistence-sparks-kabaddi-s-noor","type":"story","status":"publish","title_hn":"अली की जिद से निखरेंगे कबड्डी के नूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अली की जिद से निखरेंगे कबड्डी के नूर
Fri, 18 Jan 2019 01:14 AM IST
राजेश सिंह
राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़
राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Fri, 18 Jan 2019 01:14 AM IST
विज्ञापन
नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते कोच अली मोहम्मद।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहा जाता है कि खिलाड़ी कभी भी मैदान से रिटायर्ड नहीं होता है। जब तक खिलाड़ी का शरीर चलायमान रहता है। तब तक वह खेल के मैदान से संन्यास नहीं लेता है। यह कहावत फिरदौस नगर निवासी मोहम्मद अली पर बखूबी जंचती है। कबड्डी के दम पर उन्होंने बिजली विभाग में नौकरी पाई। इसी के दम पर अपना व जिले का नाम रोशन करते हुए बिजली विभाग से रिटायर्ड भी हुए, लेकिन उन्होंने आज तक कबड्डी का मैदान नहीं छोड़ा है। उम्र के अंतिम पड़ाव पर उनका हौसला आज भी जवान है। हालांकि वह अब मैच नहीं खेलते हैं, लेकिन जिले के खिलाड़ियों को नौरंगीलाल जीआईसी में कबड्डी की तालीम दे रहे हैं।
मो. अली के कबड्डी के सफर को देखें तो उन्होंने 1975-76 में नेशनल सीनियर कबड्डी में उत्तर प्रदेश की तरफ से खेलना प्रारंभ किया। वह पांच साल लगातार खेले। इसके बाद नार्थ जोन ओपन चार बार खेले। नार्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी मैच में इनकी टीम विजेता भी रही थी। मेरठ विवि से आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में टीम ने तीसरा स्थान पाया था। इसके साथ ही अली बांग्लादेश की तरफ से 1978 में खेले थे। 1977 में उन्हें यूपी राज्य विद्युत परिषद की तरफ से नौकरी मिली और परिषद की टीम से 1986 तक खेलते रहे। 1987 में यह बतौर कोच और प्लेयर नियुक्त हुए। अगस्त 2017 में रिटायर्ड होने के बाद अली का मन घर में नहीं लगता था। उन्हें पता लगा कि कुछ बच्चे कबड्डी की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास जगह, रुपये और कोच नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य से वार्ता कर खेल के मैदान में बच्चों को तालीम देने के लिए कुछ घंटों के लिए छोटा सा मैदान मांगा। मैदान मिलने पर विगत आठ महीनों से आज यहां हाथरस के सासनी से लेकर जिले के कई ब्लाकों के खिलाड़ी प्रतिदिन दोपहर में तालीम लेते हैं। खिलाड़ियों ने बताया कि निशुल्क तालीम मिलने से वह और उनके घरवाले काफी खुश हैं। क्योंकि घरवाले उनकी खुराक तो पूरी कर सकते हैं, लेकिन अन्य खर्चे वहन नहीं कर सकते।
रुकावटों से घबराना नहीं हैंः इस नि:स्वार्थ भाव में अड़चनें आने पर नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार ने कहा कि विगत आठ महीनों से वह देख रहे हैं कि अली नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। इनके खिलाड़ी भी अनुशासन में रहते हैं। इससे वह काफी प्रभावित हैं। इसलिए भविष्य में अगर अली की तालीम में कोई रुकावट आती है तो वह उसे दूर करने के लिए हमेशा से तत्पर रहेंगे।
विज्ञापन
पेंशन के रुपयों से डलवाई है मिट्टी
खिलाड़ियों को कंकड़ न चुभ जाए, इसलिए अली ने कबड्डी के मैदान में दस हजार रुपयों में दो डंपर मिट्टी डलवाई है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना है। उनसे तालीम पाने वाले खिलाड़ी जब तक गोल्ड मेडल लेकर नहीं आएंगे। तब तक वह आराम नहीं करेंगे।
अलीगढ़ से पहले कबड्डी के एनआईएस हैं अली
मोहम्मद अली ने बताया कि उन्होंने सन 1985-86 में एनआईएस क्वालीफाई किया। उनके मुताबिक वह अलीगढ़ से इकलौते पहले एनआईएस हैं। इसके साथ ही वह स्नातक भी हैं। वह चाहते हैं कि उनकी सिखाए हुए बच्चे कबड्डी में देश का नाम रोशन करें।
विज्ञापन
मो. अली के कबड्डी के सफर को देखें तो उन्होंने 1975-76 में नेशनल सीनियर कबड्डी में उत्तर प्रदेश की तरफ से खेलना प्रारंभ किया। वह पांच साल लगातार खेले। इसके बाद नार्थ जोन ओपन चार बार खेले। नार्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी मैच में इनकी टीम विजेता भी रही थी। मेरठ विवि से आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में टीम ने तीसरा स्थान पाया था। इसके साथ ही अली बांग्लादेश की तरफ से 1978 में खेले थे। 1977 में उन्हें यूपी राज्य विद्युत परिषद की तरफ से नौकरी मिली और परिषद की टीम से 1986 तक खेलते रहे। 1987 में यह बतौर कोच और प्लेयर नियुक्त हुए। अगस्त 2017 में रिटायर्ड होने के बाद अली का मन घर में नहीं लगता था। उन्हें पता लगा कि कुछ बच्चे कबड्डी की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास जगह, रुपये और कोच नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य से वार्ता कर खेल के मैदान में बच्चों को तालीम देने के लिए कुछ घंटों के लिए छोटा सा मैदान मांगा। मैदान मिलने पर विगत आठ महीनों से आज यहां हाथरस के सासनी से लेकर जिले के कई ब्लाकों के खिलाड़ी प्रतिदिन दोपहर में तालीम लेते हैं। खिलाड़ियों ने बताया कि निशुल्क तालीम मिलने से वह और उनके घरवाले काफी खुश हैं। क्योंकि घरवाले उनकी खुराक तो पूरी कर सकते हैं, लेकिन अन्य खर्चे वहन नहीं कर सकते।
विज्ञापन
रुकावटों से घबराना नहीं हैंः इस नि:स्वार्थ भाव में अड़चनें आने पर नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार ने कहा कि विगत आठ महीनों से वह देख रहे हैं कि अली नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। इनके खिलाड़ी भी अनुशासन में रहते हैं। इससे वह काफी प्रभावित हैं। इसलिए भविष्य में अगर अली की तालीम में कोई रुकावट आती है तो वह उसे दूर करने के लिए हमेशा से तत्पर रहेंगे।
विज्ञापन
पेंशन के रुपयों से डलवाई है मिट्टी
खिलाड़ियों को कंकड़ न चुभ जाए, इसलिए अली ने कबड्डी के मैदान में दस हजार रुपयों में दो डंपर मिट्टी डलवाई है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना है। उनसे तालीम पाने वाले खिलाड़ी जब तक गोल्ड मेडल लेकर नहीं आएंगे। तब तक वह आराम नहीं करेंगे।
अलीगढ़ से पहले कबड्डी के एनआईएस हैं अली
मोहम्मद अली ने बताया कि उन्होंने सन 1985-86 में एनआईएस क्वालीफाई किया। उनके मुताबिक वह अलीगढ़ से इकलौते पहले एनआईएस हैं। इसके साथ ही वह स्नातक भी हैं। वह चाहते हैं कि उनकी सिखाए हुए बच्चे कबड्डी में देश का नाम रोशन करें।