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प्रदूषणः शहर में धूल का गुबार, धुंध की मार
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रामघाट रोड पर हवा में फैली धूल व प्रदूषण के बीच होकर गुजरते वाहन।
- फोटो : CITY OFFICE
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एनसीआर में जहरीली हो रही हवा और उस पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद भी एनसीआर से ही लगे अलीगढ़ में धूल के गुबार को खत्म करने के लिए किए जा रहे प्रयास शून्य हैं। सड़क की पटरियों पर पसरी धूल, बिल्डिंग मैटेरियल, आटो मोबाइल का धुआं, कूड़ा जलाने से उठ रहा धुआं और चल रहे निर्माण कार्य आदि से यहां का पर्यावरण भी सांस लेने के लिए अनुकूल नहीं रहा।
इस हालत पर पर्यावरणविद् गहरी चिंता जता रहे हैं। शहर के नुमाइश मैदान के चारों ओर स्थिति यह है कि यहां पर चारों और धूल ही धूल नजर आती है। जबकि यहां पर एएमयू सिटी हाई स्कूल, लुईजा सोल्स स्कूल सहित तहसील कोल और थाना बन्ना देवी भी स्थित हैं। इसके अलावा प्रमुख चौराहों पर भी धूल और धुएं को कम करने के कोई इंतजाम होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। दिन में रामघाट रोड, जेल रोड ओवर ब्रिज, मीनाक्षी पुल, जीटी रोड, आगरा रोड सहित पूरे शहर पर धूल और धुएं की चादर तनी रही।
सांस में परेशानी, जिला अस्पताल में पहुंच रहे मरीज
अलीगढ़। मलखान सिंह जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि इन दिनों सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सांस लेन में परेशानी, नाक और गले में खराश, गले से कुछ मटमैला कफ निकलना, नाक से पानी आना जैसी तकलीफें लोगों को आ रही हैं। डॉ. रावल कहते हैं कि यह बहुत खतरनाक संकेत हैं। अगर अभी से कोई उपाय नहीं किया गया तो आने वाले समय में सांस लेने का मतलब बीमारी होगा।
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आंखों की तकलीफ भी बढ़ी
धूल और धुएं से सिर्फ सांस लेने में समस्या नहीं हो रही, बल्कि आंखों में जलन और आंखों में पानी आने की समस्या भी हो रही है। गांधी नेत्र चिकित्सालय के अधीक्षक मधुप लहरी कहते हैं कि चूंकि आंखों को बंद करके नहीं रखा जा सकता है तो वह जहरीले वातावरण के सीधे संपर्क में आती हैं। इन दिनों उनके यहां पर आंखों में जलन और धुंध के चलते होने वाली समस्याओं के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
क्या है उपाय
पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा कहते हैं कि जब पानी दूषित हुआ तो आरओ फिल्टर लगा लिया। जब हवा दूषित हुई तो एयर प्यूरीफायर लगवा लिया। यह समस्या का समाधान नहीं है। सभी जानते हैं कि हमें आक्सीजन चाहिए जो पेड़ पौधों से मिलती है। हम कार्बन डाईआक्साइड छोड़ते हैं जो पेड़ ग्रहण करते हैं। हम पेड़ों को पर्यावरण को ही नष्ट कर रहे हैं। हमें समस्या के मूल कारण को समाप्त करना है, समस्या को दबाना नहीं है।
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इस हालत पर पर्यावरणविद् गहरी चिंता जता रहे हैं। शहर के नुमाइश मैदान के चारों ओर स्थिति यह है कि यहां पर चारों और धूल ही धूल नजर आती है। जबकि यहां पर एएमयू सिटी हाई स्कूल, लुईजा सोल्स स्कूल सहित तहसील कोल और थाना बन्ना देवी भी स्थित हैं। इसके अलावा प्रमुख चौराहों पर भी धूल और धुएं को कम करने के कोई इंतजाम होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। दिन में रामघाट रोड, जेल रोड ओवर ब्रिज, मीनाक्षी पुल, जीटी रोड, आगरा रोड सहित पूरे शहर पर धूल और धुएं की चादर तनी रही।
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सांस में परेशानी, जिला अस्पताल में पहुंच रहे मरीज
अलीगढ़। मलखान सिंह जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि इन दिनों सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सांस लेन में परेशानी, नाक और गले में खराश, गले से कुछ मटमैला कफ निकलना, नाक से पानी आना जैसी तकलीफें लोगों को आ रही हैं। डॉ. रावल कहते हैं कि यह बहुत खतरनाक संकेत हैं। अगर अभी से कोई उपाय नहीं किया गया तो आने वाले समय में सांस लेने का मतलब बीमारी होगा।
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आंखों की तकलीफ भी बढ़ी
धूल और धुएं से सिर्फ सांस लेने में समस्या नहीं हो रही, बल्कि आंखों में जलन और आंखों में पानी आने की समस्या भी हो रही है। गांधी नेत्र चिकित्सालय के अधीक्षक मधुप लहरी कहते हैं कि चूंकि आंखों को बंद करके नहीं रखा जा सकता है तो वह जहरीले वातावरण के सीधे संपर्क में आती हैं। इन दिनों उनके यहां पर आंखों में जलन और धुंध के चलते होने वाली समस्याओं के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
क्या है उपाय
पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा कहते हैं कि जब पानी दूषित हुआ तो आरओ फिल्टर लगा लिया। जब हवा दूषित हुई तो एयर प्यूरीफायर लगवा लिया। यह समस्या का समाधान नहीं है। सभी जानते हैं कि हमें आक्सीजन चाहिए जो पेड़ पौधों से मिलती है। हम कार्बन डाईआक्साइड छोड़ते हैं जो पेड़ ग्रहण करते हैं। हम पेड़ों को पर्यावरण को ही नष्ट कर रहे हैं। हमें समस्या के मूल कारण को समाप्त करना है, समस्या को दबाना नहीं है।