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अलीगढ़ः शहर में धूल के गुबार कर रहे बीमार
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रामघाट रोड स्थित पीएसी पेट्रोल पंप के सामने रोड पर उड़ती धूल।
- फोटो : CITY OFFICE
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दीपावली के बाद से शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ चुका है। विभिन्न इलाकों और सड़कों पर धूल की वजह से सांस लेना मुश्किल हो गया है। जगह-जगह खुले में निर्माण कार्य, गंदगी के ढेर और सड़क किनारे पड़ी मिट्टी इस समस्या का बड़ा कारण है। ऐसे में जब वाहन यहां से गुजरते हैं तो सड़क पर धूल का गुबार छा जाता है। इससे लोगों की सांसें उखड़ने लगती हैं। जबकि लोगों में एलर्जी के मामले बढ़ने लगे हैं। आंखों में जलन और सांस संबंधी परेशानी बढ़ने लगी है।
शहर के सारसौल क्षेत्र स्थित जीटी रोड, नादा पुल, रामघाट रोड पर पीएसी, एटा चुंगी, गाजियाबाद बाईपास, सासनीगेट से मथुरा रोड और आगरा रोड पर हाईवे इंटरचेंज पर वाहनों की वजह से दिन भर धूल उड़ती रहती है। यही धूल जब क्षेत्र में फैल जाती है तो लोगों को इससे परेशानी होती है। अस्पतालों में सांस व एलर्जी के रोगी बढ़ने लगे हैं। आंखों में जलन, नाक में खुजली और गले में खराश जैसी समस्या आम होने लगी है। अलीगढ़ में वायु प्रदूषण सूचकांक 170 तक रहता है। चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह धूल के गुबार कई तरह की बीमारियों के कारक बनते हैं। इससे बचने के लिए पानी का समय-समय पर छिड़काव और नाले-नालियों से निकले वाली सिल्ट को तुरंत उठवाना होगा। तभी धूल से मुक्ति मिल सकती है।
धूल से माइग्रेन का भी खतरा
शहर में इन दिनों सड़कों पर सिल्ट डालने की समस्या कम हो गई है। लेकिन खत्म नहीं हुई। शहर के विभिन्न हिस्सों में उड़ने वाली धूल से काफी समस्या होती है। धूल के गुबार में सांस लेने से दमा, अस्थमा जैसे रोग बढ़ जाते हैं। ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। दौरे पड़ सकते हैं। कई बार तो धूल माइग्रेन का कारक भी बनती है। जबकि आंखों में जलन, नाक-कान में समस्या और त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। अगर नाले-नालियों से निकलने वाली सिल्ट की गंदगी को समय से हटा दिया जाए तो बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो जाएंगे। नाले अंडरग्राउंड होने चाहिए। जहां मिट्टी या धूल रहती है, वहां नगर निगम को नियमित पानी का छिड़काव करना होगा। तभी इस समस्या का निदान होगा। -डॉ. विभव वार्ष्णेय, चिकित्सक।
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- शहर में जगह-जगह उठने वाले धूल के गुबार निश्चित ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसकी रोकथाम के लिए नियमित पानी का छिड़काव करना होगा। अगर गंदगी, कूड़ा आदि सड़कों के किनारे पड़ा रहता है तो इसकी साफ सफाई पर भी ध्यान रखना होगा। - जेपी सिंह, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।
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शहर के सारसौल क्षेत्र स्थित जीटी रोड, नादा पुल, रामघाट रोड पर पीएसी, एटा चुंगी, गाजियाबाद बाईपास, सासनीगेट से मथुरा रोड और आगरा रोड पर हाईवे इंटरचेंज पर वाहनों की वजह से दिन भर धूल उड़ती रहती है। यही धूल जब क्षेत्र में फैल जाती है तो लोगों को इससे परेशानी होती है। अस्पतालों में सांस व एलर्जी के रोगी बढ़ने लगे हैं। आंखों में जलन, नाक में खुजली और गले में खराश जैसी समस्या आम होने लगी है। अलीगढ़ में वायु प्रदूषण सूचकांक 170 तक रहता है। चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह धूल के गुबार कई तरह की बीमारियों के कारक बनते हैं। इससे बचने के लिए पानी का समय-समय पर छिड़काव और नाले-नालियों से निकले वाली सिल्ट को तुरंत उठवाना होगा। तभी धूल से मुक्ति मिल सकती है।
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धूल से माइग्रेन का भी खतरा
शहर में इन दिनों सड़कों पर सिल्ट डालने की समस्या कम हो गई है। लेकिन खत्म नहीं हुई। शहर के विभिन्न हिस्सों में उड़ने वाली धूल से काफी समस्या होती है। धूल के गुबार में सांस लेने से दमा, अस्थमा जैसे रोग बढ़ जाते हैं। ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। दौरे पड़ सकते हैं। कई बार तो धूल माइग्रेन का कारक भी बनती है। जबकि आंखों में जलन, नाक-कान में समस्या और त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। अगर नाले-नालियों से निकलने वाली सिल्ट की गंदगी को समय से हटा दिया जाए तो बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो जाएंगे। नाले अंडरग्राउंड होने चाहिए। जहां मिट्टी या धूल रहती है, वहां नगर निगम को नियमित पानी का छिड़काव करना होगा। तभी इस समस्या का निदान होगा। -डॉ. विभव वार्ष्णेय, चिकित्सक।
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- शहर में जगह-जगह उठने वाले धूल के गुबार निश्चित ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसकी रोकथाम के लिए नियमित पानी का छिड़काव करना होगा। अगर गंदगी, कूड़ा आदि सड़कों के किनारे पड़ा रहता है तो इसकी साफ सफाई पर भी ध्यान रखना होगा। - जेपी सिंह, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड।