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नोटबंदी के बाद अब पैन कार्ड की मार

Fri, 17 Feb 2017 01:42 AM IST
आशीष निगम
आशीष निगम Updated Fri, 17 Feb 2017 01:42 AM IST
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 After the death of PAN card Notbandi
नोटबंदी के बाद अब पैन कार्ड की मार - फोटो : Amar Ujala
नये और पुराने बैंक खातों में पैन कार्ड नंबर लिंक अनिवार्य कर देने से हजारों लोग पैन कार्ड का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आलम ये है कि 10 जनवरी के आवेदनों पर एक महीने बाद भी पैन कार्ड नहीं मिले हैं, जबकि नोटबंदी से पहले केवल पंद्रह दिन में ही पैन कार्ड घर पहुंच जाता था। पैन कार्ड बनवाने वालों से निर्धारित शुल्क से तीन गुना अधिक वसूला जा रहा है। अलीगढ़ के लगभग 40,000 लोगों को पैन कार्ड का इंतजार है।
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उल्लेखनीय है कि 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी होने के बाद जनवरी के पहले सप्ताह में बैक खातों में पैन कार्ड नंबर अनिवार्य कर दिया गया था। एसबीआई के एक प्रबंधक की मानें तो ये नियम उन खातों पर लागू होगा जो 50 हजार रुपये से अधिक का लेनदेन करते हैं, या उन खातों में जरूरी है जिसमें नोटबंदी के बाद अचानक बड़ा लेनदेन हुआ है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा मलखान नगर के प्रबंधक ने कहा कि उनके यहां खोले गए डेढ़ हजार से अधिक नये खातों में पैनकार्ड लिंक नहीं होने से एटीएम नहीं मिल पा रहा है। जिससे ग्राहक परेशान हैं।  
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इधर, पैन कार्ड की मांग अचानक छह से सात गुना तक बढ़ने से इसके लिए 200 से 300 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि पैन कार्ड बनाने के लिए अधिकृत एजेंसी एनएसडीएल (नेशनल सिक्योरिटी डिपाजिटरी लिमिटेड) ने इसकी फीस केवल 107 रुपये तय कर रखी है, जिसमें फ्रेंचाइजी कंपनी का कमीशन भी शामिल है। अलीगढ़ में एनएसडीएल की ओर से अधिकृत रूप से केवल नौ जगहों पर पैन कार्ड बनाए जा रहे हैं। खास बात ये है कि नाबालिग लोगों के खातों के लिए पैनकार्ड बनवाने के लिए लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अधिकांश बैंक अब पैनकार्ड के बिना एटीएम कार्ड देने से भी कतरा रहे हैं।
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नये खाते खुलवाने वालों को एटीएम कार्ड इसलिए नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उनके खातों में पैन कार्ड लिंक नहीं हुआ है। ऐसे डेढ़ हजार से ज्यादा ग्राहकों को बेसब्री से पैनकार्ड का इंतजार है।
-एके शर्मा, मैनेजर बैंक ऑफ बड़ौदा।
पहले आम दिनों में ज्यादा से ज्यादा पैन कार्ड के 100 आवेदन होते थे, अब इनकी संख्या 600 के करीब है। इसलिए पैनकार्ड बनने और मिलने में अब वेटिंग चल रही है।

-उमेश गुप्ता, मैनेजर कार्वी।
सबसे बड़ी समस्या नाबालिगों के पैन कार्ड बनाने में हो रही है, जिसमें उनके अभिभावक का ब्योरा दिया जा रहा है। एनएसडीएल की वेबसाइट पर भी काम का बोझ है।
-योगेश शर्मा, कार्वी।
पैन कार्ड पुणे में छपते हैं, छपाई क्षमता से कई गुना अधिक आवेदन होने के कारण पैन कार्ड समय से नहीं मिल रहे। 10 जनवरी के आवेदनों पर अब तक पैन कार्ड नहीं मिला है।
-विजय कुमार, सीए। 
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