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Weather Balloon: अलीगढ़ के बाद अब देश के पांच बड़े शहरों से मौसम गुब्बारा छोड़ेगा इसरो, ये होंगे फायदे

Sat, 13 Jul 2024 03:31 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 13 Jul 2024 03:31 PM IST
सार

मौसम गुब्बारा की लॉन्चिंग अलीगढ़ में सफल रही। अब देश के पांच बड़े शहरों से भी गुब्बारा उड़ाया जाना है। जल्द ही शहरों के नाम तय कर लिए जाएंगे। इससे होने वाले जलवायु परिवर्तन से लेकर, तापमान, वायु दबाव, आर्द्रता से लेकर अन्य जानकारियों का संग्रह किया जा सकेगा।

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After Aligarh, ISRO release weather balloons from five big cities of the country
आसमान में मौसम गुब्बारा - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अलीगढ़ के बाद अब देश के पांच शहरों में मौसम गुब्बारा उड़ाएगा। इस गुब्बारे से 200 किलोमीटर की परिधि में मौसम का हाल पता चलेगा। मौसम में होने वाले परिवर्तन का अपडेट मिलेगा। 11 जुलाई को एएमयू की छत से भी गुब्बारा उड़ाया गया था।

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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सलाहकार व वैज्ञानिक डॉ. जगवीर सिंह ने कहा कि मौसम गुब्बारा की लॉन्चिंग अलीगढ़ में सफल रही। अब देश के पांच बड़े शहरों से भी गुब्बारा उड़ाया जाना है। जल्द ही शहरों के नाम तय कर लिए जाएंगे। इससे होने वाले जलवायु परिवर्तन से लेकर, तापमान, वायु दबाव, आर्द्रता से लेकर अन्य जानकारियों का संग्रह किया जा सकेगा। जिन शहरों में भी गुब्बारा उड़ाया जाएगा वहां बड़ी संस्थाओं से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का करार होगा। इस करार के बाद ही गुब्बारा उड़ाया जाएगा।
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जीपीएस ऐसे भेजेगा डेटा
परियोजना समन्वयक प्रो. अतीक अहमद ने बताया कि मौसम गुब्बारा में करीब छह मीटर की रस्सी बंधी होती है, जिसके अंतिम छोर पर रोडियोसोंड उपकरण लगा है। इसके दाहिनी ओर लगे जीपीएस से लोकेशन की जानकारी मिलेगी। बायीं ओर सेंसर लगा है, जो तापमान, आर्द्रता, दबाव, हवाओं की दिशा-गति की जानकारी एकत्र कर ट्रांसमीटर को देगा। ट्रांसमीटर भूगोल विभाग की छत पर लगे रिसीवर को डेटा भेजेगा, जो स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। आसमान में 35 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाकर गुब्बारा फट जाता है।

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ये होंगे फायदे

भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने बताया कि इस मौसम गुब्बारे का फायदा किसानों को होगा। मौसम पूर्वानुमान से प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

32 किमी की ऊंचाई पर था ऋणात्मक 80 डिग्री सेल्सियस तापमान
प्रो. अतीक अहमद ने बताया कि 11 जुलाई को मौसम गुब्बारा 32 किलोमीटर ऊपर जाकर फट गया था। उस वक्त रेडियोसोंड उपकरण में दर्ज किए गए आंकड़े के अनुसार, वहां का तापमान ऋणात्मक 80 डिग्री सेल्सियस था, जब वह नीचे आया, तब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस था। इसी तरह आर्द्रता 32 किलोमीटर पर 90 थी और जमीन पर 70 दर्ज की गई है।

एक गुब्बारे पर आता है 40 हजार का खर्च
प्रो. अतीक अहमद ने बताया कि एक मौसम गुब्बारा छोड़ने पर 40 हजार रुपये का खर्च आता है। एएमयू ने 30 गुब्बारे मंगाए हैं। पहला गुब्बारा छोड़ा जा चुका है। अब हर 15 दिन में गुब्बारा छोड़ा जाएगा। दूसरा गुब्बारा 26 जुलाई को छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जब गुब्बारा फटता है, तब रेडियोसोंड उपकरण नीचे आ जाता है। इस रेडियोसोंड पर मोबाइल नंबर और पता लिखा होता है। अगर किसी को मिल जाए तो वह संबंधित मोबाइल नंबर पर कॉल करके उपकरण दे सकता है। इससे काफी रुपये की बचत हो सकती है, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं होता है। उन्होंने कहा कि पहले शोधार्थी थ्योरी में जलवायु परिवर्तन की जानकारी पढ़ते थे, लेकिन अब उन्हें प्रैक्टिकल करके दिखाया गया है। रेडियोसोंड से मिले डेटा का विश्लेषण किया जाएगा।

अब लाइटनिंग उपकरण छोड़ा जाएगा, बिजली गिरने का होगा पूर्वानुमान
इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि जल्द ही लाइटनिंग (बिजली) उपकरण भी छोड़ा जाएगा। इससे बिजली गिरने का पूर्वानुमान हो जाएगा। मछुआरों को पहले आगाह कर दिया जाएगा। इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को बादल फटने और भूस्खलन के बारे में भी पहले से जानकारी मिल जाएगी।

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