{"_id":"6a1213b8b085ec40460b843a","slug":"after-26-years-the-department-remembered-the-rules-and-said-that-it-will-not-replace-transformers-in-private-colonies-aligarh-news-c-2-gur1004-980913-2026-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: 26 साल बाद विभाग को याद आया नियम, कहा-नहीं बदलेंगे निजी कॉलोनियों के ट्रांसफॉर्मर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: 26 साल बाद विभाग को याद आया नियम, कहा-नहीं बदलेंगे निजी कॉलोनियों के ट्रांसफॉर्मर
विज्ञापन
कावेरी एन्कलेव में रखे ट्रांसफॉर्मर। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वर्ण जयंती नगर की कॉलोनी कावेरी एनक्लेव में 25 दिन पहले ट्रांसफॉर्मर फुंक गया, विद्युत विभाग ने अस्थायी ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली चालू तो कर दी, लेकिन इसी बीच विभाग को अपना 26 साल पुराना नियम याद आ गया। विभाग ने निजी कॉलोनी का ट्रांसफॉर्मर बताकर मरम्मत से इन्कार कर दिया। इसके बाद शनिवार को बिजली काट दी गई। चार घंटे बाद मरम्मत की धनराशि जमा कराकर बिजली चालू गई।
घटनाक्रम के अनुसार करीब 25 दिन पहले कॉलोनी का ट्रांसफार्मर खराब हो गया था, तब विद्युत विभाग की टीम ने खराब ट्रांसफार्मर को बदलने या मरम्मत करने के बजाय उसी जगह पर एक ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगाकर आपूर्ति शुरू कर दी। इसके बाद विभाग ने खराब ट्रांसफार्मर की मरम्मत से साफ इन्कार कर दिया। विभाग ने सोसाइटी वासियों से कहा कि यह उनका निजी ट्रांसफार्मर है और उन्हें ही इसे ठीक कराना होगा। इस संबंध में सोसाइटी सचिव को एक नोटिस भी जेई की ओर से भेजा गया।
एक मई को भेजे गए इस नोटिस में अपने स्तर से ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत कराने के लिए कहा गया। कॉलोनी की स्थापना के बाद पहली बार सामने आए इस नियम से कॉलोनी के लोग हैरान रह गए। उन्होंने ट्रांसफार्मर की मरम्मत नहीं कराई। शनिवार सुबह सात बजे सोसाइटी की बिजली काट दी गई थी। इस पर निवासियों ने जब बिजलीघर पहुंचकर बात रखी तो करीब चार घंटे के संवाद के बाद कॉलोनीवासियों से ट्रांसफार्मर मरम्मत के रुपये लेने के बाद ही दोपहर 11 बजे आपूर्ति बहाल की गई।
विज्ञापन
कावेरी एनक्लेव हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों के अनुसार, पिछले 26 वर्षों से विद्युत विभाग ही ट्रांसफॉर्मर और बिजली की सभी समस्याओं का समाधान करता रहा है। सभी परिवार नियमित रूप से नगर निगम को गृह और जलकर का भुगतान करते हैं। उनके पास अपने व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन भी हैं। अचानक लागू किए गए इस नियम से निवासियों में रोष है। विभाग के तर्क पर लोगों का कहना है कि यदि यह ट्रांसफार्मर निजी था तो अब तक विभाग इसकी मरम्मत क्यों करता रहा।
अधिशासी अभियंता (शहरी) उमेश चंद्र का कहना है कि यह नोटिस उत्तर प्रदेश विद्युत संहिता के तहत दिया गया था। निजी कॉलोनियों के परिसर में अंदर लगे ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत या बदलने की जिम्मेदारी विभाग की नहीं है। ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत सोसाइटी को स्वयं करानी होगी। यह नियम नया नहीं है। काफी पुराना है। पूर्व में क्या हुआ ये तो नहीं कहा जा सकता। मगर अब इस नियम को लेकर सख्ती है और शहर की अन्य निजी कॉलोनियों में भी यही व्यवस्था लागू होगी।
-- अन्य कॉलोनियों पर भी सवाल
इस घटनाक्रम ने शहर की अन्य कॉलोनियों और सोसाइटीज में लगे ट्रांसफार्मरों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निवासियों का कहना है कि क्या यह नियम शहर की अन्य प्राइवेट कॉलोनियों पर भी लागू होगा। यदि ऐसा है, तो उन कॉलोनियों के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी। यह मुद्दा अब केवल कावेरी एनक्लेव तक सीमित नहीं रहा है।
-पहली बार यह समस्या आई है। हम लोग यहां दो दशक से रह रहे हैं, पहले कभी यह नियम नहीं बताया गया।-अजय सिंह एडवोकेट
-विद्युत विभाग का अगर ऐसा नियम था तो पहले हम लोगों को कभी जानकारी क्यों नहीं दी गई।-संजीव कुमार वार्ष्णेय
-ऐसे तो शहर की तमाम निजी कॉलोनियों में ट्रांसफॉर्मर रखे हैं तो क्या उन जगहों पर भी ये व्यवस्था लागू होगी।-दीक्षा सिंह
-यह पक्षपात पूर्ण बात सामने आई है। जब कॉलोनी में लाइन बिछाई गई और नगर निगम को हैंडओवर हो गई तो अब ये नियम क्यों लागू हुआ।-हरिओम शर्मा
विज्ञापन
घटनाक्रम के अनुसार करीब 25 दिन पहले कॉलोनी का ट्रांसफार्मर खराब हो गया था, तब विद्युत विभाग की टीम ने खराब ट्रांसफार्मर को बदलने या मरम्मत करने के बजाय उसी जगह पर एक ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगाकर आपूर्ति शुरू कर दी। इसके बाद विभाग ने खराब ट्रांसफार्मर की मरम्मत से साफ इन्कार कर दिया। विभाग ने सोसाइटी वासियों से कहा कि यह उनका निजी ट्रांसफार्मर है और उन्हें ही इसे ठीक कराना होगा। इस संबंध में सोसाइटी सचिव को एक नोटिस भी जेई की ओर से भेजा गया।
विज्ञापन
एक मई को भेजे गए इस नोटिस में अपने स्तर से ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत कराने के लिए कहा गया। कॉलोनी की स्थापना के बाद पहली बार सामने आए इस नियम से कॉलोनी के लोग हैरान रह गए। उन्होंने ट्रांसफार्मर की मरम्मत नहीं कराई। शनिवार सुबह सात बजे सोसाइटी की बिजली काट दी गई थी। इस पर निवासियों ने जब बिजलीघर पहुंचकर बात रखी तो करीब चार घंटे के संवाद के बाद कॉलोनीवासियों से ट्रांसफार्मर मरम्मत के रुपये लेने के बाद ही दोपहर 11 बजे आपूर्ति बहाल की गई।
विज्ञापन
कावेरी एनक्लेव हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों के अनुसार, पिछले 26 वर्षों से विद्युत विभाग ही ट्रांसफॉर्मर और बिजली की सभी समस्याओं का समाधान करता रहा है। सभी परिवार नियमित रूप से नगर निगम को गृह और जलकर का भुगतान करते हैं। उनके पास अपने व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन भी हैं। अचानक लागू किए गए इस नियम से निवासियों में रोष है। विभाग के तर्क पर लोगों का कहना है कि यदि यह ट्रांसफार्मर निजी था तो अब तक विभाग इसकी मरम्मत क्यों करता रहा।
अधिशासी अभियंता (शहरी) उमेश चंद्र का कहना है कि यह नोटिस उत्तर प्रदेश विद्युत संहिता के तहत दिया गया था। निजी कॉलोनियों के परिसर में अंदर लगे ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत या बदलने की जिम्मेदारी विभाग की नहीं है। ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत सोसाइटी को स्वयं करानी होगी। यह नियम नया नहीं है। काफी पुराना है। पूर्व में क्या हुआ ये तो नहीं कहा जा सकता। मगर अब इस नियम को लेकर सख्ती है और शहर की अन्य निजी कॉलोनियों में भी यही व्यवस्था लागू होगी।
इस घटनाक्रम ने शहर की अन्य कॉलोनियों और सोसाइटीज में लगे ट्रांसफार्मरों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निवासियों का कहना है कि क्या यह नियम शहर की अन्य प्राइवेट कॉलोनियों पर भी लागू होगा। यदि ऐसा है, तो उन कॉलोनियों के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी। यह मुद्दा अब केवल कावेरी एनक्लेव तक सीमित नहीं रहा है।
-पहली बार यह समस्या आई है। हम लोग यहां दो दशक से रह रहे हैं, पहले कभी यह नियम नहीं बताया गया।-अजय सिंह एडवोकेट
-विद्युत विभाग का अगर ऐसा नियम था तो पहले हम लोगों को कभी जानकारी क्यों नहीं दी गई।-संजीव कुमार वार्ष्णेय
-ऐसे तो शहर की तमाम निजी कॉलोनियों में ट्रांसफॉर्मर रखे हैं तो क्या उन जगहों पर भी ये व्यवस्था लागू होगी।-दीक्षा सिंह
-यह पक्षपात पूर्ण बात सामने आई है। जब कॉलोनी में लाइन बिछाई गई और नगर निगम को हैंडओवर हो गई तो अब ये नियम क्यों लागू हुआ।-हरिओम शर्मा