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एईएस मरीजों को एंबुलेंस में मिलेगी प्राथमिक चिकित्सा
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जापानी इंसेफलाइटिस या एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के मरीजों को एंबुलेंस में प्राथमिक चिकित्सा मिलेगी। मरीजों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एंबुलेंस चालकों एवं इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन को प्रशिक्षित किया गया है।
मोहनलाल गौतम महिला चिकित्सालय में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
जिला प्रोग्राम मैनेजर अरशद खान ने बताया कि प्रशिक्षण में इस बात की जानकारी दी गई कि अस्पताल लाने तक मरीज की देखभाल कैसे की जानी चाहिए। एंबुलेंस में रखे उपकरणों की समय-समय पर किस प्रकार से जांच की जाए एवं आकस्मिक परिस्थितियों में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन किस तरीके से मरीज का पल्स चेक करेंगे। जरूरत पड़ने पर दी जाने वाली दवाइयों की भी जानकारी दी गई। पार्थ संस्था की ओर से लखनऊ से आएं ट्रेनर डॉ. कमल जोशी ने जेई/एईएस के मरीजों की पहचान व प्राथमिक उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बार-बार तेज बुखार, बुखार के साथ झटका आना आदि जेई/एईएस के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराकर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की जानी चाहिए।
प्राथमिक चिकित्सा
एंबुलेंस में दवा, ऑक्सीजन तथा जरूरी उपकरण के मौजूद रहने से प्राथमिक चिकित्सा एबुंलेंस में ही हो जाएगी। मरीज का तापमान, शुगर का लेवल जैसी जांच संभव हो सकेगी। जरूरत पड़ने पर सॉल्युशन या ग्लूकोज भी चढ़ाया जा सकेगा। वहीं ऑक्सीजन भी लगाई जा सकेगी।
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मोहनलाल गौतम महिला चिकित्सालय में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
जिला प्रोग्राम मैनेजर अरशद खान ने बताया कि प्रशिक्षण में इस बात की जानकारी दी गई कि अस्पताल लाने तक मरीज की देखभाल कैसे की जानी चाहिए। एंबुलेंस में रखे उपकरणों की समय-समय पर किस प्रकार से जांच की जाए एवं आकस्मिक परिस्थितियों में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन किस तरीके से मरीज का पल्स चेक करेंगे। जरूरत पड़ने पर दी जाने वाली दवाइयों की भी जानकारी दी गई। पार्थ संस्था की ओर से लखनऊ से आएं ट्रेनर डॉ. कमल जोशी ने जेई/एईएस के मरीजों की पहचान व प्राथमिक उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बार-बार तेज बुखार, बुखार के साथ झटका आना आदि जेई/एईएस के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराकर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की जानी चाहिए।
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प्राथमिक चिकित्सा
एंबुलेंस में दवा, ऑक्सीजन तथा जरूरी उपकरण के मौजूद रहने से प्राथमिक चिकित्सा एबुंलेंस में ही हो जाएगी। मरीज का तापमान, शुगर का लेवल जैसी जांच संभव हो सकेगी। जरूरत पड़ने पर सॉल्युशन या ग्लूकोज भी चढ़ाया जा सकेगा। वहीं ऑक्सीजन भी लगाई जा सकेगी।
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