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हाथरस कांडः हाईकोर्ट में पक्ष रखने के लिए तथ्य जुटाने में लगा प्रशासन, सोमवार को पेशी

Sat, 10 Oct 2020 01:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 10 Oct 2020 01:51 AM IST
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Administration engaged in gathering facts to present in High Court
Hathras Rape Protest - फोटो : PTI

स्थानीय प्रशासनिक अमला हाईकोर्ट में बिटिया प्रकरण में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए तैयारी में जुटा है और सभी तथ्य और दस्तावेज एकत्रित कर रहा है। उच्चाधिकारियों के अलावा डीएम और एसपी को 12 अक्तूबर को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तलब किया है। पीड़ित परिवार भी सुरक्षा के बीच वहां जाएगा।

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उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाथरस की घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी कानून व्यवस्था के अलावा डीएम और एसपी को तलब किया है। इसमें 12 अक्तूबर को सुनवाई होनी है। पीड़ित परिवार को भी वहां बुलाया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रभारी जिला जज ने पीड़ित परिवार के निवास पर जाकर इस बारे में परिवार को अवगत कराया था। 
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पीड़ित परिवार तो वहां सुरक्षा के बीच जाएगा ही, साथ ही यहां से डीएम, एसपी भी वहां जाएंगे। ऐसे में अपना पक्ष कोर्ट से समक्ष मजबूती से रखने के लिए यहां का प्रशासनिक व पुलिस अमला सारे तथ्य एकत्रित कर रहा है। सारे दस्तावेज, ऑडियो, वीडियो एकत्रित किए जा रहे हैं। कई और दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की कोशिश है कि वह अपना पक्ष वहां मजबूती से रखें। 
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प्रशासन यह भी दावा कर चुका है कि बिटिया के परिजनों की सहमति से ही रात्रि में शव का अंतिम संस्कार किया गया था। कुछ वीडियो भी प्रशासन ने जारी किए थे। अधिकारियों ने सहमति पत्र का भी दावा किया था। अब सारे तथ्य संकलित किए जा रहे हैं। 

हाईकोर्ट ने 12 अक्तूबर को हमें बुलाया है। हम वहां प्रस्तुत होंगे। वहीं इस परिवार को भी सुरक्षा के बीच ही ले जाया जाएगा और सुरक्षित छोड़ा जाएगा।  
-विनीत जायसवाल, एसपी

हाईकोर्ट से सुरक्षित वापस भी घर तक पहुंचाए हमें पुलिस प्रशासन
बिटिया के परिवार वालों को हाईकोर्ट ने 12 अक्तूबर को लखनऊ बुलाया है। बिटिया के परिवार वालों का कहना है कि उन्हें न्यायिक अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी थी। साथ ही बिटिया के परिजनों का यह भी कहना है कि जिस सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस उन्हें हाईकोर्ट लेकर जाए, उसी सुरक्षा के तहत पुलिस उन्हें वापस घर तक छोड़कर भी जाए।

बिटिया के परिजन जेल से भेजी गईचिट्ठी के बारे में पूछे गए सवाल पर आक्रोशित हो गए। उनका कहना था कि यह सब केस को मोड़ने की साजिश है। दोस्ती बराबर वालों में होती है। ऊंची और नीच बिरादरी वालों में नहीं होती। वह न्याय के लिए लड़ रहे हैं और अपनी इस लड़ाई को जारी रखेंगे। 
 

घायल अवस्था में बिटिया के साथ कोई पुलिसकर्मी नहीं गया था अलीगढ़

बिटिया के मामले में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही लगातार उजागर हो रही है। अब पता चला है कि पुलिस बिटिया को घायल अवस्था में ही जिला अस्पताल छोड़ आई थी और उसके साथ अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज नहीं गई थी। 
 14 सितंबर को धारा 307 व एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में बिटिया को घायल अवस्था में जब उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया तो उसके साथ एक महिला कांस्टेबल थी। जिला अस्पताल में उसे 35 मिनट रोका गया। वहां से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया।

तब कोई भी पुलिसकर्मी बिटिया के साथ नहीं थी। बिटिया को उसके परिजन ही एंबुलेंस में लेकर चले गए। रेफर स्लिप पर भी किसी पुलिसकर्मी के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसका खुलासा एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में भी हुआ है। इसमें खुद यह महिला पुलिसकर्मी का कहना है कि परिजनों ने खुद ही यह कह दिया था कि वह खुद ही उसे मेडिकल कॉलेज ले जाएंगे। इस महिला पुलिसकर्मी का कहना है कि वह अपने साहब यानि तत्कालीन कोतवाली निरीक्षक चंदपा को यह बात बताकर वापस लौट आई थी।

बिटिया, आरोपी पक्ष के घर पहुंचे सामाजिक संगठनों के लोग
 बिटिया के गांव में कुछ सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शुक्रवार को भी पहुंचे। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर, संदीप पांडेय ने बिटिया के घर पहुंचकर परिजनों से दुख दर्द पूछा। पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। परिवार वालों ने इन्हें विस्तार से पूरी दास्तां बताई और अधिकारियों की कारगुजारी भी बताई।

इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। वहीं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी गांव पहुंचे। राजा राजेंद्र सिंह की अगुवाई में इन लोगों ने आरोपी पक्ष के परिवार वालों से मुलाकात की और कहा कि इस मामले में दोषी बचने नहीं पाए और निर्दोष को सजा नहीं हो। इस तरह की घटना में मुआवजे का प्रचलन बंद होना चाहिए।

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