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Adhik Maas 2023: 18 जुलाई से है अधिकमास, तीन वर्ष बाद आता है, यह काम करने का मिलता है 10 गुना फल
Tue, 11 Jul 2023 01:33 AM IST
चमन शर्मा
रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Tue, 11 Jul 2023 01:33 AM IST
सार
अधिकमास का विशेष महत्व है। वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्र की गणना पर आधारित है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घड़ी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है।
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मलमास
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सूर्य और चंद्र वर्ष में 11 दिनों का अंतर होने से हर तीन वर्ष में पुरुषोत्तम मास होता है। जिसे अधिकमास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस मास में पूजा पाठ का 10 गुना अधिक फल मिलता है। इस साल यह 18 जुलाई से 16 अगस्त तक होगा।
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श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि अधिकमास का विशेष महत्व है। वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्र की गणना पर आधारित है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घड़ी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है।
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प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग एक मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है। जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का कहा जाता है।
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इसलिए इस माह में पूजा, पाठ, व्रत, उपवास, जप आदि धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, लेकिन हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह, गृह प्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदारी नहीं होती है।