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एडीए ब्याज समेत लौटाएगी रकम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Thu, 01 Feb 2018 01:55 AM IST
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अलीगढ़ विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित डुप्लेक्स की रकम लेने के बावजूद मकान पर कब्जा न दिलाने और न रकम वापस करने पर स्थायी लोक अदालत ने फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत एडीए को आदेश दिया है कि वह जमा की हुई धनराशि पर नौ फीसदी ब्याज की दर से याची को भुगतान करें।
बैंक कॉलोनी सुरेंद्र नगर निवासी नेहा मित्तल ने विज्ञापन के आधार पर स्वर्ण जयंती नगर विस्तार योजना के अंतर्गत डुप्लेक्स भवन के लिए आवेदन किया था। इसका आवंटन लाटरी द्वारा होना था। लाटरी में नाम आने पर 11 जुलाई 2013 को यह डुप्लेक्स नेहा मित्तल के नाम आवंटित कर दिया गया। उस समय इस भवन की कीमत 51,10,00 रुपये थी। पहली किस्त 5,11, 000 रुपये विकास प्राधिकरण को जमा कर दिए ।
भवन की पूरी कीमत अदा करने के लिए नेहा मित्तल ने स्टेट बैंक से 37,63,515 रुपये ऋ ़ण लिया। 17 जुलाई 2013 से 16 जनवरी 2014 के बीच नेहा ने भवन के पूरे पैसे जमा कर दिए। भवन के पैसे जमा करने के बाद जब प्रार्थी ने फ्र ी होल्ड रजिस्ट्री की बात कही तो संपत्ति अधिकारी ने लिखित पत्रांक के जरिए सूचित किया कि फ्रीहोल्ड रजिस्ट्री के पैसे जमा करा दिए जाएं तो यह रुपये भी जमा कर दिए।
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शिकायत के मुताबिक रजिस्ट्री के पैसे जमा करने के बाद भी जब मकान पर जब कब्जा नहीं मिला तब उसने प्राधिकरण के चक्कर लगाए, परंतु कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। कुछ समय बाद बताया कि आवंटित भवन की भूमि पर उच्च न्यायालय में वाद लंबित है। इसलिए आपको आवंटित भवन की रजिस्ट्री किया जाना संभव नहीं है। इस पर उसने पैसे वापस करने की मांग की। कुछ समय बाद नेहा के खाते में जमा की गई धनराशि 53,41,335 की जगह उसके खाते में 52,93,310 आए। इसमें से 48,004 रुपये टीडीएस के काटकर वापस किए गए थे। इस पर नेहा ने स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया।
स्थायी लोक अदालत की तीन सदस्यीय पीठ पूर्व जिला जज व अध्यक्ष रियासत हुसैन, वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी, डॉ. मीना बंसल ने नेहा मित्तल के हक में फैसला सुनाते हुए विकास प्राधिकरण को जमा की हुई धन राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज की दर से 4,80,720 के भुगतान का आदेश दिया। काटे हुई टीडीएस राशि को एक माह में प्रक्रिया पूरी करते हुए दिलाने के आदेश पारित किए। एक माह में भुगतान न करने की स्थिति में 9 प्रतिशत की ब्याज भी नियत की है।
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बैंक कॉलोनी सुरेंद्र नगर निवासी नेहा मित्तल ने विज्ञापन के आधार पर स्वर्ण जयंती नगर विस्तार योजना के अंतर्गत डुप्लेक्स भवन के लिए आवेदन किया था। इसका आवंटन लाटरी द्वारा होना था। लाटरी में नाम आने पर 11 जुलाई 2013 को यह डुप्लेक्स नेहा मित्तल के नाम आवंटित कर दिया गया। उस समय इस भवन की कीमत 51,10,00 रुपये थी। पहली किस्त 5,11, 000 रुपये विकास प्राधिकरण को जमा कर दिए ।
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भवन की पूरी कीमत अदा करने के लिए नेहा मित्तल ने स्टेट बैंक से 37,63,515 रुपये ऋ ़ण लिया। 17 जुलाई 2013 से 16 जनवरी 2014 के बीच नेहा ने भवन के पूरे पैसे जमा कर दिए। भवन के पैसे जमा करने के बाद जब प्रार्थी ने फ्र ी होल्ड रजिस्ट्री की बात कही तो संपत्ति अधिकारी ने लिखित पत्रांक के जरिए सूचित किया कि फ्रीहोल्ड रजिस्ट्री के पैसे जमा करा दिए जाएं तो यह रुपये भी जमा कर दिए।
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शिकायत के मुताबिक रजिस्ट्री के पैसे जमा करने के बाद भी जब मकान पर जब कब्जा नहीं मिला तब उसने प्राधिकरण के चक्कर लगाए, परंतु कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। कुछ समय बाद बताया कि आवंटित भवन की भूमि पर उच्च न्यायालय में वाद लंबित है। इसलिए आपको आवंटित भवन की रजिस्ट्री किया जाना संभव नहीं है। इस पर उसने पैसे वापस करने की मांग की। कुछ समय बाद नेहा के खाते में जमा की गई धनराशि 53,41,335 की जगह उसके खाते में 52,93,310 आए। इसमें से 48,004 रुपये टीडीएस के काटकर वापस किए गए थे। इस पर नेहा ने स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया।
स्थायी लोक अदालत की तीन सदस्यीय पीठ पूर्व जिला जज व अध्यक्ष रियासत हुसैन, वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी, डॉ. मीना बंसल ने नेहा मित्तल के हक में फैसला सुनाते हुए विकास प्राधिकरण को जमा की हुई धन राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज की दर से 4,80,720 के भुगतान का आदेश दिया। काटे हुई टीडीएस राशि को एक माह में प्रक्रिया पूरी करते हुए दिलाने के आदेश पारित किए। एक माह में भुगतान न करने की स्थिति में 9 प्रतिशत की ब्याज भी नियत की है।