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अब्बास रजा के दिल में जिंदा हैं डॉ. कलाम
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jul 2016 01:59 AM IST
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अब्बास रजा के दिल में जिंदा हैं डॉ. कलाम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एएमयू सीनियर सेकेंडरी स्कूल के कक्षा 12 में पढ़ने वाले अब्बास रजा के दिल में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज भी जिंदा हैं। 8 साल बाद भी पूर्व राष्ट्रपति व महान वैज्ञानिक के साथ गुजारे चंद लम्हें उसे याद हैं।
वर्ष 2008 के जून महीने में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। वे यहां दो दिन रुके थे और एएमयू तथा शहर के स्कूली बच्चों से बातचीत की थी। इसी दौरान वह एएमयू के अहमदी स्कूल फॉर ब्लाइंड भी गए थे। वहीं पर कक्षा 6 का छात्र अब्बास रजा उनसे मिले थे और हाथ भी मिलाया था। आज करीब 8 साल बाद अब्बास रजा अहमदी स्कूल से निकलकर एएमयू के सीनियर सेकेंडरी स्कूल ब्वायज के कक्षा 12 में पहुंच चुके हैं।
अब्बास रजा भले ही आंख से देखने में असमर्थ है, लेकिन खुदा ने उन्हें बड़ा दिल एवं तेज दिमाग जरूर दिया है। 8 साल पहले की घटना उनके दिमाग में बिल्कुल ताजा है। मुरादाबाद जनपद के मोहल्ला सदत टाउन कुंडर्की से अब्बास ने फोन पर बताया कि डॉ. कलाम उनके दिल में बसते हैं। जब उनके इंतकाल का दुखद समाचार सुना तो तीन-चार दिन कुछ भी खाने-पीने को मन नहीं हुआ। उनका जीवन हमेशा प्रेरणा प्रदान करता रहेगा। मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्हीं के सुझाव पर अहमदी स्कूल फॉर ब्लाइंड का नाम परिवर्तित कर अहमदी स्कूल फॉर विजुअली चैलेंज्ड किया गया। उन्होंने स्कूल में कंप्यूटर लैब का उद्घाटन भी किया था।
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सदियों में पैदा होते हैं डॉ. कलाम जैसे लोग
अलीगढ़। पूर्व राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब्दुल कलाम की प्रथम पुण्य तिथि पर मुस्लिम चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के तत्वावधान में मीडिया सेंटर पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
डायरेक्टर डॉ. जसीम मोहम्मद ने कहा कि डॉ. कलाम ने डीआरडीओ को नया आयाम दिया। उन्होंने देश में स्पेस कार्यक्रम को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। प्रो. हुमायू मुराद ने कहा कि डॉ. कलाम जैसे लोग सदियों में पैदा होते है और वे सदियों तक प्रेरणा स्रोत बने रहते है।
हमे उनके संघर्षों और उपलब्धियों से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। मीडिया सेंटर पर 29 जुलाई को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एवं युवा पीढ़ी पर मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में अंसार अहमद, एन. जमाल अंसारी, इकबाल सैफी, साकिब अहमद, सुमबुल, अदीबा, मरयम खलीद, अम्मार खान, मेहमूद अंसारी एवं मोहम्मद दिलशाद आदि शामिल है।
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वर्ष 2008 के जून महीने में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। वे यहां दो दिन रुके थे और एएमयू तथा शहर के स्कूली बच्चों से बातचीत की थी। इसी दौरान वह एएमयू के अहमदी स्कूल फॉर ब्लाइंड भी गए थे। वहीं पर कक्षा 6 का छात्र अब्बास रजा उनसे मिले थे और हाथ भी मिलाया था। आज करीब 8 साल बाद अब्बास रजा अहमदी स्कूल से निकलकर एएमयू के सीनियर सेकेंडरी स्कूल ब्वायज के कक्षा 12 में पहुंच चुके हैं।
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अब्बास रजा भले ही आंख से देखने में असमर्थ है, लेकिन खुदा ने उन्हें बड़ा दिल एवं तेज दिमाग जरूर दिया है। 8 साल पहले की घटना उनके दिमाग में बिल्कुल ताजा है। मुरादाबाद जनपद के मोहल्ला सदत टाउन कुंडर्की से अब्बास ने फोन पर बताया कि डॉ. कलाम उनके दिल में बसते हैं। जब उनके इंतकाल का दुखद समाचार सुना तो तीन-चार दिन कुछ भी खाने-पीने को मन नहीं हुआ। उनका जीवन हमेशा प्रेरणा प्रदान करता रहेगा। मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्हीं के सुझाव पर अहमदी स्कूल फॉर ब्लाइंड का नाम परिवर्तित कर अहमदी स्कूल फॉर विजुअली चैलेंज्ड किया गया। उन्होंने स्कूल में कंप्यूटर लैब का उद्घाटन भी किया था।
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सदियों में पैदा होते हैं डॉ. कलाम जैसे लोग
अलीगढ़। पूर्व राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब्दुल कलाम की प्रथम पुण्य तिथि पर मुस्लिम चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के तत्वावधान में मीडिया सेंटर पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
डायरेक्टर डॉ. जसीम मोहम्मद ने कहा कि डॉ. कलाम ने डीआरडीओ को नया आयाम दिया। उन्होंने देश में स्पेस कार्यक्रम को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। प्रो. हुमायू मुराद ने कहा कि डॉ. कलाम जैसे लोग सदियों में पैदा होते है और वे सदियों तक प्रेरणा स्रोत बने रहते है।
हमे उनके संघर्षों और उपलब्धियों से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। मीडिया सेंटर पर 29 जुलाई को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एवं युवा पीढ़ी पर मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में अंसार अहमद, एन. जमाल अंसारी, इकबाल सैफी, साकिब अहमद, सुमबुल, अदीबा, मरयम खलीद, अम्मार खान, मेहमूद अंसारी एवं मोहम्मद दिलशाद आदि शामिल है।