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नोटबंदी के चक्कर में करा ली नसबंदी
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Sat, 26 Nov 2016 01:52 AM IST
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नोटबंदी के चक्कर में करा ली नसबंदी
- फोटो : पंकज रावत
गरीब की मजदूरी पर नोटबंदी की बड़ी चोट लगी है। एक मजदूर को कई दिनों से काम नहीं मिला। लोगों के आगे हाथ फैलाए फिर भी रुपये का इंतजाम नहीं हुआ तो वह नसबंदी कराने पहुंच गया। चूंकि पुरुष नसबंदी में सरकार दो हजार रुपये देती है, इसलिए इन दो हजार रुपये के लिए मजदूर ने शुक्रवार को नसबंदी कराई।
गांव नहरौला निवासी पूरन शर्मा पुत्र सत्यप्रकाश ने बताया कि परिवार में दो बेटे, एक बेटी, मूक-बधिर पत्नी है। उसके पास न खेत है, न ही रहने के लिए मकान। कोई मदद भी नहीं कर रहा। ग्राम प्रधान से भी कई बार सहायता मांग चुका है, लेकिन उन्होंने भी सहायता नहीं की। नोटबंदी के बाद से काम नहीं मिला। घर पर रोटी खाने के लाले पड़ रहे हैं। नसबंदी कराने पर दो हजार रुपये मिलते हैं, इसीलिए वह नसबंदी कराने आया है। नसबंदी पर मिलने वाले दो हजार रुपये उसके बैंक खाते में 48 घंटे बाद पहुंचेंगे। वह पत्नी को भी साथ लाया था, क्योंकि महिला नसबंदी पर भी सरकार 1400 रुपये देती है लेकिन उसकी पत्नी ने सिर हिलाकर नसबंदी कराने से मना कर दिया।
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गांव नहरौला निवासी पूरन शर्मा पुत्र सत्यप्रकाश ने बताया कि परिवार में दो बेटे, एक बेटी, मूक-बधिर पत्नी है। उसके पास न खेत है, न ही रहने के लिए मकान। कोई मदद भी नहीं कर रहा। ग्राम प्रधान से भी कई बार सहायता मांग चुका है, लेकिन उन्होंने भी सहायता नहीं की। नोटबंदी के बाद से काम नहीं मिला। घर पर रोटी खाने के लाले पड़ रहे हैं। नसबंदी कराने पर दो हजार रुपये मिलते हैं, इसीलिए वह नसबंदी कराने आया है। नसबंदी पर मिलने वाले दो हजार रुपये उसके बैंक खाते में 48 घंटे बाद पहुंचेंगे। वह पत्नी को भी साथ लाया था, क्योंकि महिला नसबंदी पर भी सरकार 1400 रुपये देती है लेकिन उसकी पत्नी ने सिर हिलाकर नसबंदी कराने से मना कर दिया।
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