{"_id":"6-22021","slug":"Aligarh-22021-6","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईओ के बाद सीओ की गर्दन पर शिकंजा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईओ के बाद सीओ की गर्दन पर शिकंजा
Aligarh
Updated Sun, 12 Oct 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अलीगढ़। महानगर के सासनी गेट इलाके के प्रापर्टी डीलर सजन यादव की अपहरण के बाद हत्या के मामले में पहले ही दिन से लापरवाही तत्कालीन आईओ से लेकर सीओ तक के लिए भारी पड़ती दिख रही है। इस मामले में लखनऊ स्तर से जवाब तलबी के बाद जिला पुलिस सन्नाटे में आ गई है। शुक्रवार को पूरा ब्योरा जवाब के साथ लखनऊ भेजा गया है। इसके आधार पर संकेत मिले हैं कि सीओ के खिलाफ जल्द कार्रवाई हो सकती है।
घटनाक्रम पर गौर करें तो सजन यादव के गायब होने के बाद जब परिवार ने नौ लोगों के नाम पुलिस को बताए तो उसके बाद से पुलिस का रवैया नामजदों के प्रति शिथिल रहा। परिजन पहले ही दिन से तत्कालीन सीओ प्रथम राममोहन पर रुपये लेकर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते रहे। बात यहां तक सामने आई कि एक दिन एसओ के हाथ से चाय पीने के बहाने आरोपी निकल गया। मगर इस बात को भी संदेह की दृष्टि से देखा गया। स्थानीय स्तर पर जब बात नहीं सुनी गई तो परिवार सीधे मुख्यमंत्री से मिला। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद तत्कालीन सीओ को हटाकर उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू करा दी गई और जांच एसपी ट्रैफिक को सौंपी गई। शुक्रवार को इस मामले में लखनऊ व आईजी स्तर से पूरा ब्योरा तलब किया गया। जिसमें पूछा गया कि पुरानी पुलिस टीम के खिलाफ सजन यादव मामले में क्या कार्रवाई की गई और सीओ के खिलाफ किस मामले में क्या कार्रवाई की गई। इस पर दोपहर में घंटों एसएसपी व एसपी ट्रैफिक अपने कार्यालय में अकेले बैठे गुफ्तगू करते रहे। इसके बाद पूरा जवाब तैयार कर लखनऊ व आईजी कार्यालय को भेजा गया। देर रात आईओ को भी निलंबित कर दिया गया। इस मामले में पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्र एक ही जानकारी दे रहे हैं कि जैसे संकेत हैं, उसके हिसाब से आईओ से लेकर सीओ स्तर तक पर तगड़ी कार्रवाई के संकेत हैं। अभी अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। चर्चा निलंबन तक की सामने आ रही है।
विज्ञापन
घटनाक्रम पर गौर करें तो सजन यादव के गायब होने के बाद जब परिवार ने नौ लोगों के नाम पुलिस को बताए तो उसके बाद से पुलिस का रवैया नामजदों के प्रति शिथिल रहा। परिजन पहले ही दिन से तत्कालीन सीओ प्रथम राममोहन पर रुपये लेकर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते रहे। बात यहां तक सामने आई कि एक दिन एसओ के हाथ से चाय पीने के बहाने आरोपी निकल गया। मगर इस बात को भी संदेह की दृष्टि से देखा गया। स्थानीय स्तर पर जब बात नहीं सुनी गई तो परिवार सीधे मुख्यमंत्री से मिला। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद तत्कालीन सीओ को हटाकर उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू करा दी गई और जांच एसपी ट्रैफिक को सौंपी गई। शुक्रवार को इस मामले में लखनऊ व आईजी स्तर से पूरा ब्योरा तलब किया गया। जिसमें पूछा गया कि पुरानी पुलिस टीम के खिलाफ सजन यादव मामले में क्या कार्रवाई की गई और सीओ के खिलाफ किस मामले में क्या कार्रवाई की गई। इस पर दोपहर में घंटों एसएसपी व एसपी ट्रैफिक अपने कार्यालय में अकेले बैठे गुफ्तगू करते रहे। इसके बाद पूरा जवाब तैयार कर लखनऊ व आईजी कार्यालय को भेजा गया। देर रात आईओ को भी निलंबित कर दिया गया। इस मामले में पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्र एक ही जानकारी दे रहे हैं कि जैसे संकेत हैं, उसके हिसाब से आईओ से लेकर सीओ स्तर तक पर तगड़ी कार्रवाई के संकेत हैं। अभी अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। चर्चा निलंबन तक की सामने आ रही है।
विज्ञापन