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‘विचार और कर्म से लोकतांत्रिक थे राजेंद्र’
Aligarh
Updated Sat, 02 Nov 2013 05:39 AM IST
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अलीगढ़ (ब्यूरो)। जनवादी लेखक संघ ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार और ‘हंस’ पत्रिका के संपादक राजेंद्र यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उन्हें साहित्य, समाज, राजनीति, अर्थनीति पर बहुत दृढ़ता से बात कहने वाला, विचार और कर्म से लोकतांत्रिक व्यक्तित्व बताया।
उर्दू के सुप्रसिद्ध कथाकार काजी अब्दुल सत्तार की अध्यक्षता में हुई इस सभा में डॉ. प्रेमकुमार ने कहा कि उन्होंने पूरी एक पीढ़ी का निर्माण किया। प्रो. सगीर अफ राहीम ने उन्हें न सिर्फ हिंदी बल्कि उर्दू साहित्य का भी प्रखर विद्वान बताया और उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। डॉ. वेद प्रकाश ने उनके व्यक्तित्व को जटिल और प्रभावशाली बताया। डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि कथा साहित्य के अतिरिक्त हिंदी आलोचना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। प्रो. तारिक छतारी ने उन्हें आजादी के बाद निर्मित नए समाज की प्रवृत्तियों को रेखांकित करने वाला लेखक कहा। जनवादी लेखक संघ की अध्यक्ष नमिता सिंह ने कहा कि वे मेरे कथा गुरु थे और नई पीढ़ी के रचनाकारों ने उनसे बहुत सीखा। दिल्ली से पधारे प्रदीप मांडव ने कहा कि अहसास को कहानी बनाना राजेंद्र जी की विशेषता थी। काजी अब्दुल सत्तार ने उन्हें अपने संस्मरण में याद किया। संचालन जलेसं के सचिव प्रो. प्रदीप सक्सेना ने किया। राजेंद्र यादव के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक प्रस्ताव पढ़ा गया और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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उर्दू के सुप्रसिद्ध कथाकार काजी अब्दुल सत्तार की अध्यक्षता में हुई इस सभा में डॉ. प्रेमकुमार ने कहा कि उन्होंने पूरी एक पीढ़ी का निर्माण किया। प्रो. सगीर अफ राहीम ने उन्हें न सिर्फ हिंदी बल्कि उर्दू साहित्य का भी प्रखर विद्वान बताया और उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। डॉ. वेद प्रकाश ने उनके व्यक्तित्व को जटिल और प्रभावशाली बताया। डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि कथा साहित्य के अतिरिक्त हिंदी आलोचना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। प्रो. तारिक छतारी ने उन्हें आजादी के बाद निर्मित नए समाज की प्रवृत्तियों को रेखांकित करने वाला लेखक कहा। जनवादी लेखक संघ की अध्यक्ष नमिता सिंह ने कहा कि वे मेरे कथा गुरु थे और नई पीढ़ी के रचनाकारों ने उनसे बहुत सीखा। दिल्ली से पधारे प्रदीप मांडव ने कहा कि अहसास को कहानी बनाना राजेंद्र जी की विशेषता थी। काजी अब्दुल सत्तार ने उन्हें अपने संस्मरण में याद किया। संचालन जलेसं के सचिव प्रो. प्रदीप सक्सेना ने किया। राजेंद्र यादव के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक प्रस्ताव पढ़ा गया और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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