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आरटीओ में दो बार देनी पड़ रही फीस-Cordination
Updated Sun, 13 May 2018 01:28 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सुविधा के लिए बनाई गई व्यवस्था कई बार असुविधा बन जाती है। दलालों का हस्तक्षेप खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आरटीओ में लागू किए गए सारथी-4 एवं वाहन-4 साफ्टवेयर जनता के लिए सिरदर्द बन गए हैं। इन दोनों सॉफ्टवेयर के लागू होने के बाद पूरा काम कनेक्टिविटी पर निर्भर हो गया है। कनेक्टिविटी जाने पर लोगों को परेशानी का सामना तो करना पड़ता है, साथ ही उन्हें एक ही काम की दो बार फीस भी जमा करनी पड़ रही है।
आरटीओ कार्यालय में गुजरे दो महीने से मैनुअली ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम खत्म हो गया है। अब ये प्रक्रिया सारथी-4 नाम के सॉफ्टवेयर से ऑनलाइन पूरी की जाती है। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि लाइसेंस की अंतिम तारीख होने पर यदि कनेक्टिविटी चली गई तो इसके लिए आवेदक को पुन: लर्निंग वाली प्रक्रिया अपनानी होगी।
चाह कर भी कोई अधिकारी आवेदक की मदद नहीं कर पा रहे हैं। तकनीकी खामी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। इसी तरह से वाहनों की आरसी बनवाने, वाहन का रंग अथवा अन्य मॉडिफि केशन करवाने के बाद दूसरी आरसी निकलवाने के लिए वाहन-4 नाम के साफ्टवेयर का ऑनलाइन इस्तेमाल किया जाता है।
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इसमें वाहन का रंग अथवा अन्य मॉडिफि केशन करवाने के बाद दूसरी आरसी भी नहीं बनेगी। अधिकारियों के अनुसार मॉडिफिकेशन या रंग बदलवाने के बाद दूसरी आरसी देने का प्रावधान साफ्टवेयर में है ही नहीं। ऐसा भी नहीं है कि यह केवल अलीगढ़ की समस्या हो, सारथी-4 और वाहन-4 सॉफ्टवेयर पूरे देश में लागू होता जा रहा है और ये समस्या सभी जगह सामने आ रही है।
ये हैं प्रमुख दिक्कतें
1-सारथी-4 साफ्टवेयर से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के दौरान लर्निंग लाइसेंस बनने के बाद तयशुदा फीस और तयशुदा वक्त में ही परमानेंट लाइसेंस आनलाइन जारी होता है। अक्सर सारथी-4 में कनेक्टिविटी नहीं आने से आवेदक का तयशुदा समय निकल जाता है और आरटीओ पहुंचने के बाद भी उसका लाइसेंस स्थायी नहीं होता है। फीस भी सिस्टम की खामी से लैप्स हो जाती है। इसके बाद नये सिरे से पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
2-वाहन-4 साफ्टवेयर से वाहनों का रंग परिवर्तित कराने या मोडिफिकेशन के बाद दूसरी आरसी नहीं निकल रही है, जिससे आवेदक परेशान हैं। आरटीओ के अधिकारी कह रहे हैं कि साफ्टवेयर में इसका प्रावधान नहीं है।
- मामला संज्ञान में है। लोगों को अपने काम की अंतिम तारीख पर ही क्यों आना होता है। वह एक दो दिन पहले भी आ सकते हैं। लर्निंग लाइसेंस बनने के एक माह बाद कभी भी इसे स्थायी में तब्दील कराया जा सकता है। नेट की कनेक्टिविटी जाने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ये तकनीकी दिक्कत है।
-राधेश्याम, आरटीओ
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सुविधा के लिए बनाई गई व्यवस्था कई बार असुविधा बन जाती है। दलालों का हस्तक्षेप खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आरटीओ में लागू किए गए सारथी-4 एवं वाहन-4 साफ्टवेयर जनता के लिए सिरदर्द बन गए हैं। इन दोनों सॉफ्टवेयर के लागू होने के बाद पूरा काम कनेक्टिविटी पर निर्भर हो गया है। कनेक्टिविटी जाने पर लोगों को परेशानी का सामना तो करना पड़ता है, साथ ही उन्हें एक ही काम की दो बार फीस भी जमा करनी पड़ रही है।
आरटीओ कार्यालय में गुजरे दो महीने से मैनुअली ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम खत्म हो गया है। अब ये प्रक्रिया सारथी-4 नाम के सॉफ्टवेयर से ऑनलाइन पूरी की जाती है। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि लाइसेंस की अंतिम तारीख होने पर यदि कनेक्टिविटी चली गई तो इसके लिए आवेदक को पुन: लर्निंग वाली प्रक्रिया अपनानी होगी।
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चाह कर भी कोई अधिकारी आवेदक की मदद नहीं कर पा रहे हैं। तकनीकी खामी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। इसी तरह से वाहनों की आरसी बनवाने, वाहन का रंग अथवा अन्य मॉडिफि केशन करवाने के बाद दूसरी आरसी निकलवाने के लिए वाहन-4 नाम के साफ्टवेयर का ऑनलाइन इस्तेमाल किया जाता है।
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इसमें वाहन का रंग अथवा अन्य मॉडिफि केशन करवाने के बाद दूसरी आरसी भी नहीं बनेगी। अधिकारियों के अनुसार मॉडिफिकेशन या रंग बदलवाने के बाद दूसरी आरसी देने का प्रावधान साफ्टवेयर में है ही नहीं। ऐसा भी नहीं है कि यह केवल अलीगढ़ की समस्या हो, सारथी-4 और वाहन-4 सॉफ्टवेयर पूरे देश में लागू होता जा रहा है और ये समस्या सभी जगह सामने आ रही है।
ये हैं प्रमुख दिक्कतें
1-सारथी-4 साफ्टवेयर से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के दौरान लर्निंग लाइसेंस बनने के बाद तयशुदा फीस और तयशुदा वक्त में ही परमानेंट लाइसेंस आनलाइन जारी होता है। अक्सर सारथी-4 में कनेक्टिविटी नहीं आने से आवेदक का तयशुदा समय निकल जाता है और आरटीओ पहुंचने के बाद भी उसका लाइसेंस स्थायी नहीं होता है। फीस भी सिस्टम की खामी से लैप्स हो जाती है। इसके बाद नये सिरे से पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
2-वाहन-4 साफ्टवेयर से वाहनों का रंग परिवर्तित कराने या मोडिफिकेशन के बाद दूसरी आरसी नहीं निकल रही है, जिससे आवेदक परेशान हैं। आरटीओ के अधिकारी कह रहे हैं कि साफ्टवेयर में इसका प्रावधान नहीं है।
- मामला संज्ञान में है। लोगों को अपने काम की अंतिम तारीख पर ही क्यों आना होता है। वह एक दो दिन पहले भी आ सकते हैं। लर्निंग लाइसेंस बनने के एक माह बाद कभी भी इसे स्थायी में तब्दील कराया जा सकता है। नेट की कनेक्टिविटी जाने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ये तकनीकी दिक्कत है।
-राधेश्याम, आरटीओ