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आज होगा अधर्मी रावण का अंत
Updated Sun, 01 Oct 2017 05:28 PM IST
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आज होगा अधर्मी रावण का अंत
अलीगढ़। अचलताल स्थित रामलीला ग्राउंड में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में शुक्रवार को मेघनाथ, कुंभकरण, अहिरावण वध एवं सुलोचना सती की लीला हुई। श्रीराम एवं रामायण का पूजन अर्जुन गोविल ने अपनी धर्मपत्नी के साथ किया। इसके बाद रामलीला हुई। शनिवार को नुमाइश मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन होगा।
आदर्श रामलीला मंडल के निर्देशक राघवेंद्र चतुर्वेदी के नेतृत्व में रामलीला का मंचन हुआ। रामायण का पाठ व्यास प्रशांत कृष्ण चतुर्वेदी ने किया। संजीवनी बूटी से लक्ष्मण के प्राण बच गये। उन्होंने मेघनाथ को ललकारा। उधर, मेघनाथ ने युद्ध में थकने के कारण रावण से कहा कि युद्ध में सेनापति किसी और को बना दीजिये। रावण युद्ध के लिये कुंभकरण को जगाने के लिए अपने लोगों को भेजता है। ब्रह्मा के वरदान के कारण वह छह माह तक सोता है। काफी प्रयास के बाद भी जब कुंभकरण नहीं उठता तो उसके लिए भोजन रखवाया जाता है। रामायण में लिखा है ‘मास खाय कर मदिरा पाना गर्जहू व्रजाघात समाना’। भूख शांत होने के बाद कुंभकरण ने रावण से पूछा कि मुझे क्यों जगाया, तो रावण पूरी बात बताता है।
कुंभकरण रावण को समझाता है, लेकिन रावण उसे कायर कहता है, तो वह युद्ध के लिए जाता है। श्रीराम कुंभकरण का वध कर देते हैं। अगले दिन मेघनाथ युद्ध करने आता है और लक्ष्मण जी के हाथों मारा जाता है। समिति के मीडिया प्रभारी संदीप रंजन गुप्ता ने बताया कि शनिवार को श्रीराम एवं रावण का युद्ध, श्रीराम जानकी मिलन, विजय तिलक, श्रीराम रावण युद्ध की शोभायात्रा रामलीला मैदान से 1.30 बजे शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई नुमाइश मैदान पहुंचेगी। यहां रावण, कुंभकरण एवं मेघनाथ के पुतलों का दहन होगा।
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रामलीला में विमल अग्रवाल, ऋषि मित्तल, शैलेंद्र अग्रवाल, अतुल कुलश्रेष्ठ, गोपाल वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, हरीश शर्मा, सुनील गर्ग, मनमोहन अग्रवाल, राजेश सैनी, राजेश गर्ग आदि उपस्थित थे।
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अलीगढ़। अचलताल स्थित रामलीला ग्राउंड में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव में शुक्रवार को मेघनाथ, कुंभकरण, अहिरावण वध एवं सुलोचना सती की लीला हुई। श्रीराम एवं रामायण का पूजन अर्जुन गोविल ने अपनी धर्मपत्नी के साथ किया। इसके बाद रामलीला हुई। शनिवार को नुमाइश मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन होगा।
आदर्श रामलीला मंडल के निर्देशक राघवेंद्र चतुर्वेदी के नेतृत्व में रामलीला का मंचन हुआ। रामायण का पाठ व्यास प्रशांत कृष्ण चतुर्वेदी ने किया। संजीवनी बूटी से लक्ष्मण के प्राण बच गये। उन्होंने मेघनाथ को ललकारा। उधर, मेघनाथ ने युद्ध में थकने के कारण रावण से कहा कि युद्ध में सेनापति किसी और को बना दीजिये। रावण युद्ध के लिये कुंभकरण को जगाने के लिए अपने लोगों को भेजता है। ब्रह्मा के वरदान के कारण वह छह माह तक सोता है। काफी प्रयास के बाद भी जब कुंभकरण नहीं उठता तो उसके लिए भोजन रखवाया जाता है। रामायण में लिखा है ‘मास खाय कर मदिरा पाना गर्जहू व्रजाघात समाना’। भूख शांत होने के बाद कुंभकरण ने रावण से पूछा कि मुझे क्यों जगाया, तो रावण पूरी बात बताता है।
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कुंभकरण रावण को समझाता है, लेकिन रावण उसे कायर कहता है, तो वह युद्ध के लिए जाता है। श्रीराम कुंभकरण का वध कर देते हैं। अगले दिन मेघनाथ युद्ध करने आता है और लक्ष्मण जी के हाथों मारा जाता है। समिति के मीडिया प्रभारी संदीप रंजन गुप्ता ने बताया कि शनिवार को श्रीराम एवं रावण का युद्ध, श्रीराम जानकी मिलन, विजय तिलक, श्रीराम रावण युद्ध की शोभायात्रा रामलीला मैदान से 1.30 बजे शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई नुमाइश मैदान पहुंचेगी। यहां रावण, कुंभकरण एवं मेघनाथ के पुतलों का दहन होगा।
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रामलीला में विमल अग्रवाल, ऋषि मित्तल, शैलेंद्र अग्रवाल, अतुल कुलश्रेष्ठ, गोपाल वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, हरीश शर्मा, सुनील गर्ग, मनमोहन अग्रवाल, राजेश सैनी, राजेश गर्ग आदि उपस्थित थे।