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नहीं मिली रिहाई, पोस्टल बैलेट से किया मतदान
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) में निरुद्ध कोतवाली के तुर्कमान गेट निवासी आबाद उर्फ इरफान को रिहाई नहीं मिल सकी है। इसके कारण पोस्टल बैलेट के जरिये उसने अपने मत का प्रयोग किया है। पोस्टल बैलेट को जेल प्रशासन ने निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। आबाद जिला कारागार में निरुद्ध एक मात्र ऐसा बंदी है, जिसने अपने मत का प्रयोग किया है।
दरअसल, एनएसए के अलावा अन्य किसी भी मामले के बंदी को वोट डालने का अधिकार नहीं है। बता दें कि ऊपर कोट पर 2017 में जुमे के दिन हुए बवाल में आबाद उर्फ इरफान मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था। 25 मई 2018 को जेल भेजा गया और एनएसए के तहत कार्यवाही हुई। आबाद की ओर से जमानत के लिए आवेदन किया गया लेकिन जमानत याचिका खारिज होती रहीं।
बाद में अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया और वहां से जमानत स्वीकार हुई, लेकिन यहां पर आए आदेश की कापी में उसका आबाद के स्थान पर आदाब नाम लिख गया। इसके चलते उसकी रिहाई अटक गई थी। आबाद के अधिवक्ता बिट्टू पाठक ने बताया कि आदेश में नाम संशोधन के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है। वहां से संशोधित आदेश आने के बाद रिहाई होगी।
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राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) में निरुद्ध कोतवाली के तुर्कमान गेट निवासी आबाद उर्फ इरफान को रिहाई नहीं मिल सकी है। इसके कारण पोस्टल बैलेट के जरिये उसने अपने मत का प्रयोग किया है। पोस्टल बैलेट को जेल प्रशासन ने निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। आबाद जिला कारागार में निरुद्ध एक मात्र ऐसा बंदी है, जिसने अपने मत का प्रयोग किया है।
दरअसल, एनएसए के अलावा अन्य किसी भी मामले के बंदी को वोट डालने का अधिकार नहीं है। बता दें कि ऊपर कोट पर 2017 में जुमे के दिन हुए बवाल में आबाद उर्फ इरफान मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था। 25 मई 2018 को जेल भेजा गया और एनएसए के तहत कार्यवाही हुई। आबाद की ओर से जमानत के लिए आवेदन किया गया लेकिन जमानत याचिका खारिज होती रहीं।
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बाद में अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया और वहां से जमानत स्वीकार हुई, लेकिन यहां पर आए आदेश की कापी में उसका आबाद के स्थान पर आदाब नाम लिख गया। इसके चलते उसकी रिहाई अटक गई थी। आबाद के अधिवक्ता बिट्टू पाठक ने बताया कि आदेश में नाम संशोधन के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है। वहां से संशोधित आदेश आने के बाद रिहाई होगी।
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