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हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज है ब्रांड नेम : कुलपति
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज ही दवाओं का ब्रांड नेम है। इसलिए इसकी ब्रांडिंग बहुत जरूरी है।
शनिवार को ये बातें कुलपति ने किला रोड स्थित दवाखाना तिब्बिया कॉलेज में नई यूनिट का उद्घाटन करने के बाद कहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1950 में तिब्बिया कॉलेज शुरू हुआ था, जो 69 साल से कॉलेज लोगों को अपनी सेवाएं दे रहा है।
अब दौर प्रतिस्पर्धा का है। तिब्बिया कॉलेज की दवाओं का मुकाबला दूसरी कंपनियों से है। इसलिए कॉलेज से जुड़े लोगों में प्रोफेशनलिज्म व इफेशियंशी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भविष्य की ओर देखना होगा। इसमें सबके सहयोग की जरूरत है।
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यूनानी दवाओं के क्षेत्र में अवसर बढ़ रहा है। पश्चिमी देशों में यूनानी दवाओं की मांग बढ़ रही है। सेल्स व मार्केटिंग पर पूरा फोकस होना चाहिए। क्वालिटी कंट्रोल करना चुनौती है, इस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। दवाओं का प्रोडक्शन बढ़ाना होगा।
कॉलेज के मेंबर इन इंचार्ज प्रो. ताजुद्दीन ने कहा कि जल्द ही एक परिसर में दवाएं बनेंगी। मॉडर्न दवाखाना कायम हो गया है। क्वालिटी कंट्रोल लैब की स्थापना होना है। दवाखाना की 350 दवाएं रजिस्टर्ड हैं। 150 दवाओं की मार्केटिंग हो रही है, जबकि 6 दवाएं पेटेंट हैं। 4-5 वर्षों में 4-5 नई दवाएं ईजाद करनी है।
एएमयू रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद ने कहा कि अत्याधुनिक मशीनों में दवाएं बनेंगी। इससे पहले कुलपति ने अत्याधुनिक मशीनों का अवलोकन किया। इस अवसर पर पीवीसी प्रो. मोहम्मद हनीफ बेग, पद्मश्री हकीम जिल्लुर्रहमान, कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. सऊद अली खान, स्टेट यूनानी निदेशालय के डायरेक्टर सिकंदर हयात सिद्दीकी, जीएम अरशद मुनीर, प्रो. यूनुस सिद्दीकी, प्रो. रेहान अलवी आदि मौजूद रहे। संचालन तौफीक अहमद ने किया।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज ही दवाओं का ब्रांड नेम है। इसलिए इसकी ब्रांडिंग बहुत जरूरी है।
शनिवार को ये बातें कुलपति ने किला रोड स्थित दवाखाना तिब्बिया कॉलेज में नई यूनिट का उद्घाटन करने के बाद कहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1950 में तिब्बिया कॉलेज शुरू हुआ था, जो 69 साल से कॉलेज लोगों को अपनी सेवाएं दे रहा है।
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अब दौर प्रतिस्पर्धा का है। तिब्बिया कॉलेज की दवाओं का मुकाबला दूसरी कंपनियों से है। इसलिए कॉलेज से जुड़े लोगों में प्रोफेशनलिज्म व इफेशियंशी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भविष्य की ओर देखना होगा। इसमें सबके सहयोग की जरूरत है।
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यूनानी दवाओं के क्षेत्र में अवसर बढ़ रहा है। पश्चिमी देशों में यूनानी दवाओं की मांग बढ़ रही है। सेल्स व मार्केटिंग पर पूरा फोकस होना चाहिए। क्वालिटी कंट्रोल करना चुनौती है, इस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। दवाओं का प्रोडक्शन बढ़ाना होगा।
कॉलेज के मेंबर इन इंचार्ज प्रो. ताजुद्दीन ने कहा कि जल्द ही एक परिसर में दवाएं बनेंगी। मॉडर्न दवाखाना कायम हो गया है। क्वालिटी कंट्रोल लैब की स्थापना होना है। दवाखाना की 350 दवाएं रजिस्टर्ड हैं। 150 दवाओं की मार्केटिंग हो रही है, जबकि 6 दवाएं पेटेंट हैं। 4-5 वर्षों में 4-5 नई दवाएं ईजाद करनी है।
एएमयू रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद ने कहा कि अत्याधुनिक मशीनों में दवाएं बनेंगी। इससे पहले कुलपति ने अत्याधुनिक मशीनों का अवलोकन किया। इस अवसर पर पीवीसी प्रो. मोहम्मद हनीफ बेग, पद्मश्री हकीम जिल्लुर्रहमान, कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. सऊद अली खान, स्टेट यूनानी निदेशालय के डायरेक्टर सिकंदर हयात सिद्दीकी, जीएम अरशद मुनीर, प्रो. यूनुस सिद्दीकी, प्रो. रेहान अलवी आदि मौजूद रहे। संचालन तौफीक अहमद ने किया।