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वक्फ बोर्ड से फर्जी किरायानामा बनवाकर कब्जा ली सरकारी भूमि
Updated Tue, 11 Sep 2018 01:48 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
वक्फ बोर्ड से वर्ष 1990 में किरायानामा बनवाकर करोड़ों रुपये मूल्य की 14 बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे छर्रा अड्डा के रूप में संचालित करने का मामला प्रकाश में आया है। यह कारनामा किया है बस माफिया ने। अब तक हुई जांच में पता चला है कि न केवल फर्जी तरीके से बस अड्डा बनवाया गया, बल्कि एक पेट्रोल पंप, मकान व दस-बारह दुकान भी बनवा ली गई। इसकी पोल तब खुली जब तहसील कोल की टीम जांच के लिए पहुंची। टीम को देखकर इस गोरखधंधे में शामिल लोग मौके से फरार हो गए। टीम भूमि की पैमाइश में जुटी हुई है।
प्रशासन ने महानगर में जाम का कारण बनी प्राइवेट बसों के महानगर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद महानगर के बाहरी इलाकों में तीन स्थानों पर बसें संचालित करने के लिए अड्डे बनाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही महानगर में वर्षों से चल रहे प्राइवेट बस अड्डों को हटाने की कवायद भी शुरू हो गई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम कोल जोगिंदर सिंह ने बताया कि सोमवार को छर्रा अड्डे की जांच की गई तो पता चला कि बस आपरेटरों ने वर्ष 1990 में वक्फ बोर्ड से करीब 580 वर्ग मीटर जमीन का किरायानामा बनवाया था। लेकिन उक्त जमीन में ग्राम समाज की करीब 17 हजार वर्ग मीटर जमीन को अवैध रूप से शामिल कर उसे छर्रा अड्डा के नाम से विकसित कर दिया गया।
इन लोगों ने बस अड्डा ही नहीं एक पेट्रोल पंप, दस-बारह दुकानें एवं एक मकान भी उसी सरकारी भूमि पर बना लिया। पूछताछ में पता चला है कि यह लोग अवैध रूप से वाहनों से वसूली का काम भी करते थे। इस जमीन की पैमाइश करायी जा रही है। जांच की जिम्मेदारी तहसीलदार कोल गौतम सिंह को दी गई है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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दस वर्ष तक था किरायानामा वैध, परंतु...
एसडीएम कोल ने बताया कि नियमानुसार किरायानामा दस वर्ष तक ही वैलेड होता है। इसके बाद उसका रिनुअल कराया जा सकता है। बिना रिनुअल के वह दस वर्ष बाद स्वत: ही समाप्त माना जाता है। जांच को पहुंची तहसील की टीम को देखकर बस अड्डे का संचालन करने वाले लोग तो भाग गए, लेकिन मौके पर मिले वक्फ बोर्ड के मुतवल्ली ने पूछताछ में स्वीकार किया कि अड्डा संचालकों ने किरायेनामे का कभी रिनुअल नहीं कराया और दबंगई से बस अड्डा संचालित कर रहे थे।
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वक्फ बोर्ड से वर्ष 1990 में किरायानामा बनवाकर करोड़ों रुपये मूल्य की 14 बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे छर्रा अड्डा के रूप में संचालित करने का मामला प्रकाश में आया है। यह कारनामा किया है बस माफिया ने। अब तक हुई जांच में पता चला है कि न केवल फर्जी तरीके से बस अड्डा बनवाया गया, बल्कि एक पेट्रोल पंप, मकान व दस-बारह दुकान भी बनवा ली गई। इसकी पोल तब खुली जब तहसील कोल की टीम जांच के लिए पहुंची। टीम को देखकर इस गोरखधंधे में शामिल लोग मौके से फरार हो गए। टीम भूमि की पैमाइश में जुटी हुई है।
प्रशासन ने महानगर में जाम का कारण बनी प्राइवेट बसों के महानगर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद महानगर के बाहरी इलाकों में तीन स्थानों पर बसें संचालित करने के लिए अड्डे बनाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही महानगर में वर्षों से चल रहे प्राइवेट बस अड्डों को हटाने की कवायद भी शुरू हो गई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम कोल जोगिंदर सिंह ने बताया कि सोमवार को छर्रा अड्डे की जांच की गई तो पता चला कि बस आपरेटरों ने वर्ष 1990 में वक्फ बोर्ड से करीब 580 वर्ग मीटर जमीन का किरायानामा बनवाया था। लेकिन उक्त जमीन में ग्राम समाज की करीब 17 हजार वर्ग मीटर जमीन को अवैध रूप से शामिल कर उसे छर्रा अड्डा के नाम से विकसित कर दिया गया।
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इन लोगों ने बस अड्डा ही नहीं एक पेट्रोल पंप, दस-बारह दुकानें एवं एक मकान भी उसी सरकारी भूमि पर बना लिया। पूछताछ में पता चला है कि यह लोग अवैध रूप से वाहनों से वसूली का काम भी करते थे। इस जमीन की पैमाइश करायी जा रही है। जांच की जिम्मेदारी तहसीलदार कोल गौतम सिंह को दी गई है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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दस वर्ष तक था किरायानामा वैध, परंतु...
एसडीएम कोल ने बताया कि नियमानुसार किरायानामा दस वर्ष तक ही वैलेड होता है। इसके बाद उसका रिनुअल कराया जा सकता है। बिना रिनुअल के वह दस वर्ष बाद स्वत: ही समाप्त माना जाता है। जांच को पहुंची तहसील की टीम को देखकर बस अड्डे का संचालन करने वाले लोग तो भाग गए, लेकिन मौके पर मिले वक्फ बोर्ड के मुतवल्ली ने पूछताछ में स्वीकार किया कि अड्डा संचालकों ने किरायेनामे का कभी रिनुअल नहीं कराया और दबंगई से बस अड्डा संचालित कर रहे थे।