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हाईकोर्ट जाएंगे पूर्व मंत्री ख्वाजा हलीम के परिजन
Updated Sun, 05 Aug 2018 02:12 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
पूर्व कबीना मंत्री स्व. ख्वाजा हलीम के परिजनों ने ख्वाजा फाउंडेशन चेरीटेबिल ट्रस्ट की जमीन को ग्राम पंचायत की जमीन से अदला बदली करने को नाजायज ठहराए जाने के मामले में मंडलायुक्त की अदालत में जाने का फैसला किया है। जल्द ही अपील की जाएगी। पूर्व मंत्री की पत्नी नसरीन हलीम और उनके बेटे ख्वाजा जिबरान हसन ने बताया कि मंडलायुक्त की अदालत में जाने के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसकी अपील करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं से रायशुमारी की जा रही है।
सभी की राय से मामले में इंसाफ की लड़ाई लड़ेंगे। अलीगढ़ में हुई प्रशासनिक कार्रवाई एकतरफा है। अगर जमीन की अदला बदली गलत थी तो संबंधित अधिकारियों ने कैसे होने दिया। उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई..?
शनिवार को पूर्व कबीना मंत्री के आवास पर पहुंचे सपा महानगर अध्यक्ष सैयद जावेद अजीज, पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इसहाक, बसपा नेता एवं पूर्व विधायक कोल हाजी जमीरउल्लाह ने कहा कि वो ट्रस्ट के हकों की हिमायत में हर तरह की मदद के लिए तैयार हैं। जिससे एक इल्म इदारा मुकम्मल रहे।
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नेताओं ने ख्वाजा जिबरान को भरोसा दिलाया कि मंडलायुक्त की अदालत से इलाहाबाद हाईकोर्ट तक वह हर कदम पर साथ हैं। नेताओं ने ये भी कहा कि भाजपा सरकार में जानबूझ कर सपा नेताओं को परेशान किया जा रहा है।
यह है मामला
लाल डिग्गी निवासी पूर्व कबीना मंत्री ख्वाजा हलीम द्वारा स्थापित ख्वाजा फाउंडेशन चेरीटेबिल ट्रस्ट ने शहर से सटे गांव छेरत सुढ़ियाल में 1.52 हेक्टेयर जमीन दो अलग-अलग गाटा (186) व (250) में खरीदी थी। वर्ष 2003 में उन्होंने एमएलसी रहते हुए पड़ोसी गांव पंचायत चंदौखा में चार अलग-अलग गाटा संख्या 205, 209, 212 व 214 की 1.53 हेक्टेयर ऊसर भूमि से इस भूमि को बदलने का प्रस्ताव ग्राम सभा में रखा था। इसे मंजूरी मिल गई।
जुलाई 2003 में तत्कालीन एसडीएम आईबी सिंह ने दो ग्राम पंचायतों की जमीन के आपस में स्थानांतरण को गलत ठहराते हुए स्थानांतरण प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। नए एसडीएम सूबेदार सिंह ने दिसंबर 2003 में नया आदेश जारी कर स्थानांतरण प्रस्ताव को मंजूर दे दी। उनका तर्क था कि दोनों जमीनों के मूल्य में दस फीसदी का अंतर नहीं है। गांव में कालेज बनने पर ग्राम सभा का विकास ही होगा। इसके बाद यहां अलीगढ़ टीचर्स ट्रेनिंग कालेज खुल गया। इसी मामले में एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा की अदालत में केस चल रहा था जिसमें जमीन का विनमय गलत ठहराते हुए जमीन कब्जा मुक्त कराई गई है।
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पूर्व कबीना मंत्री स्व. ख्वाजा हलीम के परिजनों ने ख्वाजा फाउंडेशन चेरीटेबिल ट्रस्ट की जमीन को ग्राम पंचायत की जमीन से अदला बदली करने को नाजायज ठहराए जाने के मामले में मंडलायुक्त की अदालत में जाने का फैसला किया है। जल्द ही अपील की जाएगी। पूर्व मंत्री की पत्नी नसरीन हलीम और उनके बेटे ख्वाजा जिबरान हसन ने बताया कि मंडलायुक्त की अदालत में जाने के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसकी अपील करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं से रायशुमारी की जा रही है।
सभी की राय से मामले में इंसाफ की लड़ाई लड़ेंगे। अलीगढ़ में हुई प्रशासनिक कार्रवाई एकतरफा है। अगर जमीन की अदला बदली गलत थी तो संबंधित अधिकारियों ने कैसे होने दिया। उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई..?
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शनिवार को पूर्व कबीना मंत्री के आवास पर पहुंचे सपा महानगर अध्यक्ष सैयद जावेद अजीज, पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इसहाक, बसपा नेता एवं पूर्व विधायक कोल हाजी जमीरउल्लाह ने कहा कि वो ट्रस्ट के हकों की हिमायत में हर तरह की मदद के लिए तैयार हैं। जिससे एक इल्म इदारा मुकम्मल रहे।
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नेताओं ने ख्वाजा जिबरान को भरोसा दिलाया कि मंडलायुक्त की अदालत से इलाहाबाद हाईकोर्ट तक वह हर कदम पर साथ हैं। नेताओं ने ये भी कहा कि भाजपा सरकार में जानबूझ कर सपा नेताओं को परेशान किया जा रहा है।
यह है मामला
लाल डिग्गी निवासी पूर्व कबीना मंत्री ख्वाजा हलीम द्वारा स्थापित ख्वाजा फाउंडेशन चेरीटेबिल ट्रस्ट ने शहर से सटे गांव छेरत सुढ़ियाल में 1.52 हेक्टेयर जमीन दो अलग-अलग गाटा (186) व (250) में खरीदी थी। वर्ष 2003 में उन्होंने एमएलसी रहते हुए पड़ोसी गांव पंचायत चंदौखा में चार अलग-अलग गाटा संख्या 205, 209, 212 व 214 की 1.53 हेक्टेयर ऊसर भूमि से इस भूमि को बदलने का प्रस्ताव ग्राम सभा में रखा था। इसे मंजूरी मिल गई।
जुलाई 2003 में तत्कालीन एसडीएम आईबी सिंह ने दो ग्राम पंचायतों की जमीन के आपस में स्थानांतरण को गलत ठहराते हुए स्थानांतरण प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। नए एसडीएम सूबेदार सिंह ने दिसंबर 2003 में नया आदेश जारी कर स्थानांतरण प्रस्ताव को मंजूर दे दी। उनका तर्क था कि दोनों जमीनों के मूल्य में दस फीसदी का अंतर नहीं है। गांव में कालेज बनने पर ग्राम सभा का विकास ही होगा। इसके बाद यहां अलीगढ़ टीचर्स ट्रेनिंग कालेज खुल गया। इसी मामले में एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा की अदालत में केस चल रहा था जिसमें जमीन का विनमय गलत ठहराते हुए जमीन कब्जा मुक्त कराई गई है।