फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   अब नहीं छिप सकेगा लेनदेन,

अब नहीं छिप सकेगा लेनदेन,

Sat, 21 Apr 2018 02:44 AM IST
Updated Sat, 21 Apr 2018 02:44 AM IST
विज्ञापन
अब नहीं छिप सकेगा लेनदेन,
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
विज्ञापन


आयकर रिटर्न भरने से पहले आप अपने बैंक खातों, म्यूचुअल फंड, सावधि जमा, अन्य जमा योजनाओं, बीमा, आयकर की धारा 80 के तहत मिलने वाले लाभ, 80 सी के तहत हुए निवेश सहित सभी सूचनाएं एकत्र कर लें। इसके बाद ही रिटर्न भरें।

अगर आपको कहीं भ्रम होता है तो आयकर विभाग की हेल्प डेस्क से रायशुमारी कर सकते हैं। आप अपने अधिवक्ता से भी रायशुमारी कर सकते हैं क्योंकि अगर आपकी सूचनाएं आयकर विभाग को मिलने वाली सूचनाओं से नहीं मिलीं तो आप छह साल तक कभी जांच के दायरे में आ सकते हैं। आयकर विभाग 13 ठिकानों से हर तरह की सूचनाएं ले रहा है।
विज्ञापन


26 एएस सिस्टम पकडे़गा झूठी सूचना
गुजरी 22 फरवरी को आयकर विभाग की ओर से सेेंट्रलाइज्ड कम्यूनिकेशन स्कीम 2018 लांच की गई है। इस स्कीम के तहत आयकर विभाग के लिए अलग-अलग स्थानों पर कम्युनिकेशन सेल काम करेंगे। यहां के अफसर आयकर दाता के द्वारा रिटर्न में दी गई जानकारी को 26 एएस सिस्टम से मिलान कराएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


अगर उस सिस्टम में दी गई सूचनाएं रिटर्न में भरी गई सूचनाओं के अनुसार ठीक हैं तो रिटर्न को सही माना जाएगा। अगर 26 एएस में दी गई सूचना रिटर्न की सूचना से अलग है तो संबंधित करदाता को नोटिस जाएगा। नोटिस के बाद आगे पेनाल्टी और टैक्स वसूली की कार्रवाई विभागीय स्तर से होगी।

26 एएस सिस्टम क्या है..?
आयकर दाताओं के पैन कार्ड नंबर को रजिस्ट्री कार्यालय, बैंक, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड, महंगी कार के लेन देन सहित कई जगहों पर अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में करदाता जैसे ही उक्त में से कोई काम करता है उसकी सूचना आयकर विभाग के 26 एएस सिस्टम में आ जाती है।

अब अगर करदाता ने रिटर्न में इसकी जानकारी नहीं दी है तो वह साफ्टवेयर के माध्यम से पकड़ लिया जाएगा। यह एक तरह से करदाता का पैनकार्ड नंबर बेस एक लेजर है। इसको इन्कम टैक्स एकाउंट स्टेटमेंट नाम से भी जाना जाता है।

पहले विभागीय स्तर पर रेंडम चेकिंग होती थी
वित्तीय वर्ष 2017-18 से पहले जो भी आयकर दाता अपना रिटर्न जमा करते थे, उनमें से कुछ के ही रिटर्न रेंडम चेकिंग के लिए तय किए जाते थे कि करदाता ने सही सूचना दी है अथवा नहीं।

इसमें बड़ी संख्या में झूठी सूचना देने वाले बच जाते थे। अब आयकर विभाग ने करदाताओं को ही सही सूचना देने के लिए जिम्मेदार बना दिया है। सूचना गलत हुई तो छह साल तक कभी भी रिटर्न की चेकिंग के बाद सवाल जवाब हो सकता है।

आयकर दाता ध्यान दें
1-नौकरीपेशा, पैतृक संपत्ति से आय और बैंक की ब्याज से जिनको सालाना 50 लाख रुपये तक की आय होती है, उनको आयकर रिटर्न जमा करने के लिए आईटीआर वन यानी सहज फार्म भरना है।

2-वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए आयकर रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2018 तय है। इसमें बाद रिटर्न जमा करने पर 5 से 10 हजार रुपये की लेट फीस देनी होगी।

3-अगर 31 जुलाई के बाद 31 दिसंबर 2018 तक रिटर्न जमा करेंगे तो उनको 5 हजार रुपये फीस देनी होगी। इसके बाद 31 मार्च 2019 तक जमा करेंगे तो 10 हजार फीस लगेगी।

4-नौकरीपेशा कर मुक्त भत्तों और क रमुक्त सुविधाओं की जानकारी नहीं देते थे। अब उनको करमुक्त भत्तों और कर मुक्त सभी सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। करमुक्त भत्तों में मकान, मेडिकल रिंबरसमेंट, बच्चों की स्कूल फीस या पढ़ाई का भत्ता आदि शामिल है। इसी तरह से करमुक्त सुविधाओं की जानकारी देनी होगी।

5-धारा 80 सी के तहत बीमा, मेडिकल बीमा के तहत खर्च बता कर वास्तविकता में खर्च नहीं करने पर भी पकड़ा जा सकता है, क्योंकि संबंधित बीमा कंपनी, मेडिकल बीमा कंपनी आपकी पूरी सूचना आयकर विभाग को दे रही है।

6-अगर वित्तीय वर्ष के बीच में करदाता ने पहली कंपनी छोड़ कर दूसरी कंपनी पकड़ ली। और उसने पहली कंपनी की आय नहीं दिखाई तो उसको भी पकड़ा जा सकता है। इसलिए नियमानुसार पूरी सूचना दें।

7-अगर करदाता ने किसी व्यक्ति, संस्था या आयोजक ग्रुप का काम कर भुगतान प्राप्त किया है तो संबंधित काम देने वाली कंपनी को भुगतान का टीडीएस काटना होगा। इसमें करदाता टीडीएस के लिए जिम्मेदार नहीं हैै।

8-कुछ कंपनियां लोगों को नौकरी पर न रख कर अलग-अलग काम के लिए भुगतान करती हैं। उनकी सूचना भी मिलान की जाएगी। करदाता को सही सूचना देनी होगी।

9-फर्जी खर्चे दिखा कर रिफंड का लाभ लेने वाले भी जांच के दायरे में आएंगे और रिफंड क्लेम गलत निकलने पर रिफंड, पेनाल्टी और टैक्स वसूली होगी।

10-नौकरीपेशा को अपने बचत खाते का ब्याज, एफडीआर से आय, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड आदि से होने वाली पूरी साल की आय की जानकारी देनी होगी। सूचना नहीं देने पर मिलान में पकड़े जाने पर कार्यवाही तय है।

11-मकान के किराए के नाम पर आयकर से छूट प्राप्त करने वालों पर भी पैनी नजर है। अगर वो हकीकत में किराए का भुगतान नहीं कर रहे हैं। उनके बैंक खातों से भुगतान नहीं दिख रहा है तो कार्रवाई होगी।

आयकर दाता को अबकी बार अपना रिटर्न ध्यान से भरना होगा क्योंकि गलत सूचना देने पर विभागीय स्तर से सख्त कार्रवाई हो सकती है। पेनाल्टी के साथ टैक्स भी देना होगा। झूठी सूचनाओं पर रिफंड लेने वाले भी कार्रवाई की जद में आएंगे।

-अवन कुमार सिंह, पूर्व अध्यक्ष सीए एसोसिएशन।

आयकर विभाग की हेल्प डेस्क से सूचना ले सकते हैं। इसके अलावा अपने अधिवक्ता को हर सूचना सही बताएं तो रिटर्न सही जमा होगा, कोई दिक्कत नहीं होगी। सूचनाएं छिपाने से ही परेशानी होती है।
-अभिषेक गुप्ता, आयकर अधिवक्ता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed