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आलू समर्थन मूल्य के नाम पर किसानों से मजाक

Sat, 10 Mar 2018 01:48 AM IST
Updated Sat, 10 Mar 2018 01:48 AM IST
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आलू समर्थन मूल्य के नाम पर किसानों से मजाक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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भले ही आलू की पैदावार में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है, लेकिन इस बार तेजी पकड़ रहे आलू के दामों के चलते उम्मीद जताई जा रही है कि पिछले साल कम दामों के चलते खून के आंसू रोया किसान इस सीजन में भरपाई कर लेगा।

इस सबके बीच किसानों के साथ सरकारी स्तर पर मजाक जारी है। सरकार ने किसानों के लिए खोले जाने वाले आलू क्रय केंद्रों पर आलू का जो समर्थन मूल्य घोषित किया है वह मंडी के भावों का लगभग आधा है। ऐसे में क्रय केंद्रों पर खरीद लक्ष्य कोसों दूर रह जाने के पूरे पूरे आसार हैं।
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इस सीजन में पिछले साल से कम 7 लाख 20 हजार मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई है, लेकिन इस बार मंडी में आलू की वैरायटी 3797 एवं चिपसोना के रेट 850 से 900 रुपये क्विंटल चल रहे हैं।
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क्रय केंद्रों पर आलू का समर्थन मूल्य 549 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है, जबकि खरीद लक्ष्य 15 हजार मीट्रिक टन का है। रेटों में दोगुने अंतर के चलते क्रय केंद्रों पर खरीद लक्ष्य पाना भी दूर की कौड़ी लग रहा है।

उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ के आरएम शील रतन आनंद ने स्वीकार किया कि मंडी में दोगुने रेट होने के चलते खरीद लक्ष्य पाना मुश्किल लग रहा है।

पिछले साल फिंका-फिंका डोला था आलू
पिछले साल जनपद में आलू की पैदावार का रकवा 27 हजार हेक्टेयर था, लेकिन बंपर पैदावार के चलते यहां 7 लाख 26 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था। लेकिन कम रेटों के चलते पूरे साल किसान खून के आंसू रोता रहा और क्रय केंद्र से लेकर अन्य सरकारी प्रयास नाकाम साबित हुए। यहां तक कि किसानों के दूसरे राज्यों में आलू बेचने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लागू योजना भी फ्लाप रही। योजना के प्रावधानों में जटिलता के चलते किसी किसान ने रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया। इसके चलते कुल उत्पादन का 20 से 30 फीसदी आलू फिंका-फिंका डोला।

अब तक खुले तक नहीं हैं तीन आलू क्रय केंद्र
सरकार आलू खरीद के प्रति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा समर्थन मूल्य ही नहीं खरीद केंद्रों की स्थिति से भी लगाया जा सकता है। जिले में धनीपुर, इगलास, अतरौली एवं खैर तहसील में एक-एक आलू क्रय केंद्र खुलने हैं। केंद्र खोलने के लिए जिम्मेदार उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ के आरएम शील रतन आनंद ने स्वीकार किया कि स्टाफ की कमी के चलते गुरुवार को मात्र धनीपुर में क्रय केंद्र खुला है। स्टाफ आते ही अन्य केंद्र भी खुलवा दिए जाएंगे।


हम क्यों जाएं क्रय केंद्र। जब मंडी में आलू के दोगुने रेट मिल रहे हैं। क्रय केंद्र वालों को 3797 एवं चिपसोना चाहिए। वह भी बेहतरीन क्वालिटी का। जबकि मंडी में बोरे के हिसाब से बगैर छंटाई दोगुने दाम मिल रहे हैं।
किसान मान पाल सिंह, गांव नारौली

-मंडी में अच्छे दाम मिलने से पिछले साल का घाटा कुछ हद तक पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन सरकार समर्थन मूल्य के नाम पर किसानों से मजाक ही कर रही है।
किसान किशन पाल सिंह, गांव अहमदपुरा
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