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अखबार छपते देखना सुखद अनुभव
Updated Sun, 18 Mar 2018 02:07 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अल बरकात कॉलेज ऑफ ग्रेजुएट स्टडीज के बीबीए के छात्र-छात्राओं का अखबार छपते देखना सुखद अनुभव रहा। इन्होंने पहली बार अखबार छपते देखा और अखबार की दुनिया को समझने का यह पहला मौका था।
शनिवार को तालानगरी स्थित अमर उजाला कार्यालय में आए बीबीए के छात्र-छात्राओं को सबसे पहले उन्हें अमर उजाला की शॉर्ट मूवी दिखाई गई।
इस मूवी में संपादक और रिपोर्टर की मीटिंग, रिपोर्टिंग, संपादन, पेज डिजाइन से लेकर अखबार छपने और उसे पाठकों तक पहुंचाने की सभी प्रक्रिया दिखाई गईं।
इसके बाद स्टूडेंट ने सवाल भी पूछे। उनके हर सवालों का संतोषजनक जवाब दिया गया। स्टूडेंट उजमा मनाल ने कहा कि अमर उजाला में क्राइम खबरें इसलिए अच्छी रहती हैं कि उनमें गहराई होती है।
इरम राशिद ने कहा कि जो खबरें लड़कियों और महिलाओं से जुड़ी होती हैं, उन्हें सही प्लेसमेंट मिलना चाहिए, ताकि समाज में जागरूकता आए। निदा परवेज का कहना है कि मैं जितना आसान समझती थी, उतना नहीं है। यह यहां आकर पता चला। स्टूडेंट के साथ शिक्षक डॉ. आगा नुरुज्जमा, रिजवान खान, शाइना बीटी व अब्दुल माजिद थे।
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अल बरकात कॉलेज ऑफ ग्रेजुएट स्टडीज के बीबीए के छात्र-छात्राओं का अखबार छपते देखना सुखद अनुभव रहा। इन्होंने पहली बार अखबार छपते देखा और अखबार की दुनिया को समझने का यह पहला मौका था।
शनिवार को तालानगरी स्थित अमर उजाला कार्यालय में आए बीबीए के छात्र-छात्राओं को सबसे पहले उन्हें अमर उजाला की शॉर्ट मूवी दिखाई गई।
इस मूवी में संपादक और रिपोर्टर की मीटिंग, रिपोर्टिंग, संपादन, पेज डिजाइन से लेकर अखबार छपने और उसे पाठकों तक पहुंचाने की सभी प्रक्रिया दिखाई गईं।
इसके बाद स्टूडेंट ने सवाल भी पूछे। उनके हर सवालों का संतोषजनक जवाब दिया गया। स्टूडेंट उजमा मनाल ने कहा कि अमर उजाला में क्राइम खबरें इसलिए अच्छी रहती हैं कि उनमें गहराई होती है।
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इरम राशिद ने कहा कि जो खबरें लड़कियों और महिलाओं से जुड़ी होती हैं, उन्हें सही प्लेसमेंट मिलना चाहिए, ताकि समाज में जागरूकता आए। निदा परवेज का कहना है कि मैं जितना आसान समझती थी, उतना नहीं है। यह यहां आकर पता चला। स्टूडेंट के साथ शिक्षक डॉ. आगा नुरुज्जमा, रिजवान खान, शाइना बीटी व अब्दुल माजिद थे।
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