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अलीगढ़... हंसते हुए बहनें आईं, रोते हुए हुई विदाई
Updated Sun, 22 Oct 2017 01:38 AM IST
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हंसते हुए बहनें आईं, रोते हुए हुई विदाई
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
भाईदूज के पवित्र पर्व पर शनिवार को जिला कारागार में बहनों की भीड़ उमड़ी। यहां का नजारा बेहद भावुक था। बहनें हंसते खिलखिलाते चेहरों के साथ भाइयों से मिलने पहुंचीं और टीका किया। इसके बाद जब विदाई का वक्त आया तो उनकी आंखों के आंसू थे। कुछ भाइयों की आंखें भी नम हो गईं।
दिनभर में 2229 बहनें भाइयों को टीका करने पहुंचीं। इस बार बाहर से मिठाई लाने पर रोक थी। जेल के अंदर ही मिठाई का इंतजाम किया गया था।
शुक्रवार से ही त्योहार को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से खासे इंतजाम किए गए थे। बिना पर्ची के बहनों की भाइयों से मुलाकात की व्यवस्था थी। सुरक्षा के लिहाज से जेल के गेट पर चेकिंग की गई। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक जेल में शिफ्टों में मुलाकात कराई गई।
जेलर आवास से ही जेल को जाने वाली बहनों की एंट्री रोक दी गई थी। वहां से एक बार में आठ-आठ मुलाकातियों को जेल में भेजा जा रहा था। इस दौरान वरिष्ठ अधीक्षक आलोक सिंह, जेलर श्रीप्रकाश त्रिपाठी व उनकी पूरी टीम व्यवस्थाओं में लगी रही।
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116 बहनों से कोई नहीं आया मिलने
जिला कारागार में महिला बैरक में 134 महिला बंदी हैं। इनमें मिलने मात्र 18 भाई ही आए। बाकी राह तकती रह गईं। इनसे जेल अधिकारियों और अन्य स्टाफ ने टीका कराया।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
भाईदूज के पवित्र पर्व पर शनिवार को जिला कारागार में बहनों की भीड़ उमड़ी। यहां का नजारा बेहद भावुक था। बहनें हंसते खिलखिलाते चेहरों के साथ भाइयों से मिलने पहुंचीं और टीका किया। इसके बाद जब विदाई का वक्त आया तो उनकी आंखों के आंसू थे। कुछ भाइयों की आंखें भी नम हो गईं।
दिनभर में 2229 बहनें भाइयों को टीका करने पहुंचीं। इस बार बाहर से मिठाई लाने पर रोक थी। जेल के अंदर ही मिठाई का इंतजाम किया गया था।
शुक्रवार से ही त्योहार को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से खासे इंतजाम किए गए थे। बिना पर्ची के बहनों की भाइयों से मुलाकात की व्यवस्था थी। सुरक्षा के लिहाज से जेल के गेट पर चेकिंग की गई। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक जेल में शिफ्टों में मुलाकात कराई गई।
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जेलर आवास से ही जेल को जाने वाली बहनों की एंट्री रोक दी गई थी। वहां से एक बार में आठ-आठ मुलाकातियों को जेल में भेजा जा रहा था। इस दौरान वरिष्ठ अधीक्षक आलोक सिंह, जेलर श्रीप्रकाश त्रिपाठी व उनकी पूरी टीम व्यवस्थाओं में लगी रही।
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116 बहनों से कोई नहीं आया मिलने
जिला कारागार में महिला बैरक में 134 महिला बंदी हैं। इनमें मिलने मात्र 18 भाई ही आए। बाकी राह तकती रह गईं। इनसे जेल अधिकारियों और अन्य स्टाफ ने टीका कराया।