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बिना वेतन कर रहा नौकरी
Updated Wed, 21 Jun 2017 01:23 AM IST
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बगैर वेतन कर रहा स्वास्थ्य विभाग की सेवा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
मोहन लाल गौतम महिला चिकित्सालय में एक कर्मचारी करीब 11 महीने से बगैर वेतन के काम कर रहा है। सीएमओ के स्तर से इस कर्मचारी को अन्य स्थान के लिए रिलीव भी कर दिया गया है।
हालांकि जिलाधिकारी ने कार्य प्रभावित होने के चलते महिला अस्पताल में तैनात इस कर्मचारी का स्थानांतरण रोक रखा है। 14 फरवरी 2017 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मोहन लाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय की सीएमएस को पत्र भेजकर सहायक शोध अधिकारी प्रताप सिंह को कार्यमुक्त करने के लिए कहा गया।
उनका स्थानांतरण मैनपुरी के लिए कर दिया गया। पत्र में जिक्र किया गया है कि सीएमएस के स्तर से इनको कार्यमुक्त नहीं किया गया है। इसलिए इन्हें एक तरफा कार्यमुक्त समझा जाएगा।
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पूरे प्रकरण में अपर निदेशक स्वास्थ्य और अस्पताल की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं कि प्रताप सिंह मैनपुरी गए तो वहां पर तैनात कर्मचारी ने वहां चार्ज छोड़ने से मना कर दिया।
इस पर वापस आ गए। उनके चले जाने से यहां पर कोल्ड चेन, टीकाकरण, पोलियो आदि का काम प्रभावित होता। इनका यहां पर कोई विकल्प नहीं है, इसलिए जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया और उनके निर्देश पर इनका स्थानांतरण रोक दिया गया।
हालांकि उनका वेतन सीएमओ स्तर से मिलना है जो नहीं मिल रहा है। अदालत का भी फैसला है कि छह महीने के बाद स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर वह स्वयं ही निरस्त हो जाती है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
मोहन लाल गौतम महिला चिकित्सालय में एक कर्मचारी करीब 11 महीने से बगैर वेतन के काम कर रहा है। सीएमओ के स्तर से इस कर्मचारी को अन्य स्थान के लिए रिलीव भी कर दिया गया है।
हालांकि जिलाधिकारी ने कार्य प्रभावित होने के चलते महिला अस्पताल में तैनात इस कर्मचारी का स्थानांतरण रोक रखा है। 14 फरवरी 2017 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मोहन लाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय की सीएमएस को पत्र भेजकर सहायक शोध अधिकारी प्रताप सिंह को कार्यमुक्त करने के लिए कहा गया।
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उनका स्थानांतरण मैनपुरी के लिए कर दिया गया। पत्र में जिक्र किया गया है कि सीएमएस के स्तर से इनको कार्यमुक्त नहीं किया गया है। इसलिए इन्हें एक तरफा कार्यमुक्त समझा जाएगा।
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पूरे प्रकरण में अपर निदेशक स्वास्थ्य और अस्पताल की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं कि प्रताप सिंह मैनपुरी गए तो वहां पर तैनात कर्मचारी ने वहां चार्ज छोड़ने से मना कर दिया।
इस पर वापस आ गए। उनके चले जाने से यहां पर कोल्ड चेन, टीकाकरण, पोलियो आदि का काम प्रभावित होता। इनका यहां पर कोई विकल्प नहीं है, इसलिए जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया और उनके निर्देश पर इनका स्थानांतरण रोक दिया गया।
हालांकि उनका वेतन सीएमओ स्तर से मिलना है जो नहीं मिल रहा है। अदालत का भी फैसला है कि छह महीने के बाद स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर वह स्वयं ही निरस्त हो जाती है।