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7 हजार रुपये रोजाना की बिक्री करने वाले आएंगे जीएसटी की जद में ..?

Mon, 03 Jul 2017 12:50 AM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Mon, 03 Jul 2017 12:50 AM IST
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7000 rupees daily sales will come in GST of JST?
जीएसटी - फोटो : SELF
जीएसटी में 20 लाख रुपये सालाना की बिक्री करने वाले दुकानदारों को टैक्स दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन बेहद गहनता से दुकानदारों की बिक्री की जांच हुई तो 20 लाख रुपये का दायरा बहुत छोटा हो जाएगा। क्योंकि रोजाना सात हजार रुपये की दुकानदारी करने वाले दुकानदार भी एक साल में 20 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर जाते हैं।
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वो भी तब जब एक साल के 365 दिन में इनकी दुकान केवल 300 दिन ही खुले। 300 दिन तक हर रोज सात हजार की औसत बिक्री हुई तो ये रकम एक साल में 21 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। ऐसे में पूड़ी कचौड़ी, पान मसाला, जनरल स्टोर, ढाबा संचालक, रेस्टोरेंट, चाट पकौड़ी सहित छोटे स्तर के अधिकांश दुकानदार इस दायरे में आ जाएंगे। छोटे दुकानदारों की चिंता का बड़ा सबब ये भी है।
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वहीं टैक्स दायरे में पहले से ही मौजूद दुकानदार लगातार इसका दबाव बना रहे हैं कि अगर वो टैक्स दे रहे हैं तो दूसरों को भी बख्शा न जाए। अगर नियमानुसार अब तक कोई टैक्स नहीं देने वालों की बिक्री 21 लाख रुपये सालाना से ज्यादा है तो उनको भी जीएसटी में शामिल किया जाएगा, ताकि सरकारी राजस्व बढ़ सके और ग्राहकों के प्रति दुकानदारों की जवाबदेही भी तय हो। एक प्रमुख रेस्टोरेंट संचालक का दर्द ये है कि उनके यहां बिकने वाले सभी आइटमों पर कर देय है।
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वह सालों से कर दे रहे हैं, लेकिन मेडिकल रोड, दोदपुर, सराय सुल्तानी, जयगंज, जमालपुर, सासनीगेट, आगरा रोड सहित सभी हाईवे पर दर्जनों की संख्या में संचालित ढाबे और रेस्टोरेंट रोजाना हजारों रुपये की बिक्री करने के बाद किसी तरह का कोई टैक्स नहीं दे रहे। अगर यही स्थिति बनी रही तो टैक्स देने वालों को मायूसी होगी और कर चोरी करने वाले मजा मारेंगे..।  

अभी तक शासन स्तर से फुटकर दुकानदारों की बिक्री की मानीटरिंग करने का निर्देश तो नहीं मिला है, लेकिन अगर फुटकर दुकानदार ज्यादा मात्रा में सामान खरीदते हैं तो उसका नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित खरीदी गई वस्तुओं का पूरा रिकार्ड थोक विक्रेता को रखना होगा। थोक विक्रेता संबंधित फुटकर दुकानदार से उसका जीएसटी नंबर भी मांगेगा। अगर फुटकर दुकानदार जीएसटी नंबर नहीं देता है। तो उक्त नाम पता ही एक रिकार्ड माना जाएगा। जब कभी शासन से फुटकर दुकानदारों की बिक्री का सर्वे करने का निर्देश आएगा तो थोक वालाें के इस रिकार्ड को आधार मान कर बड़ी सेल करने वाले फुटकर दुकानदार को चिन्हित किया जा सकेगा। अभी ऐसे दुकानदारों को जागरूक किया जा रहा है कि वह जीएसटी नंबर लेकर कारोबार करें, जिससे उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। 

-एके जैन, एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर 

हम ज्यादा से ज्यादा कार्यशालाएं कर थोक और फुटकर दुकानदारों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसमें दुकानदारों का ही फायदा है। वह आराम से अपने कारोबार को बढ़ा सकते हैं और उन्हें जीएसटी में मिलने वाली सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा। जीएसटी रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़ाने के लिए भी विभागीय स्तर पर सभी प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे टैक्स देने वालों का दायरा बढ़ाया जा सके। जीएसटी में सालाना 20 लाख रुपये तक का कारोबार करने वालों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं है, लेकिन अगर बिक्री इससे ज्यादा है तो उसको छिपाया नहीं जा सकेगा। छिपाने वाले कार्रवाई की जद में आ जाएंगे। 
-आरएस विद्यार्थी, जीएसटी नोडल अधिकारी 
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