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अलीगढ़: एएमयू में रोजाना 6.50 लाख लीटर गंदा पानी हो रहा साफ

Fri, 10 Feb 2023 02:12 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Feb 2023 02:12 AM IST
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6.50 lakh liters of dirty water is being cleaned in AMU
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में रोजाना 6.50 लाख लीटर गंदा पानी वेट्सलैंड तकनीक से साफ हो रहा है। परिसर में हॉस्टल और कॉलोनी में 60 लाख लीटर रोजाना इस्तेमाल होता है। वेट्सलैंड तकनीक से बिना किसी के खर्च के पानी साफ किया जा रहा है। बाकी पानी को पुरानी तकनीक से साफ किया जाता है।
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एएमयू के सिविल इंजीनियिरिंग विभाग के प्रोफेसर नदीम खलील ने बताया कि भारत सरकार और यूरोपियन देशों के बीच गंदे पानी को साफ करने का करार हुआ था। वर्ष 2013-2018 तक चले शोध के बाद अच्छे नतीजे सामने आए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने कहा था कि गंदे पानी को पर्यावरण के अनुकूल साफ किया जाए। इसमें लागत भी कम आए और देखरेख न के बराबर हो। साथ ही पर्यावरण को इससे कोई नुकसान न हो। भारत सरकार की मंशा को समझकर स्विंग्स परियोजना के तहत शोध शुरू हुआ।
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एएमयू में लगाई वेट्सलैंड
प्रो. नदीम ने बताया कि एएमयू में 50 गुणा 20 मीटर लंबाई और चौड़ाई की वेट्सलैंड लगाई गई, जिसे फिल्टर बेड कहते हैं। यह डेढ़ मीटर गहरी है, जिसमें बालू और गिट्टी डाली गई है। एक खास किस्म के तीन तरह के पौधे लगाए गए हैं, जो नदी-तालाब के आसपास पाए जाते हैं। उन्हें प्रागिम्स अस्ट्रस, ससितनिया, काना इंडिका कहते हैं। यह पौधे जल प्रदूषण को सोखतें हैं और हवा से ऑक्सीजन को खींचकर जड़ों के जरिये उक्त बेड के नीचे भेजते हैं।
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इससे गंदा पानी साफ होकर बाहर निकलता है। साफ हुए पानी से एएमयू के बाग और खेती में सिंचाई होती है। इसमें बोओडी पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे, सीओडी 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे और टीसीएस शून्य आ रहा है। बाकी अन्य तकनीक में ज्यादा आते हैं और देखरेख में खर्चा अधिक होता है।

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कई शहरों लग चुके वेट्सलैंड
प्रो. नदीम बताते हैं अहमदाबाद, झांसी, मोरबी गुजरात, सूरत, रतलाम, बिलासपुर मध्यप्रदेश, कलबुर्गी कर्नाटक, लखनऊ अन्य जगह वेट्सलैंड तकनीक लगा चुके हैं। अन्य जगहों से मांग आ रही है। तीन महीने पर पौधे की टहनियों को काटने पड़ते हैं। पंडुचेरी विश्वविद्यालय में स्विंग्स से एक बड़ा प्लांट लगाया गया है। इसमें बिजली का खर्चा भी नहीं है।
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इकराम वारिस
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