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पुरानी किताबों से पढ़ने के लिए मजबूर हैं बच्चे
Updated Sun, 05 Aug 2018 02:16 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर भर के कई विद्यालयों के बच्चे कई विषयों को पुरानी किताबों से पढ़ने के लिए मजबूर हैं। जबकि विभाग नई किताबों को उपलब्ध कराने के लिए तत्परता नहीं दिखा रहा है।
शहर में अधिकांश विद्यालय ऐसे हैं जहां कक्षा छह से कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों तक सरकार द्वारा दी जाने वाली किताबें पूरी तरीके से नहीं पहुंची हैं। ऐसे में यहां के बच्चे पुराने बच्चों से ली गईं किताबों से ही पढ़ रहे हैं, जबकि नए पाठ्यक्रम में कई प्रकार के पाठ बदले गए हैं। जो पुरानी किताबों से मेल नहीं खाते हैं। शहर के राजकीय कन्या इंटर कालेज में कक्षा आठ की सारी किताबें नहीं आई हैं। इसलिए पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कराई जा रही है।
बताया गया है कि यहां से बीएसए तथा डीआईओएस कार्यालय में मांग पत्र भेज दिया गया है। वहीं टीकाराम इंटर कालेज में कुछ विषयों की आधी अधूरी किताबें ही पहुंची हैं। बाबूलाल जैन इंटर कालेज में कक्षा छह में विज्ञान की किताब नहीं पहुंची हैं।
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बयान - हमारे पास सभी किताबें उपलब्ध हैं। संबंधित बीआरसी केंद्र पर यह किताबें उपलब्ध भी हैं। स्कूलों तक किताबों का न पहुंचने का कारण संचालकों का ढीला रवैया है।
- बीबी पांडेय, बीएसए प्रभारी
महज 28 फीसदी जिले में आए हैं जूते-मोजे
शासन की तरफ से जिले के परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए मात्र 28 फीसदी ही जूते-मोजे जिले में आए हैं। इनमें से विभाग द्वारा लगभग 90 प्रतिशत जूतों-मोजों का वितरण किया जा चुका है। अब देखना होगा कि बच्चों को 31 जुलाई तक जूते मोजे उपलब्ध कराने वाला योगी सरकार का वादा आखिरकार कब तक पूरा हो पाएगा।
बता दें कि जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले भर के बच्चों के लिए दो लाख 11 हजार जूते-मोजों की डिमांड शासन को भेजी थी। इस डिमांड के सापेक्ष अभी तक 60466 जूते मोजे विभाग को प्राप्त हुए हैं। जिनमें से विभाग द्वारा 90 प्रतिशत जूते मोजे बच्चों को बांट दिए गए हैं, लेकिन अभी 150534 जूते मोजों के लिए परिषदीय बच्चे इंतजार में हैं।
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शहर भर के कई विद्यालयों के बच्चे कई विषयों को पुरानी किताबों से पढ़ने के लिए मजबूर हैं। जबकि विभाग नई किताबों को उपलब्ध कराने के लिए तत्परता नहीं दिखा रहा है।
शहर में अधिकांश विद्यालय ऐसे हैं जहां कक्षा छह से कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों तक सरकार द्वारा दी जाने वाली किताबें पूरी तरीके से नहीं पहुंची हैं। ऐसे में यहां के बच्चे पुराने बच्चों से ली गईं किताबों से ही पढ़ रहे हैं, जबकि नए पाठ्यक्रम में कई प्रकार के पाठ बदले गए हैं। जो पुरानी किताबों से मेल नहीं खाते हैं। शहर के राजकीय कन्या इंटर कालेज में कक्षा आठ की सारी किताबें नहीं आई हैं। इसलिए पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कराई जा रही है।
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बताया गया है कि यहां से बीएसए तथा डीआईओएस कार्यालय में मांग पत्र भेज दिया गया है। वहीं टीकाराम इंटर कालेज में कुछ विषयों की आधी अधूरी किताबें ही पहुंची हैं। बाबूलाल जैन इंटर कालेज में कक्षा छह में विज्ञान की किताब नहीं पहुंची हैं।
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बयान - हमारे पास सभी किताबें उपलब्ध हैं। संबंधित बीआरसी केंद्र पर यह किताबें उपलब्ध भी हैं। स्कूलों तक किताबों का न पहुंचने का कारण संचालकों का ढीला रवैया है।
- बीबी पांडेय, बीएसए प्रभारी
महज 28 फीसदी जिले में आए हैं जूते-मोजे
शासन की तरफ से जिले के परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए मात्र 28 फीसदी ही जूते-मोजे जिले में आए हैं। इनमें से विभाग द्वारा लगभग 90 प्रतिशत जूतों-मोजों का वितरण किया जा चुका है। अब देखना होगा कि बच्चों को 31 जुलाई तक जूते मोजे उपलब्ध कराने वाला योगी सरकार का वादा आखिरकार कब तक पूरा हो पाएगा।
बता दें कि जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले भर के बच्चों के लिए दो लाख 11 हजार जूते-मोजों की डिमांड शासन को भेजी थी। इस डिमांड के सापेक्ष अभी तक 60466 जूते मोजे विभाग को प्राप्त हुए हैं। जिनमें से विभाग द्वारा 90 प्रतिशत जूते मोजे बच्चों को बांट दिए गए हैं, लेकिन अभी 150534 जूते मोजों के लिए परिषदीय बच्चे इंतजार में हैं।