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संपति कर में बढ़ोतरी पर पार्षदों में उबाल
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:03 AM IST
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संपत्ति कर में बढ़ोत्तरी पर पार्षदों में उबाल
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
बिना बोर्ड की बैठक के ही नगर निगम ने गृह कर सहित अन्य संपत्ति मदों पर 1.10 फीसदी और व्यवसायिक श्रेणी में इससे पांच गुना कर लगा दिया है। इसको लेकर नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति कुलदीप पांडे सहित अन्य वरिष्ठ पार्षदों ने इस पर गहरा एतराज जताया है और आरोप लगाया है कि इसकी आड़ में मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है और लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। जबकि दूसरी ओर नगर निगम इसके लिए शासनादेश का हवाला दे रहा है।
वरिष्ठ सभासद कुलदीप पांडे कहते हैं कि पार्षद मो. हामिद सहित अन्य लोगों ने इस तरफ ध्यान दिलाया है कि अचानक ही संपत्ति कर के मदों में मनमानी वृद्धि कर दी गई है। नगर निगम के ही कुछ लोग इसकी आड़ में वसूली कर रहे हैं। इससे जनता में गलत संदेश जा रहा है। नगर निगम से पूछा गया तो वह इस संबंध में शासनादेश का हवाला दे रहा है।
---जो भी वृद्धि की गई है वह नियमों के ही अनुरूप है। जहां तक वसूली का प्रश्न है तो उसकी शिकायत होनी चाहिए। इस वृद्धि में बोर्ड की कोई भूमिका नहीं है। इस संबंध में शासनादेश भी है और नियमावली भी है। (देखें नीचे) शासन से आए आदेश में कहा गया है कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस संबंध में एक बैठक की गई है। इसमें यह निर्देशित किया गया है कि नगरीय निकायों में प्रत्येक दो वर्षों में संपत्ति कर, जलकर एवं गृहकर आदि के पुन: निर्धारण की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि नगर निकायों की आय में नियमित वृद्धि हो सके। इस पर शासन के विशेष सचिव नगर विकास अनुभाग 9 ने निर्देश जारी किए।
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- डॉ. संजीव कुमार सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
‘नगर आयुक्त नगर निगम की सीमा के भीतर प्रत्येक दो वर्ष में एक बार भवनों के प्रत्येक समूह के लिए कारपेट एरिया की प्रति इकाई क्षेत्रफल (वर्गफुट) लागू, न्यूनतम किराए की दर, कलेक्टर द्वारा निर्धारित सर्किल रेट या वर्तमान किराए की न्यूनतम दरें निर्धारित करेगा’
- उत्तर प्रदेश नगर निगम संपत्ति कर नियमावली 4 (क) में प्रावधान
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
बिना बोर्ड की बैठक के ही नगर निगम ने गृह कर सहित अन्य संपत्ति मदों पर 1.10 फीसदी और व्यवसायिक श्रेणी में इससे पांच गुना कर लगा दिया है। इसको लेकर नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति कुलदीप पांडे सहित अन्य वरिष्ठ पार्षदों ने इस पर गहरा एतराज जताया है और आरोप लगाया है कि इसकी आड़ में मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है और लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। जबकि दूसरी ओर नगर निगम इसके लिए शासनादेश का हवाला दे रहा है।
वरिष्ठ सभासद कुलदीप पांडे कहते हैं कि पार्षद मो. हामिद सहित अन्य लोगों ने इस तरफ ध्यान दिलाया है कि अचानक ही संपत्ति कर के मदों में मनमानी वृद्धि कर दी गई है। नगर निगम के ही कुछ लोग इसकी आड़ में वसूली कर रहे हैं। इससे जनता में गलत संदेश जा रहा है। नगर निगम से पूछा गया तो वह इस संबंध में शासनादेश का हवाला दे रहा है।
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---जो भी वृद्धि की गई है वह नियमों के ही अनुरूप है। जहां तक वसूली का प्रश्न है तो उसकी शिकायत होनी चाहिए। इस वृद्धि में बोर्ड की कोई भूमिका नहीं है। इस संबंध में शासनादेश भी है और नियमावली भी है। (देखें नीचे) शासन से आए आदेश में कहा गया है कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस संबंध में एक बैठक की गई है। इसमें यह निर्देशित किया गया है कि नगरीय निकायों में प्रत्येक दो वर्षों में संपत्ति कर, जलकर एवं गृहकर आदि के पुन: निर्धारण की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि नगर निकायों की आय में नियमित वृद्धि हो सके। इस पर शासन के विशेष सचिव नगर विकास अनुभाग 9 ने निर्देश जारी किए।
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- डॉ. संजीव कुमार सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
‘नगर आयुक्त नगर निगम की सीमा के भीतर प्रत्येक दो वर्ष में एक बार भवनों के प्रत्येक समूह के लिए कारपेट एरिया की प्रति इकाई क्षेत्रफल (वर्गफुट) लागू, न्यूनतम किराए की दर, कलेक्टर द्वारा निर्धारित सर्किल रेट या वर्तमान किराए की न्यूनतम दरें निर्धारित करेगा’
- उत्तर प्रदेश नगर निगम संपत्ति कर नियमावली 4 (क) में प्रावधान