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एएमयू छात्र संघ की परंपराएं हो रही तार-तार

Sat, 27 Apr 2019 02:27 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Apr 2019 02:27 AM IST
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एएमयू छात्र संघ की परंपराएं हो रही तार-तार
क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
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लोकसभा चुनाव 2019 को इसलिए भी याद किया जाएगा कि इसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ की परंपराएं तार-तार हुईं। हमेशा पर्दे के पीछे से राजनीति करने वाले छात्र नेता इस बार खुलकर दलीय राजनीति में हिस्सा लिया।

भाजपा का खुलेेआम विरोध किया। तो दूसरी तरफ मुस्लिम पार्टियों को एक मंच पर लाने की कोशिश की। सीपीआई के प्रत्याशी एवं जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के पक्ष एवं विपक्ष में कैंपस की छात्र राजनीति दो खेमों में बंट गई है।
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एएमयूएसयू कोड ऑफ कंडक्ट में छात्र संघ को राजनीतिक दलों से दूर रखा गया है। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन का कहना है कि पद पर रहते हुए छात्र संघ अध्यक्ष किसी भी राजनीतिक दल का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकता। यह अलग बात है कि फैजुल हसन छात्र संघ अध्यक्ष रहते हुए स्वयं बसपा का समर्थन कर खलबली मचा दी थी।
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इसको लेकर कैंपस में काफी हंगामा हुआ था। हालांकि बाद में उन्होंने खेद व्यक्त कर इसे व्यक्तिगत समर्थन करार दिया था। अन्य दो पूर्व अध्यक्षों (नाम न छापने का आग्रह) का कहना है कि छात्र संघ की परंपरा के अनुसार निर्वाचित पदाधिकारी पद पर रहते हुए किसी दल का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकता। यदि ऐसा करता है तो अपनी ही परंपराओं को तोड़ता है जो नैतिक रूप से उचित नहीं है।


एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष सलमान इम्तियाज खुलेआम कन्हैया कुमार के समर्थन में चुनाव प्रचार करने बेगुसराय पहुंच गए हैं। छात्र संघ उपाध्यक्ष हमजा सुफयान का कहना है कि बिना कार्यकारिणी को विश्वास में लिये वह किसी दल या प्रत्याशी का प्रचार नहीं कर सकते। इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने बृहस्पतिवार को जीबीएम किया था।

एएमयूएसयू कोड ऑफ कंडक्ट एवं यहां की रवायत को देखें तो जीबीएम का नोटिफिकेशन छात्र संघ के सचिव द्वारा किया जाता है। एएमयू छात्र संघ के सचिव हुजैफा आमिर का कहना है कि उपाध्यक्ष हमजा सुफयान हवा-हवाई बातें कर रहे हैं। बगैर उनके साइन जीबीएम बुलाया नहीं जा सकता। उनका तो यहां तक कहना है कि बृहस्पतिवार को जो बैठक हुई थी, उसे मीटिंग तो कह सकते हैं लेकिन जीबीएम नहीं।

कुल मिलाकर लोग यहीं कह रहे हैं कि अध्यक्ष सलमान इम्तियाज ने परंपराएं तोड़ी। उपाध्यक्ष हमजा सुफयान भी पीछे नहीं रहे। लोग यह भी कह रहे है कि 13 मुस्लिम दलों को एएमयू में एक मंच पर बैठाकर फ्रंट बनाने की कोशिश भी छात्र संघ की परंपरा के विरुद्ध था।


छात्र संघ अध्यक्ष सलमान इम्तियाज का कहना है कि कन्हैया ने हमेशा हक की आवाज बुलंद की है। भाजपा नहीं चाहती है कि कन्हैया कुमार जीते, क्योंकि वह अकेला उनके जुल्म को ललकार रहा है। इसलिए कन्हैया कुमार को लड़ाने निकला हूं।

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