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अधिक समय गुजर जाने पर विवादों का समाधान कठित
Updated Wed, 31 Oct 2018 01:30 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कहा कि विवादों का समाधान उसी समय कर देना चाहिए, जब वह उभर रहे हैं या उनके लक्षण प्रतीत हो रहे हों। विवाद बढ़ने पर या अधिक समय गुजर जाने पर उसका समाधान कठिन होता है।
तुषार गांधी मंगलवार को एएमयू के दर्शनशास्त्र विभाग, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति तथा इंडिया लोग फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। इसका विषय ‘विवादों की वैकल्पिक समाधान के संदर्भ में गांधीवादी दृष्टिकोण’ था।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने पारंपरिक न्याय व्यवस्था से अलग हट कर वैकल्पिक समाधान का मार्ग अपनाने की वकालत की और उसे करके भी दिखाया, जिससे समाज में सौहार्द बना रहता है तथा संबंधित लोग हृदय से संतुष्ट होते हैं। पारंपरिक न्याय व्यवस्था में विवाद तथा झगड़े का अंतिम समाधान नहीं होता बल्कि पक्षों के दिलों में अन्याय का बोध तथा घृणा बनी रहती है।
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उन्होंने कहा कि बापू ने सदैव विवाद को उत्पन्न होते ही समाप्त करने का प्रयास किया तथा इसके लिये उन्होंने संवाद एवं सत्याग्रह का मार्ग अपनाया।
गांधी ने कहा कि दूसरे के लिये आदर सम्मान तथा समझने की भावना, बर्दाश्त करने की भावना से बढ़ कर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विरोध तथा विवाद को अपने लाभ के लिये प्रयोग किया जा रहा है। जिसके कारण लोग अलग अलग क्षेत्रों में निवास करने पर विवश हो गये हैं।
तुषार गांधी ने कहा कि इन परिस्थितियों में ‘अपने’ तथा ‘गैर’ की कल्पना जन्म लेती है तथा इन दरारों को भरने पर विचार किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इन दरारों के कारण उत्पन्न होने वाले झगड़े तथा हिंसा कैंसर के समान है। जिनका अंतिम समय तक कोई समाधान नहीं हो सकता।
तुषार गांधी ने कहा कि विवाद के समाधान के वैकल्पिक तरीके में पारदर्शिता बरती जाती है। साथ ही साथ सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपराओं का भी ख्याल रखा जाता है, जिससे समाज में सौहार्द बना रहता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने की। अतिथियों का स्वागत प्रो. तारिक इस्लाम ने किया।
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महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कहा कि विवादों का समाधान उसी समय कर देना चाहिए, जब वह उभर रहे हैं या उनके लक्षण प्रतीत हो रहे हों। विवाद बढ़ने पर या अधिक समय गुजर जाने पर उसका समाधान कठिन होता है।
तुषार गांधी मंगलवार को एएमयू के दर्शनशास्त्र विभाग, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति तथा इंडिया लोग फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। इसका विषय ‘विवादों की वैकल्पिक समाधान के संदर्भ में गांधीवादी दृष्टिकोण’ था।
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उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने पारंपरिक न्याय व्यवस्था से अलग हट कर वैकल्पिक समाधान का मार्ग अपनाने की वकालत की और उसे करके भी दिखाया, जिससे समाज में सौहार्द बना रहता है तथा संबंधित लोग हृदय से संतुष्ट होते हैं। पारंपरिक न्याय व्यवस्था में विवाद तथा झगड़े का अंतिम समाधान नहीं होता बल्कि पक्षों के दिलों में अन्याय का बोध तथा घृणा बनी रहती है।
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उन्होंने कहा कि बापू ने सदैव विवाद को उत्पन्न होते ही समाप्त करने का प्रयास किया तथा इसके लिये उन्होंने संवाद एवं सत्याग्रह का मार्ग अपनाया।
गांधी ने कहा कि दूसरे के लिये आदर सम्मान तथा समझने की भावना, बर्दाश्त करने की भावना से बढ़ कर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विरोध तथा विवाद को अपने लाभ के लिये प्रयोग किया जा रहा है। जिसके कारण लोग अलग अलग क्षेत्रों में निवास करने पर विवश हो गये हैं।
तुषार गांधी ने कहा कि इन परिस्थितियों में ‘अपने’ तथा ‘गैर’ की कल्पना जन्म लेती है तथा इन दरारों को भरने पर विचार किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इन दरारों के कारण उत्पन्न होने वाले झगड़े तथा हिंसा कैंसर के समान है। जिनका अंतिम समय तक कोई समाधान नहीं हो सकता।
तुषार गांधी ने कहा कि विवाद के समाधान के वैकल्पिक तरीके में पारदर्शिता बरती जाती है। साथ ही साथ सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपराओं का भी ख्याल रखा जाता है, जिससे समाज में सौहार्द बना रहता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने की। अतिथियों का स्वागत प्रो. तारिक इस्लाम ने किया।