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चार महीने के बाद भी नहीं आए कोच
Updated Wed, 08 Aug 2018 02:28 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में चार महीने के बाद भी कई खेलों में कोच की तैनाती नहीं हो सकी है। इससे खिलाड़ियों के अभ्यास पर असर पड़ रहा है। वहीं, स्थानांतरित उप क्रीड़ा अधिकारी की जगह खेल निदेशालय से दूसरा अधिकारी नहीं भेजा गया है।
स्टेडियम के प्रशिक्षु खिलाड़ी इन-दिनों आधारहीन अभ्यास के दौर से गुजर रहे हैं। कोच और खेल कैंप उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय से आवंटित होते हैं। अप्रैल में होने वाली कोच तैनाती अगस्त का पहला हफ्ता गुजर जाने के बाद भी नहीं हो सकी है। हालांकि, हर बार कोच के आने की उम्मीद स्टेडियम के अधिकारी जगाते रहे हैं। करीब एक लाख 10 हजार रुपये की लागत से बने नेट कवर्ड पिच पर कोच के नहीं होने से अभ्यास नहीं हो पा रहा है।
कमोबेश यही हाल फुटबॉल, लॉन टेनिस, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, शूटिंग, बास्केट बॉल, हैंडबॉल और वालीबाल का भी है। अलबत्ता, इन खेलों में खिलाड़ियों का पंजीकरण है। मगर, इनके बीच यह राहत देने वाली बात यह है कि वेट लिफ्ंिटग, कुश्ती, बॉक्सिंग में कोच की तैनाती है, जो खिलाड़ियों को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। स्टेडियम में प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी नसरीन बानो हैं, जो हॉकी विशेषज्ञ हैं। उप क्रीड़ा अधिकारी अश्वनी कुमार त्यागी हैं, जो टेबल टेनिस विशेषज्ञ हैं।
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इनके अलावा एक और उप क्रीड़ा अधिकारी मुकेश कुमार की तैनाती थी, जो ताइक्वांडो विशेषज्ञ थे जिनका तबादला पिछले महीने हो गया था, लेकिन उनकी जगह अब तक दूसरे अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। खिलाड़ियों को आज भी अपने कोच का इंतजार है। आखिर इनका इंतजार कब पूरा होगा।
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महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में चार महीने के बाद भी कई खेलों में कोच की तैनाती नहीं हो सकी है। इससे खिलाड़ियों के अभ्यास पर असर पड़ रहा है। वहीं, स्थानांतरित उप क्रीड़ा अधिकारी की जगह खेल निदेशालय से दूसरा अधिकारी नहीं भेजा गया है।
स्टेडियम के प्रशिक्षु खिलाड़ी इन-दिनों आधारहीन अभ्यास के दौर से गुजर रहे हैं। कोच और खेल कैंप उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय से आवंटित होते हैं। अप्रैल में होने वाली कोच तैनाती अगस्त का पहला हफ्ता गुजर जाने के बाद भी नहीं हो सकी है। हालांकि, हर बार कोच के आने की उम्मीद स्टेडियम के अधिकारी जगाते रहे हैं। करीब एक लाख 10 हजार रुपये की लागत से बने नेट कवर्ड पिच पर कोच के नहीं होने से अभ्यास नहीं हो पा रहा है।
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कमोबेश यही हाल फुटबॉल, लॉन टेनिस, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, शूटिंग, बास्केट बॉल, हैंडबॉल और वालीबाल का भी है। अलबत्ता, इन खेलों में खिलाड़ियों का पंजीकरण है। मगर, इनके बीच यह राहत देने वाली बात यह है कि वेट लिफ्ंिटग, कुश्ती, बॉक्सिंग में कोच की तैनाती है, जो खिलाड़ियों को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। स्टेडियम में प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी नसरीन बानो हैं, जो हॉकी विशेषज्ञ हैं। उप क्रीड़ा अधिकारी अश्वनी कुमार त्यागी हैं, जो टेबल टेनिस विशेषज्ञ हैं।
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इनके अलावा एक और उप क्रीड़ा अधिकारी मुकेश कुमार की तैनाती थी, जो ताइक्वांडो विशेषज्ञ थे जिनका तबादला पिछले महीने हो गया था, लेकिन उनकी जगह अब तक दूसरे अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। खिलाड़ियों को आज भी अपने कोच का इंतजार है। आखिर इनका इंतजार कब पूरा होगा।