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मंत्री जी, ऐसे कैसे परवान चढ़ेगी योजना
Updated Thu, 27 Jul 2017 01:58 AM IST
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मंत्रीजी, ऐसे कैसे परवान चढ़ेगी आपकी योजना
ब्यूरो, अमर उजाला, अतरौली।
इसे अतरौली नगर पालिका की बदनसीबी कहें या फिर अनदेखी। जिले की सबसे बड़ी नगर पालिका होने के बाद भी अतरौली में पांच साल से स्थायी ईओ की तैनाती तक नहीं हुई।
जबकि अतरौली को शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह आदर्श नगर पालिका बनते देखना चाहते हैं। उन्होंने इस बाबत पहल भी शुरू कर दी है। लेकिन क्या बिना ईओ उनकी यह योजना परवान चढ़ पाएगी, यह अपने आप में सवाल है।
शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह की ओर से अतरौली को आदर्श नगर पालिका के रूप में विकसित करने के लिए पत्र भेजा गया था। इसमें विभिन्न कार्यों के सर्वे अतिशीघ्र कराकर विस्तृत कार्य योजना बनाने को कहा गया था।
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लेकिन अतरौली में स्थाई ईओ तो है ही नहीं? आलम यह है डेढ़ माह से तो कार्यवाहक ईओ का भी चार्ज किसी के पास नहीं है। जानकारों का मानना है कि अधिशासी अधिकारी के स्थायी नियुक्ति के बिना नगर की कार्य योजना और अतरौली के विकास का खाका तैयार करना तो मतलब काम चलाने जैसा है।
वहीं बताया ये भी जा रहा है कि रिक्त चल रहे ईओ के पद पर फिर से गुलशन कुमार सूरी की कार्यवाहक ईओ के रूप में तैनाती की जा सकती है।
सीपी मिश्रा के रिटायरमेंट के बाद नहीं मिला ईओ
अतरौली में तैनात रहे ईओ सीपी मिश्रा दिसंबर 2012 में रिटायर हो गए। उनके बाद गुलशन कुमार सूरी पर कार्यवाहक ईओ का चार्ज रहा। बताया जाता है कि उनके पास पहले से ही आधा दर्जन नगर पालिकाओं का चार्ज था, सो वह पांच साल में बमुश्किल पांच बार ही अतरौली नगर पालिका में बैठे होंगे।
उन पर दुकान आवंटन से लेकर कई गड़बड़ियों के आरोप लगे तो उनसे चार्ज हटा लिया गया और जट्टारी नगर पंचायत के ईओ संदीप सक्सेना को ईओ का चार्ज मिल गया। संदीप सक्सेना प्रमोशन होने के बाद 18 जून को वे यहां से चले गए। तब से कार्यवाहक ईओ का भी चार्ज भी किसी के पास नहीं है।
अतरौली को आदर्श नगर पालिका बनाने के लिए मांगे गए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी, सफाई व्यवस्था आदि पर जो काम होने हैं उनके इस्टीमेट तैयार किए जा रहे हैं। दो-तीन दिन में ईओ की तैनाती की भी उम्मीद है। नरेंद्र कुमार, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक
हम शिक्षा राज्यमंत्री के सपनों को पूरा करने के लिए पूरी टीम के साथ सर्वे कार्य में लगे हैं। शहर की प्रमुख समस्या जल निकासी है। इसके लिए नाला और वाटर ट्रीटमेंट तथा पंपिंग स्टेशन आदि कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जा रहे हैं। नवीन जैन, निर्माण लिपिक
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ब्यूरो, अमर उजाला, अतरौली।
इसे अतरौली नगर पालिका की बदनसीबी कहें या फिर अनदेखी। जिले की सबसे बड़ी नगर पालिका होने के बाद भी अतरौली में पांच साल से स्थायी ईओ की तैनाती तक नहीं हुई।
जबकि अतरौली को शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह आदर्श नगर पालिका बनते देखना चाहते हैं। उन्होंने इस बाबत पहल भी शुरू कर दी है। लेकिन क्या बिना ईओ उनकी यह योजना परवान चढ़ पाएगी, यह अपने आप में सवाल है।
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शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह की ओर से अतरौली को आदर्श नगर पालिका के रूप में विकसित करने के लिए पत्र भेजा गया था। इसमें विभिन्न कार्यों के सर्वे अतिशीघ्र कराकर विस्तृत कार्य योजना बनाने को कहा गया था।
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लेकिन अतरौली में स्थाई ईओ तो है ही नहीं? आलम यह है डेढ़ माह से तो कार्यवाहक ईओ का भी चार्ज किसी के पास नहीं है। जानकारों का मानना है कि अधिशासी अधिकारी के स्थायी नियुक्ति के बिना नगर की कार्य योजना और अतरौली के विकास का खाका तैयार करना तो मतलब काम चलाने जैसा है।
वहीं बताया ये भी जा रहा है कि रिक्त चल रहे ईओ के पद पर फिर से गुलशन कुमार सूरी की कार्यवाहक ईओ के रूप में तैनाती की जा सकती है।
सीपी मिश्रा के रिटायरमेंट के बाद नहीं मिला ईओ
अतरौली में तैनात रहे ईओ सीपी मिश्रा दिसंबर 2012 में रिटायर हो गए। उनके बाद गुलशन कुमार सूरी पर कार्यवाहक ईओ का चार्ज रहा। बताया जाता है कि उनके पास पहले से ही आधा दर्जन नगर पालिकाओं का चार्ज था, सो वह पांच साल में बमुश्किल पांच बार ही अतरौली नगर पालिका में बैठे होंगे।
उन पर दुकान आवंटन से लेकर कई गड़बड़ियों के आरोप लगे तो उनसे चार्ज हटा लिया गया और जट्टारी नगर पंचायत के ईओ संदीप सक्सेना को ईओ का चार्ज मिल गया। संदीप सक्सेना प्रमोशन होने के बाद 18 जून को वे यहां से चले गए। तब से कार्यवाहक ईओ का भी चार्ज भी किसी के पास नहीं है।
अतरौली को आदर्श नगर पालिका बनाने के लिए मांगे गए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी, सफाई व्यवस्था आदि पर जो काम होने हैं उनके इस्टीमेट तैयार किए जा रहे हैं। दो-तीन दिन में ईओ की तैनाती की भी उम्मीद है। नरेंद्र कुमार, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक
हम शिक्षा राज्यमंत्री के सपनों को पूरा करने के लिए पूरी टीम के साथ सर्वे कार्य में लगे हैं। शहर की प्रमुख समस्या जल निकासी है। इसके लिए नाला और वाटर ट्रीटमेंट तथा पंपिंग स्टेशन आदि कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जा रहे हैं। नवीन जैन, निर्माण लिपिक