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अब सचल दल केंद्र पर क्लोज सर्किट कैमरे का जारी किया करेंगे प्रमाणपत्र
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अब सचल दल केंद्रों पर अनियमितताओं के निरीक्षण के साथ-साथ क्लोज सर्किट कैमरे का प्रमाणपत्र भी जारी किया करेंगे। इसके लिए शासन ने डीआईओएस अलीगढ़ डॉ. धर्मेंद्र शर्मा को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही सचल दल पर इस बार कैमरों तथा वाइस रिकार्डर की निगरानी का दायित्व भी बढ़ गया है।
बता दें कि नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराने के लिए कई सचल दलों (फ्लाइंग स्क्वायड) का गठन किया जाता है। यह सचल दल सभी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर अनियमितताओं की जांच करते हैं। देखते हैं कि परीक्षा केंद्र पर कहीं परीक्षार्थियों को नकल तो नहीं कराई जा रही है। कहीं केंद्र व्यवस्थापक द्वारा नकल के लिए रुपये तो बसूले नहीं जा रहे हैं।
इमला बोलकर नकल तो नहीं कराई जा रही है। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करते हैं कि कहीं परीक्षाकेंद्रों पर बाहर से कापियां लिखकर अंदर लगाई तो नहीं जा रही हैं। लेकिन इस बार से सचल दल को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन ने पिछले सत्र से फैसला लिया था कि परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराई जाएं। शिकायत मिली थी कि कई जगह बाहर से इमला बोलकर नकल कराई जा रही है। इसलिए इस बार शासन ने वाइस रिकार्डर लगाने के भी सख्त निर्देश दे दिए। इस नए बदलाव का असर सचल दल की कार्यवाही पर भी पड़ेगा। सचल दल अनियमितताओं के साथ यह भी देखेंगे कि कितने कक्षों में परीक्षा चल रही है।
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इन सभी कक्षों के कैमरे और वाइस रिकार्डर सुचारू रूप से चल रहे हैं कि नहीं। अगर स्थिति सही पायी गई तो परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक के हस्ताक्षर लेकर स्वयं क्लोज सर्किट कैमरे का प्रमाणपत्र जारी करेंगे। जिसमें सभी चालू कैमरों, वाइस रिकार्डर आदि संख्या का विवरण होगा। अधिकारियों के मुताबिक जिन्हें यह प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा, वह कार्यवाही की जद में आ सकते हैं।
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अब सचल दल केंद्रों पर अनियमितताओं के निरीक्षण के साथ-साथ क्लोज सर्किट कैमरे का प्रमाणपत्र भी जारी किया करेंगे। इसके लिए शासन ने डीआईओएस अलीगढ़ डॉ. धर्मेंद्र शर्मा को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही सचल दल पर इस बार कैमरों तथा वाइस रिकार्डर की निगरानी का दायित्व भी बढ़ गया है।
बता दें कि नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराने के लिए कई सचल दलों (फ्लाइंग स्क्वायड) का गठन किया जाता है। यह सचल दल सभी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर अनियमितताओं की जांच करते हैं। देखते हैं कि परीक्षा केंद्र पर कहीं परीक्षार्थियों को नकल तो नहीं कराई जा रही है। कहीं केंद्र व्यवस्थापक द्वारा नकल के लिए रुपये तो बसूले नहीं जा रहे हैं।
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इमला बोलकर नकल तो नहीं कराई जा रही है। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करते हैं कि कहीं परीक्षाकेंद्रों पर बाहर से कापियां लिखकर अंदर लगाई तो नहीं जा रही हैं। लेकिन इस बार से सचल दल को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन ने पिछले सत्र से फैसला लिया था कि परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराई जाएं। शिकायत मिली थी कि कई जगह बाहर से इमला बोलकर नकल कराई जा रही है। इसलिए इस बार शासन ने वाइस रिकार्डर लगाने के भी सख्त निर्देश दे दिए। इस नए बदलाव का असर सचल दल की कार्यवाही पर भी पड़ेगा। सचल दल अनियमितताओं के साथ यह भी देखेंगे कि कितने कक्षों में परीक्षा चल रही है।
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इन सभी कक्षों के कैमरे और वाइस रिकार्डर सुचारू रूप से चल रहे हैं कि नहीं। अगर स्थिति सही पायी गई तो परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक के हस्ताक्षर लेकर स्वयं क्लोज सर्किट कैमरे का प्रमाणपत्र जारी करेंगे। जिसमें सभी चालू कैमरों, वाइस रिकार्डर आदि संख्या का विवरण होगा। अधिकारियों के मुताबिक जिन्हें यह प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा, वह कार्यवाही की जद में आ सकते हैं।