फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   पाश्चात्य देश ऊंची दर पर हमें ही बेच रहे हमारे ही आइडिया : प्रो. मिश्र

पाश्चात्य देश ऊंची दर पर हमें ही बेच रहे हमारे ही आइडिया : प्रो. मिश्र

Mon, 19 Nov 2018 02:55 AM IST
Updated Mon, 19 Nov 2018 02:55 AM IST
विज्ञापन
पाश्चात्य देश ऊंची दर पर हमें ही बेच रहे हमारे ही आइडिया : प्रो. मिश्र
डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
विज्ञापन

आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिक प्रो. डीपी मिश्र का कहना है आज पाश्चात्य देश हमारे युवाओं के आइडियाज को ऊंची दर पर हमें ही बेच रहे हैं। उन्होंने देश में हो रहे एकतरफा विकास को भी घातक बताया। शासन, प्रशासन, शिक्षा एवं अर्थव्यवस्था में भारी बदलाव की जरूरत भी बताई। उनका मानना है कि विकास प्रकृति को नुकसान किए बिना विकास होना चाहिए।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे प्रो. डीपी मिश्र ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि आज देश के विश्वविद्यालय एवं शैक्षणिक संस्थानों में तरह-तरह की प्रतियोगिताएं एवं अवार्ड आदि का आयोजन किया जा रहा है। कुछ खर्च कर पाश्चात्य देश अवार्ड्स देते हैं। हम इसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। जबकि हकीकत यह है कि ये लोग हमारे युवाओं के आइडियाज का व्यावसायिक इस्तेमाल करते हैं और महंगे दर पर हमको ही बेचते हैं। प्रो. मिश्र आधुनिक भारत के निर्माण के लिए वर्तमान विकास प्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अभी जो मॉडल अपनाया गया है, वह पश्चिम पर आधारित है। शासन, प्रशासन, शिक्षा एवं अर्थव्यवस्था में भारी बदलाव की जरूरत है। उनका कहना है कि आज हम लोग एकतरफा विकास कर रहे हैं, जो टिकाऊ नहीं हो सकता। हम लोग विकास के लिए प्रकृति का दोहन कर रहे हैं। जिसके चलते हवा जहरीली एवं पीने का पानी खराब होता जा रहा है। चारों तरफ गंदगी का अंबार है। उपजाऊ भूमि बंजर बन रही हैं। नदियां नालों में तब्दील हो रहीं हैं। वे समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय है। वह इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ हम्यूमनस्टिक एजूकेशन के माध्यम से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। कहते हैं कि विकास इस तरह होना चाहिए कि हमारी धरती और संपदा नष्ट न हो। प्रकृति के साथ हम जिएं और विकास को आगे बढ़ाएं। हमारी अर्थव्यवस्था हमारे हिसाब से हमारे लोगों के लिए हो और उनका आधार भारतीय संस्कृति एवं परंपरा से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थानों में महंगे उपकरण बाहर से खरीदे जाते हैं। यह उचित नहीं है। आज जरूरत इस बात की है कि लैब उपकरण बनाने के लिए हर विश्वविद्यालय में इंतजाम हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed