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सरकारी अस्पतालों का डाटा निजी अस्पतालों को लीक
Updated Tue, 04 Sep 2018 01:48 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों का डाटा निजी अस्पतालों को दिया जा रहा है। इस बात की आशंका उस समय बलवती हुई जब दीनदयाल संयुक्त अस्पताल के सर्जिकल वार्ड से कोई मरीजों के रिकार्ड का रजिस्टर व अन्य दस्तावेज चुराकर ले गया। अस्पताल की सीएमएस डॉ. याचना शर्मा ने थाना क्वार्सी में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों की बड़ी संख्या पर कुछ निजी नर्सिंग होम्स और अस्पतालों की भी नजर रहती है। जिला महिला अस्पताल में ऐसी कई दलाल और कुछ आशा वर्कर रंगे हाथों पकड़ी गई हैं जो अस्पताल में आने वाली महिलाओं को गुमराह कर उन्हें प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में ले जाती थीं।
आंकड़ों की बात की जाए तो मलखान सिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1600 से 1800 मरीज ओपीडी में आते हैं। इतनी ही संख्या दीन दयाल संयुक्त अस्पताल की भी है। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में भी प्रतिदिन 450 से 500 तक मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा वार्डों में भर्ती होने वाले मरीज अलग हैं। मरीजों की इस संख्या पर निजी अस्पतालों की नजर है।
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यही कारण है कि डीडी अस्पताल जैसी घटनाएं प्रकाश में आती हैं। यहां पर चोरी हुए रजिस्टर में मरीज का नाम पता, मोबाइल नंबर, बीमारी, इलाज करने वाले डॉक्टर आदि का विवरण होता है जो निजी अस्पतालों के लिए बेहद उपयोगी है।
तीन चार बार तो मैंने अपने यहां पर दलालों को रंगे हाथों पकड़ा। एक दलाल धनीपुर के अस्पताल, एक सारसौल के अस्पताल से जुड़ी थी। एक दलाल तो मरीज को स्ट्रेचर से उठवा कर अपने साथ ले गई। इन्हीं सब को देखते हुए हमने तो महिला सुरक्षा गार्ड अस्पताल में तैनात किए हैं। - डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों का डाटा निजी अस्पतालों को दिया जा रहा है। इस बात की आशंका उस समय बलवती हुई जब दीनदयाल संयुक्त अस्पताल के सर्जिकल वार्ड से कोई मरीजों के रिकार्ड का रजिस्टर व अन्य दस्तावेज चुराकर ले गया। अस्पताल की सीएमएस डॉ. याचना शर्मा ने थाना क्वार्सी में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों की बड़ी संख्या पर कुछ निजी नर्सिंग होम्स और अस्पतालों की भी नजर रहती है। जिला महिला अस्पताल में ऐसी कई दलाल और कुछ आशा वर्कर रंगे हाथों पकड़ी गई हैं जो अस्पताल में आने वाली महिलाओं को गुमराह कर उन्हें प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में ले जाती थीं।
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आंकड़ों की बात की जाए तो मलखान सिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1600 से 1800 मरीज ओपीडी में आते हैं। इतनी ही संख्या दीन दयाल संयुक्त अस्पताल की भी है। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में भी प्रतिदिन 450 से 500 तक मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा वार्डों में भर्ती होने वाले मरीज अलग हैं। मरीजों की इस संख्या पर निजी अस्पतालों की नजर है।
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यही कारण है कि डीडी अस्पताल जैसी घटनाएं प्रकाश में आती हैं। यहां पर चोरी हुए रजिस्टर में मरीज का नाम पता, मोबाइल नंबर, बीमारी, इलाज करने वाले डॉक्टर आदि का विवरण होता है जो निजी अस्पतालों के लिए बेहद उपयोगी है।
तीन चार बार तो मैंने अपने यहां पर दलालों को रंगे हाथों पकड़ा। एक दलाल धनीपुर के अस्पताल, एक सारसौल के अस्पताल से जुड़ी थी। एक दलाल तो मरीज को स्ट्रेचर से उठवा कर अपने साथ ले गई। इन्हीं सब को देखते हुए हमने तो महिला सुरक्षा गार्ड अस्पताल में तैनात किए हैं। - डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल