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जिसका बिल उस नाम का मेडिकल स्टोर नहीं
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:28 AM IST
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जिसका बिल उस नाम का मेडिकल स्टोर नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक फार्मेसिस्ट ने अपनी पत्नी के इलाज में खर्च हुए पैसे की प्रतिपूर्ति दावे के लिए फर्जी बिल ही लगा दिए। करीब 84990 रुपये के भुगतान के लिए एक ऐसे मेडिकल स्टोर का बिल लगा दिया जो अस्तित्व में ही नहीं है। संदेह होने पर जब सीएमओ के स्तर से जांच कराई गई तो स्थिति स्पष्ट हुई। अब सीएमओ ने फार्मेसिस्ट को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि फार्मेसिस्ट ने फर्जी कागजों से सरकारी धन हड़पने का प्रयास किया है।
लोधा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मेसिस्ट उमा शंकर तैनात है। नोटिस में कहा गया है कि लोधा सीएचसी के अधीक्षक ने अपनी संस्तुति के माध्यम से कहा था कि उमाशंकर ने दो मार्च 2017 से 29 मार्च 2017 तक की अवधि में अपनी पत्नी का इलाज भारद्वाज नर्सिंग होम में कराया। इस इलाज के लिए 84990 रुपये का प्रतिपूर्ति दावा किया। इस दावे में जो बिल प्रस्तुत किए गए थे। वह कुछ संदिग्ध लग रहे थे। इसके लिए सीएमओ ने अपने स्तर से पहले दर्शाए गए मेडिकल स्टोर पर पत्र भेजा। लेकिन जब कोई प्रतिउत्तर नहीं आया तो सीएमओ कार्यालय से एक कर्मचारी भेजा, लेकिन वहां पर उस नाम का कोई मेडिकल स्टोर नहीं मिला। इसके बाद सीएमओ ने उस डाक्टर से संपर्क किया। जिनके उपचार की बात दावे में कही थी।
लेकिन संबंधित डाक्टर ने भी मना कर दिया कि जो बिल दिखाए गए हैं। वह उनकी मेडिकल शॉप के नहीं हैं। यही स्थिति सहायक औषधि आयुक्त के माध्यम से कराई गई जांच में भी निकली। इसके बाद सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल ने नोटिस भेजकर जवाब मांगा है कि जानबूझकर फर्जी कागजों से सरकारी पैसा हड़पने का प्रयास किया है। क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए? नियंत्रक अधिकारी के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
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कर्मचारी छुट्टी पर, उसके नाम का वेतन निकाला
उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग के सचिव वी हेकाली झिमोमी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जवां के प्रभारी अधीक्षक डॉ. अनूप गुप्ता के खिलाफ अपर निदेशक स्वास्थ्य को जांच करने के निर्देश दिए हैं। सचिव की ओर से भेजे पत्र में कहा गया है कि जवां सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार गुप्ता के द्वारा स्वास्थ्य पर्यवेक्षक राजबाला का बिना अवकाश स्वीकृत के ही कर्मचारी से सांठगांठ कर ड्यूटी पर दर्शा दिया और वेतन आहरित करवा दिया। इसके लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता गीता कुमारी के वेतन संशोधन विवरण में फर्जी अवकाश दर्शाकर वेतन आहरित किया गया। डॉ. अनूप कुमार गुप्ता के इस कार्य को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के खिलाफ माना है। इस मामले की जांच एडी हेल्थ से कराने की स्वीकृति राज्यपाल ने दी है।
सहायक शोध अधिकारी को एक तरफा कार्यमुक्त किया
ट्रांसफर होने के बाद भी कार्यमुक्त नहीं किए जाने पर महानिदेशक परिवार कल्याण नीना गुप्ता ने जिला महिला अस्पताल की सीएमएस को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि इनको एक तरफा कार्यमुक्त कर दिया गया है। इनका वेतन अहरित नहीं किया जाए। जिला महिला अस्पताल में तैनात सहायक शोध अधिकारी प्रताप सिंह का तबादला मैनपुरी किया गया था। कई बार निर्देशों के बाद भी प्रताप सिंह को कार्यमुक्त नहीं किया गया।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक फार्मेसिस्ट ने अपनी पत्नी के इलाज में खर्च हुए पैसे की प्रतिपूर्ति दावे के लिए फर्जी बिल ही लगा दिए। करीब 84990 रुपये के भुगतान के लिए एक ऐसे मेडिकल स्टोर का बिल लगा दिया जो अस्तित्व में ही नहीं है। संदेह होने पर जब सीएमओ के स्तर से जांच कराई गई तो स्थिति स्पष्ट हुई। अब सीएमओ ने फार्मेसिस्ट को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि फार्मेसिस्ट ने फर्जी कागजों से सरकारी धन हड़पने का प्रयास किया है।
लोधा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मेसिस्ट उमा शंकर तैनात है। नोटिस में कहा गया है कि लोधा सीएचसी के अधीक्षक ने अपनी संस्तुति के माध्यम से कहा था कि उमाशंकर ने दो मार्च 2017 से 29 मार्च 2017 तक की अवधि में अपनी पत्नी का इलाज भारद्वाज नर्सिंग होम में कराया। इस इलाज के लिए 84990 रुपये का प्रतिपूर्ति दावा किया। इस दावे में जो बिल प्रस्तुत किए गए थे। वह कुछ संदिग्ध लग रहे थे। इसके लिए सीएमओ ने अपने स्तर से पहले दर्शाए गए मेडिकल स्टोर पर पत्र भेजा। लेकिन जब कोई प्रतिउत्तर नहीं आया तो सीएमओ कार्यालय से एक कर्मचारी भेजा, लेकिन वहां पर उस नाम का कोई मेडिकल स्टोर नहीं मिला। इसके बाद सीएमओ ने उस डाक्टर से संपर्क किया। जिनके उपचार की बात दावे में कही थी।
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लेकिन संबंधित डाक्टर ने भी मना कर दिया कि जो बिल दिखाए गए हैं। वह उनकी मेडिकल शॉप के नहीं हैं। यही स्थिति सहायक औषधि आयुक्त के माध्यम से कराई गई जांच में भी निकली। इसके बाद सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल ने नोटिस भेजकर जवाब मांगा है कि जानबूझकर फर्जी कागजों से सरकारी पैसा हड़पने का प्रयास किया है। क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए? नियंत्रक अधिकारी के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
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कर्मचारी छुट्टी पर, उसके नाम का वेतन निकाला
उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग के सचिव वी हेकाली झिमोमी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जवां के प्रभारी अधीक्षक डॉ. अनूप गुप्ता के खिलाफ अपर निदेशक स्वास्थ्य को जांच करने के निर्देश दिए हैं। सचिव की ओर से भेजे पत्र में कहा गया है कि जवां सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार गुप्ता के द्वारा स्वास्थ्य पर्यवेक्षक राजबाला का बिना अवकाश स्वीकृत के ही कर्मचारी से सांठगांठ कर ड्यूटी पर दर्शा दिया और वेतन आहरित करवा दिया। इसके लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता गीता कुमारी के वेतन संशोधन विवरण में फर्जी अवकाश दर्शाकर वेतन आहरित किया गया। डॉ. अनूप कुमार गुप्ता के इस कार्य को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के खिलाफ माना है। इस मामले की जांच एडी हेल्थ से कराने की स्वीकृति राज्यपाल ने दी है।
सहायक शोध अधिकारी को एक तरफा कार्यमुक्त किया
ट्रांसफर होने के बाद भी कार्यमुक्त नहीं किए जाने पर महानिदेशक परिवार कल्याण नीना गुप्ता ने जिला महिला अस्पताल की सीएमएस को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि इनको एक तरफा कार्यमुक्त कर दिया गया है। इनका वेतन अहरित नहीं किया जाए। जिला महिला अस्पताल में तैनात सहायक शोध अधिकारी प्रताप सिंह का तबादला मैनपुरी किया गया था। कई बार निर्देशों के बाद भी प्रताप सिंह को कार्यमुक्त नहीं किया गया।